बिजनेस स्टैंडर्ड - स्थानीय पुट से धाक जमाएगी आइकिया
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स्थानीय पुट से धाक जमाएगी आइकिया

रॉयटर्स / हैदराबाद June 13, 2018

अगले महीने हैदराबाद में अपना पहला स्टोर खोलने की तैयारी में जुटी आइकिया
फर्नीचर से लेकर खान-पान तक में रख रही स्थानीय जरूरतों का ध्यान

बिजनेस स्टैंडर्ड स्थानीय पुट से धाक जमाएगी आइकियास्वीडन की दिग्गज फर्नीचर कंपनी आइकिया भारत में अगले महीने अपना पहला स्टोर खोलने जा रही है। कंपनी इस स्टोर में स्थानीयता का पुट डालने की भरसक कोशिश कर रही है ताकि लोगों को यहां खरीदारी करने के दौरान अपनेपन का अहसास हो। करीब 4 लाख वर्ग फुट में फैले इस स्टोर में एक ही छत के नीचे खान-पान की सुविधाओं के साथ हर तरह के फर्नीचर उपलब्ध होंगे। यहां आप अपनी पसंद और जरूरत के मुताबिक खाने के मेन्यू से लेकर फर्नीचर तक खुद तय कर सकते हैं।

आइकिया हैदराबाद स्टोर में पहली इनहाउस असेंबली टीम तैयार कर रही है, वहीं खरीदारी के दौरान आप समोसे से लेकर ढेरों स्थानीय लजीज पकवानों का जायका भी ले सकेंगे। आइकिया के वित्त प्रमुख जुवेंसियो मैजटू कहते हैं, 'हमने इस बाजार में कदम रखने के साथ ही यहां की जरूरतों का खयाल रखने की कोशिश की है।'

मैजटू कहते हैं, 'मिसाल के तौर पर भारतीय लोग ऐसे गद्दे पसंद करते हैं, जो आरामदायक होने के साथ टिकाऊ भी हो। इसलिए हम ऐसे गद्दे तैयार कर रहे हैं जिनमें नारियल के रेशों की भी एक परत हो क्योंकि यह गर्मी में ठंडा होता है।' ग्राहकों की जरूरतों का खयाल स्टोर की बनावट और साज-सज्जा से लेकर छुरी-कांटा जैसे छोटे सामान में भी रखा जाएगा।

देश के फर्नीचर बाजार में असंगठित खुदरा, स्थानीय कारीगरों और कारोबारियों का दबदबा है और ग्राहक चाहते हैं कि उनके फर्नीचर पूरी तरह तैयार होकर उनके दरवाजे तक आएं। शोध कंपनी यूरोमॉनीटर में विश्लेषक सौम्या आदिराजू कहते हैं कि देश में अपनी पसंद के फर्नीचर बनाने का चलन ज्यादा है। ऐसे में आइकिया को भारतीयों को लुभाने के लिए आपूर्ति और फर्नीचर असेंबल करने की जरूरतों के बारे में सोचना होगा। आइकिया के अपनी पसंद के अनुकूल डिजाइन किया गया फर्नीचर (डीआईवाई) बेहद मशहूर है। हालांकि इसकी जटिल यूनिट को असेंबल करने की दिक्कतों को देखते हुए कंपनी 150 सदस्यों वाली टीम तैयार कर रही है, जो फर्नीचर को असेंबल करने में मदद देगी।

कंपनी अर्बनक्लैप जैसी सेवा प्रदाताओं के साथ भी साझेदारी कर रही है, जो बढ़ई आदि की सुविधा मुहैया कराती है। देश में आइकिया के उप प्रमुख पैट्रिक एंटनी कहते हैं कि आइकिया की इन हाउस असेंबली टीम, अर्बनक्लैप सेवाओं के मुकाबले थोड़ी महंगी हो सकती है। आइकिया ने देश में 800 से ज्यादा घरों का जायजा लिया। हैदराबाद स्टोर में बड़े कमरों वाले फर्नीचर होंगे, वहीं मुंबई स्टोर में कम आकार के कमरों के अनुकूल उत्पाद होंगे।

मैजटू कहते हैं, 'सबसे पहले हमें यह समझने की जरूरत है कि ग्राहक की जीवनशैली कैसी है।'   देश में कई अंतरराष्ट्रीय रेस्तरां चेन की तरह आइकिया अपने मेनू में बदलाव कर रही है ताकि लोगों को स्थानीय जायके का लुत्फ दिया जा सके। आइकिया के एंटनी का कहना है कि देश में लोगों की धार्मिक भावनाओं का खयाल रखते हुए कंपनी बीफ के व्यंजन नहीं बेचेगी लेकिन खरीदार बिरयानी, समोसा और वेजिटेबल हॉटडॉग का जायका ले सकेंगे।

आइकिया के समूह मुख्य कार्याधिकारी जैस्पर ब्रॉडिन कहते हैं कि बाजार पर धाक जमाने के लिए आइकिया कम कीमत वाली रणनीति अपनाएगी। इसके लिए स्टोर में 200 रुपये से कम कीमत वाले 1,000 उत्पाद उपलब्ध होंगे। उन्होंने कहा कि कंपनी ने ऑस्ट्रेलिया और चीन में जो गलत कदम उठाया था उसे वह दोहराना नहीं चाहेगी। हालांकि ब्रॉडिन कहते हैं कि कीमतों को कम रखने में कर एक बड़ी चुनौती साबित हो सकती है। उन्होंने बताया, 'हमारी सबसे बड़ी चुनौती आयात शुल्क से जुड़ी है। यह ऐसी चीज है जिसके बारे में हम कुछ नहीं कर सकते।'

बड़ा दांव, बड़ा जोखिम
आइकिया समूह की कंपनी के स्वामित्व वाले स्टोरों में 2017 में खुदरा बिक्री में 4 फीसदी की वृद्धि देखी गई। यूरोमॉनिटर के मुताबिक देश के घरेलू सामानों और होम फर्निशिंग स्टोर की बिक्री में करीब 9 फीसदी की वृद्धि देखी गई। लेकिन इसके बावजूद आइकिया को देश में कई ऑनलाइन फर्नीचर स्टार्ट अप मसलन पेपरफ्राई, अर्बनलैडर और फैबफर्निश जैसी कंपनियों से कड़ी प्रतिस्पद्र्धा का सामना करना पड़ेगा और सफलता पूरी तरह से कीमत की रणनीति पर निर्भर होगी। आइकिया ने देश में करीब 67 डॉलर का निवेश किया है। एंटनी का कहना है कि कंपनी ने शुरुआत में वर्ष 2025 तक 1.56 अरब डॉलर के निवेश के साथ 25 स्टोर तैयार करने की उम्मीद की थी। लेकिन अब कंपनी मूल योजना के मुकाबले ज्यादा खर्च करने का विकल्प तलाश रही है। ब्रॉडिन कहते हैं कि कंपनी ने हैदराबाद, बेंगलूरु, मुंबई और गुरुग्राम में जमीन खरीदी है और वह सूरत, अहमदाबाद, कोलकाता, चेन्नई और पुणे जैसे बाजारों में अपने दायरे का विस्तार करना चाहती है। हालांकि वह यह भी कहते हैं कि यहां मुनाफा मिलने में देरी होगी।

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