बिजनेस स्टैंडर्ड - वैश्विक कारोबारी जगत में बढ़ सकता है तनाव
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वैश्विक कारोबारी जगत में बढ़ सकता है तनाव

बाजार संकेतक
देवांग्शु दत्ता /  06 12, 2018

वैश्विक संकेत और वृहद आर्थिक क्षेत्र की खबरें इस सप्ताह कारोबारियों को सोचने की कई वजह देंगी। अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के जी 7 देशों की बैठक छोड़कर बाहर निकल जाने के बाद कारोबारी तनाव में बहुत तेजी आने की आशंका है। इस सप्ताह ब्रेक्सिट बिल पर मतदान होना है जो ब्रिटेन का आर्थिक भविष्य तय करेगा। इतना ही नहीं यह समूचे यूरोपीय संघ की विकास संभावनाओं पर भी असर डालेगा।  इसके अलावा इस सप्ताह केंद्रीय बैंकों से तीन महत्त्वपूर्ण नीतिगत वक्तव्य जारी होने हैं। उम्मीद की जा रही है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व तेजी की संभावना वाला वक्तव्य जारी करेगा और नीतिगत दर बढ़ाएगा। यूरोपीय केंद्रीय बैंक भी अपने बॉन्ड खरीद कार्यक्रम को शिथिल करने की घोषणा कर सकता है। बैंक ऑफ जापान से भी उम्मीद है कि वह क्वांटिटेटिव ईजिंग की अपनी प्रक्रिया जारी रखेगा। इन तीनों नीतिगत वक्तव्यों की बारीकी से पड़ताल करनी होगी। 

भारतीय रिजर्व बैंक ने गत सप्ताह जो नीतिगत समीक्षा की उससे बाजार उत्साहित हुआ और शेयरों के दाम में तेजी देखने को मिली। समिति ने नीतिगत दरों में इजाफा किया लेकिन उसने अनुमानों में सुधार की राह भी तैयार की। केंद्रीय बैंक ने मुद्रास्फीति की दर में मामूली इजाफे की उम्मीद जताई है और साथ ही जीडीपी दर में सुधार की भी। इसलिए वह निरपेक्षता बरत रहा है। वह न तो मुद्रा आपूर्ति को सख्त कर रहा है और न ही शिथिल। बाजार इससे कहीं अधिक सख्त कदम की उम्मीद कर रहा था। 
 
मई में खुदरा महंगाई सूचकांक और थोक मूल्य सूचकांक तथा अप्रैल के औद्योगिक उत्पादन सूचकांक के आंकड़े इस सप्ताह जारी किए जाएंगे। वे आंकड़े विनिर्माण की सेहत का संकेत देंगे और यह भी बताएंगे कि कॉर्पोरेट जगत में कच्चे माल की लागत वहन करने की क्षमता है या नहीं। कच्चे तेल की कीमतें कम हो सकती हैं अगर सऊदी अरब और रूस उत्पादन बढ़ाकर ईरान पर प्रतिबंध के चलते हो रही तेल की कमी की भरपाई कर दें। अगर ऐसा होता है तो ईंधन के मोर्चे पर महंगाई थोड़ी कम होगी और सरकार पर खुदरा उत्पादों पर शुल्क कम करने का दबाव भी घटेगा। रुपये के डेट बाजार में प्रतिफल में कमी आई है। हालांकि कारोबारियों ने उच्च दरों के साथ समायोजन कर लिया है। वाणिज्यिक बैंकों ने किसी तरह दरों में इजाफा कर दिया है। किसी न किसी तरह दरों के और ऊपर जाने की संभावना है। अगर फेडरल रिजर्व दरें बढ़ाता है और यूरोपीय केंद्रीय बैंक सख्ती करता है तो संभव है नकदी प्रतिफल में तंगी आए। 
 
इससे जोखिम भरी तृतीय विश्व की परिसंपत्तियों से दूरी बनती दिख सकती है लेकिन फिलहाल तो विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक विशुद्घ खरीदार की भूमिका में हैं। रुपया प्रतिफल में तंगी पर अवश्य प्रतिक्रिया देगा और ऐसे में मौद्रिक अस्थिरता के लिए भी तैयार रहना चाहिए। अब तक घरेलू संस्थान और म्युचुअल फंड ही बाजार को संभाले हैं। मई के म्युचुअल फंड के आंकड़े रोचक बातें बयान करते हैं। अब तक की बात करें तो अप्रैल- मई 2018 में मुद्रा बाजार के फंड्स की 697 अरब रुपये की शुद्घ आवक हुई जबकि पिछले साल समान अवधि में यह राशि 347 अरब रुपये थी। इक्विटी की आवक भी 140 अरब रुपये से बढ़कर 211 अरब रुपये हो गयी। आय के फंड में से 397 अरब रुपये की आवक की तुलना में केवल 152 अरब रुपये बाहर गए। इक्विटी को अभी भी समर्थन मिल रहा है। यह उम्मीद के मुताबिक ही है क्योंकि ब्याज दर बढ़ रही हैं। सरकार को सरकारी बैंकों को उबारने का तरीका तलाश करना होगा। वर्ष 2017-18 में इन बैकों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा। उनके फंसे हुए कर्ज में भी लगातार इजाफा हो रहा है। बैकों में भारी पैमाने पर पूंजी नए सिरे से डालनी होगी। इस बीच संभावित हल के रूप में बैड बैंक की स्थापना और विलय आदि की बातें सामने आई हैं। विलय की अफवाहों को तो वित्त मंत्री ने नकार दिया है लेकिन इसका यह अर्थ नहीं कि इसे सिरे से खारिज कर दिया जाए। जब तक सरकारी बैंकों की स्थिति मजबूत नहीं हो जाती है तब तक ऋण प्रभावित होता रहेगा और पूंजी की लागत बढ़ेगी। आईसीआईसीआई बैंक-वीडियोकॉन का मामला अंतरराष्ट्रीय रुख ले रहा है क्योंकि अमेरिकी प्रतिभूति विनिमय आयोग कार्रवाई करने जा रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि आईसीआईसीआई अमेरिका में सूचीबद्घ है। अफवाह है कि बैंक सेबी के साथ मामला निपटाने के लिए सहमति याचिका का मार्ग अपना सकता है। इस मामले में कुछ भी घटित होने का असर शेयर कीमतों पर पड़ेगा। 
 
चीनी उद्योग को 70 अरब रुपये का आर्थिक पैकेज दिया गया है। उत्तर प्रदेश के किसानों का 130 अरब रुपये से अधिक बकाया है। चीनी के लिए 29 रुपये प्रति किलो का न्यूनतम बिक्री मूल्य तय करने का उद्योग जगत के अंदरूनी लोग मजाक उड़ा रहे हैं। उनका कहना है कि इसकी उत्पादन लागत ही 34-35 रुपये प्रति किलो है। एथेनॅाल यूनिट को सब्सिडी देने की पेशकश दीर्घावधि में सकारात्मक जरूर साबित हो सकती है। पिछले सत्र में बंपर फसल उत्पादन और इस बार भी ऐसी उम्मीद को देखते हुए वैश्विक स्तर पर अत्यधिक आपूर्ति की स्थिति है। इन हालात में उच्च क्रय मूल्य तय करना गलत साबित हो सकता है। शुरुआती उत्साह के बाद चीनी कंपनियों की शेयर कीमतों में गिरावट आई है। तकनीकी तौर पर देखें तो आरबीआई की नीतिगत समीक्षा के बाद राहत भरी तेजी का सिलसिला जारी है। इस सप्ताह भ्रामक संकेत सामने आ सकते हैं क्योंकि कई स्रोतों से कई तरह की खबरें आएंगी। ऐसी संभावना है कि पूरे सप्ताह अस्थिरता का माहौल बना रहे। अगर सूचकांक 10,650 से नीचे आता है तो वह 10,350 के स्तर तक जा सकता है। जबकि अगर 10,900 के स्तर से अधिक तेजी आई तो वह नई ऊंचाई पर पहुंच सकता है।
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