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कॉर्पोरेट जगत में बढ़ता जा रहा है उलझे हुए जुमलों का इस्तेमाल

इंसानी पहलू
श्यामल मजूमदार /  06 10, 2018

एक कंपनी को अपने मूल्यवान साझेदारों में से एक से भारी भरकम ऑर्डर मिला लेकिन दिक्कत यह थी कि उसे ऑर्डर एक सप्ताह के भीतर पूरा करना था। कंपनी के विपणन निदेशक ने एक आपात बैठक बुलाकर यह विचार विमर्श आरंभ किया कि कंपनी इस काम को कैसे पूरा कर सकती है। कुछ विभागों के प्रमुखों द्वारा अपनी बात कह लिए जाने के बाद सबका ध्यान उत्पादन विभाग के प्रमुख की ओर था। उन्होंने अत्यंत गूढ़ अंदाज में जवाब दिया कि समुद्र को उबालना संभव नहीं है।  कम ही लोगों को इसका अर्थ पता था और विपणन निदेशक ने उनसे अनुरोध किया कि वह साफ-साफ और स्पष्टï तरीके से अपनी बात कहें। उनका जवाब और अधिक भ्रामक था। उन्होंने कहा, 'महोदय मुझे बस के नीचे धकेलने का प्रयास न करें।' बहरहाल उनका इतना कहना था कि कुछ साथी समझ गए कि वह क्या कहना चाहते हैं। साधारण शब्दों में कहें तो उत्पादन प्रमुख का कहना था कि उनकी टीम से यह उम्मीद न की जाए कि वह एक सप्ताह में इतनी अधिक चीजें बनाकर, उनकी जांच परख करके उन्हें भेज भी देगी। वह कहना चाहते थे कि साथियों को उन्हें एक असंभव काम सौंपकर बाद में दोषारोपण करने का प्रयास नहीं करना चाहिए। 

विपणन निदेशक भी निरर्थक शब्दों के इस्तेमाल की होड़ में पीछे नहीं छूटना चाहते थे। उन्होंने कहा कि चलो हम प्याज के छिलके उतारने का काम करते हैं। उनकी कहावत आसान थी और हर किसी को इसका अर्थ मालूम था। वह कहना चाहते थे कि इस समस्या पर थोड़ा करीबी नजर डालते हैं। आखिरकार यह समस्या हल हुई जब काम के एक हिस्से को दूसरों को अनुबंध पर दिया गया।  उत्पादन और विपणन प्रमुख कुछ भी असामान्य नहीं कह रहे थे। कारोबारी जगत में ऐसे शब्दों और जुमलों का इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है। कार्यालयों के रोजमर्रा के कामकाज में इनका खूब इस्तेमाल हो रहा है। शायद कम ही लोगों को यह अंदाजा है कि इस तरह के शब्दाडंबर का ज्यादा इस्तेमाल कई बार लोगों को परेशान करता है और उनमें चिढ़ पैदा कर सकता है। 
 
उदाहरण के लिए हर कोई इन दिनों 'अपस्किलिंग' की बात कर रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि प्रशिक्षण शब्द अब एकदम नीरस हो चुका है और भारी भरकम वेतन वाले एमबीए की डिग्री धारी लोगों ने ये नए शब्द गढऩे शुरू किए हैं ताकि खुद को दूसरों से अलग दिखाया जा सके।  एक युवा प्रबंधन प्रशिक्षु ने जब कुछ बैठकों में शिरकत कर ली तो वह यह देखकर चकित था कि आखिर हर कोई 'कमरे में मौजूद हाथी' को संबोधित क्यों कर रहा है या मुद्दों को लेकर 'गहरे गोता' लगाने की आवश्यकता पर बल क्यों दे रहा है। जहां तक उस कर्मी को पता था, कंपनी ने किसी हाथी को नियुक्ति नहीं दे रखी थी और न ही कार्यालय में कोई पूल था। उसका प्रश्न उचित ही था कि लोग आसान शब्दों का इस्तेमाल क्यों नहीं कर सकते? उसे लग रहा था कि कमरे में मौजूद हर व्यक्ति दूसरे को अस्थिर करने की कोशिश में ऐसे कठिन कारोबारी जुमले उछाल रहा था। यही वजह है कि हर कार्यालयीन चर्चा में 'हेलीकॉप्टर व्यू' या 'स्ट्रैटेजिक स्टेयरकेस' जैसे शब्द आते हैं। इन सबका जन्म नए प्रबंधन फैशन उद्योग की बदौलत हुआ है। ऐसे कारोबारी जुमलों में सबसे खराब जुमला होने का पुरस्कार 'ओपनिंग द किमोनो (अपना किमोनो खोलो। किमोनो पारंपरिक जापानी पोशाक है)' को दिया जा सकता है। रिपब्लिकन प्रतिनिधि जैसन शाफेज ने गत वर्ष अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव पद की होड़ के दौरान इसका इस्तेमाल डॉनल्ड ट्रंप से कर रिटर्न का खुलासा करने को कहते हुए किया था। उन्होंने ट्रंप से कहा था, 'अपना किमोनो खोलकर सबकुछ हमें दिखाओ।' 
 
एक अन्य ऐसा ही कथन है, 'वन थ्रोट टु चोक' अर्थात किसी विफल परियोजना के लिए अंतत: एक व्यक्ति उत्तरदायी होता है। इसी तरह 'पंच द पपी' का अर्थ है कोई अत्यंत निंदनीय कृत्य करना जो कारोबार के लिए बेहतर हो। इस तरह की कारोबारी जुमलेबाजी का एक सटीक उदाहरण है माइक्रोसॉफ्ट के एक कर्मचारी द्वारा तैयार 1,100 शब्दों का मेमो। इस मेमो में ऐसे ऐसे शब्दों का इस्तेमाल है जो किसी भी पाठक के लिए यंत्रणा साबित हो सकते हैं। यह ऐसा मेमो है जिसे समझ पाना कतई आसान नहीं। 
 
आखिर में देखते हैं कि एक सीईओ ने हाल ही में आयोजित एक बैठक में एक बड़े पुनर्गठन कार्यक्रम को तार्किक ठहराते हुए क्या कहा। सीईओ ने कह कि वह यह 'डिसैम्बिग्युएट' (स्पष्टï करना) चाहते हैं कि कंपनी को 'जंप द शार्क'(कुछ कारोबारों का बेहतरीन दौर बीत चुका होता है और उन्हें प्रासंगिक बने रहने के लिए जद्दोजहद करनी होती है) करना होगा। वह इस बात को लेकर निश्चिंत थे कि उनके साथी इस काम को लेकर 'डक्स इन द रो' (तैयार और संगठित) थे। यह जानकारी नहीं है कि इस बैठक में शामिल लोग सुन भी रहे थे या वे अपनी आंखे खोले सो रहे थे। 
Keyword: corporate, company, words,,
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