बिजनेस स्टैंडर्ड - अंतिम घर तक बिजली पहुंचाने का जतन
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अंतिम घर तक बिजली पहुंचाने का जतन

विनायक चटर्जी /  06 07, 2018

देश के सभी गांवों तक बिजली की पहुंच एक उपलब्धि है। परंतु सभी घरों को जोडऩा और हर उपभोक्ता तक बिजली पहुंचाना अधिक बड़ी चुनौती है। विस्तार से बता रहे हैं विनायक चटर्जी 

 
अप्रैल 2018 के अंत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की कि देश के सभी 6.40 लाख गांवों का विद्युतीकरण पूरा किया जा चुका है। यह सही मायनों में न केवल मौजूदा सरकार के लिए बल्कि आजादी के बाद के भारतीय इतिहास की एक बड़ी उपलब्धि है। सन 1951 में केवल 3,000 गांवों में बिजली थी और 70 साल पहले देखा गया ख्वाब अब पूरा हो चुका है।  सन 1960 के आरंभ तक ग्रामीण विद्युतीकरण का काम पांच फीसदी से भी नीचे था लेकिन हरित क्रांति के बाद इसमें नाटकीय तेजी आई। सन 1990 में आर्थिक सुधारों के ऐन पहले तक करीब 80 फीसदी गांवों में बिजली पहुंच चुकी थी। सुधारों के बाद के वर्षों में ग्रामीण विद्युतीकरण को गति देने का काम सन 2005 में राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना (आरजीजीवीवाई) कार्यक्रम के जरिये शुरू हुआ। परंतु अब तक हमने तीन चरण वाले सफर का केवल पहला चरण पूरा किया है। तमाम फंडिंग और राजनैतिक तथा नौकरशाही की खपी ऊर्जा, तमाम पिछली सरकारों के प्रयासों के बावजूद यह कहना होगा कि यह चरण तीनों में सबसे आसान था। यहां से आगे की चुनौती और कठिन है। 
 
अब तक आखिर कितना काम हुआ है? साधारण शब्दों में कहें तो गांव के प्रवेश द्वार तक तार खींच दिया गया है और ट्रांसफॉर्मर तथा बिजली के खंभों जैसी बुनियादी सुविधा मुहैया करा दी गई है। अगर किसी गांव के 10 फीसदी घरों में भी बिजली पहुंची है और स्कूल तथा पंचायत कार्यालय में बिजली है तो गांव को विद्युतीकृत माना जाता है।  सबसे बड़ी चुनौती अब अगले दो चरणों में है। यानी गांव के हर घर को ग्रिड से जोडऩा और अंतत: नियमित उपभोक्ता सेवा की व्यवस्था, बिलिंग और रखरखाव की व्यवस्था बनाना। इससे यह सुनिश्चित हो सकेगा कि ग्रामीण परिवार नियमित रूप से बिजली पा सकें, उन्हें यह बिजली उचित मूल्य पर मिले और आपूर्ति की समस्याओं को तत्काल दूर किया जा सके। 
 
दूसरे चरण यानी घरों को ग्रिड से जोडऩे के काम को एक सामान्य हिसाब से समझा जा सकता है। आम घरों के विद्युतीकरण का लेखाजोखा रखने वाली वेबसाइट सौभाग्यडॉटजीओवीडॅाटइन के मुताबिक करीब कुल घरों के 14 फीसदी यानी करीब 3.15 करोड़ घरों में अभी भी बिजली पहुंचनी बाकी है। 14 फीसदी का आंकड़ा प्रथमदृष्टïया छोटा प्रतीत हो सकता है लेकिन हमें इस आकार को छोटा नहीं समझना चाहिए। तमाम बुनियादी क्षेत्रों में अंतिम आदमी तक संपर्क की समस्या प्राय: हल करने की दृष्टिï से सबसे बड़ी समस्या होती है। 
 
राष्ट्रीय राजमार्ग बनाना एक बात है जबकि ग्रामीणों को अपनी उपज शहर में ले जाना आसान करने के लिए गांवों को उस राजमार्ग से जोडऩे वाले ग्रामीण संपर्क मार्ग बनाना एकदम अलग मामला है। इसी तरह आधुनिक और तकनीक संपन्न शहरी मेट्रो व्यवस्था बनाना आसान काम है जबकि आसपास के इलाकों को मेट्रो स्टेशन से जोडऩे वाली नियमित और प्रभावी फीडर बस सेवा की शुरुआत एकदम अलग मामला है। प्रभावी फीडर बस सेवा होने पर ही महिलाएं बिना किसी भय या आशंका के देर रात आसानी से स्टेशन से घर तक का सफर कर पाएंगी। निश्चित तौर पर सन 1980 के दशक से ही ग्रामीण घरों का विद्युतीकरण गांवों के विद्युतीकरण से 35-40 फीसदी की दर से पीछे है। वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक 55 फीसदी ग्रामीण घरों का विद्युतीकरण हुआ था। 
 
अंतिम सिरे तक संचार की यह समस्या केवल पैसे के दम पर हल नहीं की जा सकती है। ऐसा केवल केंद्रीकृत संस्थान का निर्माण करके भी नहीं किया जा सकता है जो ऐसा बुनियादी ढांचा विकसित कर सके जो जैसा कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने किया। ग्रामीण सड़क हों या शहरी बस ट्रांजिट, यह काम स्थानीय सरकारों का है। गांव के हर घर को बिजली की ग्रिड से जोडऩे के काम में केंद्र समर्थित योजनाओं, राज्य की इकाइयों, प्रासंगिक स्थाानीय बिजली वितरण कंपनियों, उनके अनुबंधकों और ग्रामीण प्रशासन के बीच गहन तालमेल की आवश्यकता होगी। प्रत्येक राज्य, प्रत्येक जिले और गांव में इसके क्रियान्वयन की परिस्थितियां अलग होती हैं। 
 
यहां तक कि एकदम अंतिम सिरे तक संपर्क के बाद भी एक चुनौती शेष रह जाती है। वह चुनौती है नेटवर्क को नियमित बनाए रखना और पेशेवर सेवा मुहैया कराना। अगर आम परिवार ग्रिड से जुड़े हों लेकिन वहां पर्याप्त बिजली नहीं पहुंच पाती हो तो या ट्रांसफॉर्मर की मरम्मत न होने के कारण कई- कई दिनों तक बिजली गुल रहती हो तो ग्रामीण विद्युतीकरण की बात करना बेमानी है।  इसके अलावा अगर बिजली वितरण कंपनियां प्रति यूनिट बिजली पर बढ़ते घाटे के कारण लोड शेडिंग का सहारा लेने पर मजबूर हों या मीटरिंग और बिजली की बिलिंग की कोई भ्रष्टïाचारमुक्त व्यवस्था कायम नहीं हो सकी हो तो भी ग्रामीण विद्युतीकरण का कोई अर्थ नहीं है। अगर बिजली की बढ़ती लागत की भरपाई के लिए शुल्क दर में इजाफा किया जाए लेकिन बिजली की आपूर्ति और उपभोक्ता सेवा की स्थिति सुधारने पर ध्यान नहीं दिया जाए तो भी यह कवायद निरर्थक ही मानी जाएगी। 
 
परंतु ऐसी चुनौतियों से निपटने के ढेर सारे लाभ भी हैं। अगर एक बार ग्रिड से जोड़ दिया जाए और बिजली की नियमित आपूर्ति तथा शिकायतों का तत्काल निवारण संभव हो तो आम परिवारों को भी बिजली के दाम चुकाने के आर्थिक लाभ समझ में आने लगेंगे। आम परिवारों को अगर बिजली के दाम चुकाने के सहज और शीघ्र तरीके मुहैया कराए जाएं तो लोगों के लिए और भी बेहतर होगा। मिसाल के तौर पर इलेक्ट्रिक कार्ड की मदद से बिजली के मीटर को प्रीपेड तरीके से रीचार्ज किया जा सकेगा। जिस दिन ऐसा होगा उसी दिन हम सही मायनों में सबके लिए बिजली सुनिश्चित करने का दम भर सकेंगे। 
Keyword: power, electric, rural,,
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