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डिजिटल संचार नीति में कुछ बातें जरूरी

संजीव कक्कड़ /  06 05, 2018

डिजिटल संचार नीति में एक मजबूत और डिजाइन आधारित घरेलू नीति से जुड़ी योजना का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए जो तकनीकी आधार पर समकालीन और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी हो। बता रहे हैं संजीव कक्कड़

 
राष्ट्रीय डिजिटल संचार नीति के मसौदे ने देश में संचार क्षमताओं को बढ़ाने का खाका तैयार कर दिया है। विभिन्न नई तकनीकों की मदद से इस काम को अंजाम दिया जा सकता है। मसौदा नीति में प्रतिस्पर्धी सुधारों के महत्त्व को चिह्निïत किया गया है और नई तकनीक और सेवाओं के प्रभावी इस्तेमाल की मदद से आर्थिक वृद्घि का लक्ष्य हासिल करने पर जोर दिया गया है।  इसमें यह सही कहा गया है कि उभरती डिजिटल तकनीक जिनमें  5जी, आईओटी आधारित ऐप्लीकेशंस, क्लाउड कंप्यूटिंग, बिग डाटा, कृत्रिम बुद्घिमता आदि शामिल हैं, वे भविष्य के उत्पाद और सेवाएं तैयार करेंगी। इनकी मदद से हमारे जीवन जीने और कारोबार के तौर तरीकों में तब्दीली आ सकती है। मसौदा नीति में इस क्षेत्र की तमाम चिंताओं का भी ध्यान रखते हुए इसे डिजिटल आधारित बनाने और बड़े तकनीकी लाभ लेने के योग्य बनाने की बात कही गई है।
 
दूरसंचार क्षेत्र के सामने मौजूद समस्याओं को मोटे तौर पर दो हिस्सों में बांटा जा सकता है। पहली श्रेणी है सेवा आपूर्ति और दूसरी तकनीक। हालिया अतीत के दिनों में हमें सेवा क्षेत्र में नाममात्र की वृद्घि होती नजर आई है लेकिन नई तकनीक के आगमन के साथ इस क्षेत्र में भी काफी उथलपुथल देखने को मिल रही है। ऐसे तकनीकी सम्मिलन के लिए सही नीतिगत ढांचा ही सेवाओं और ऐप्लीकेशंस के विस्तार और उनको अपनाए जाने की सुविधा प्रदान करेगा। मसौदा नीति इस दिशा में कुछ अहम पहलुओं का भी समाधान करती है।
 
डिजिटल भारत
 
अन्य अहम पहलू यह है कि देश आंतरिक तकनीकी मजबूती को किस प्रकार बढ़ा रहा है ताकि वह वैश्विक तकनीकी जगत में प्रासंगिक बना रह सके? तकनीक के तेज विस्तार के बीच नीतिगत स्तर पर यह आवश्यक है कि वह प्रॉपेल इंडिया मिशन के अधीन एक नीति का स्पष्टï उल्लेख करे ताकि उभरते क्षेत्रों में नई पीढ़ी के उत्पादों एवं हलों को विकसित किया जा सके। यह सारा काम भारत की विशिष्टï जरूरतों को ध्यान में रखते हुए किया जाए। इस अहम क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करना अत्यंत आवश्यक है। 
 
जब तक हम इन क्षेत्रों में राष्ट्रीय स्तर पर क्षमता का विकास नहीं करेंगे और क्रियान्वयन के लिए एक बेहतरीन योजना नहीं बनाएंगे तब तक हम नई पीढ़ी की सेवाओं की शुरुआत के लिए आयात पर ही निर्भर बने रहेंगे। भारत जैसे देश में जहां जननांकीय प्रोफाइल में काफी अंतर देखने को मिलता है वहां विभिन्न संकेतक मसलन साक्षरता, आर्थिक स्थिति और शहरीकरण आदि के क्षेत्र में कई ऐसी चुनौतियां हैं जिन्हें इन नई तकनीक के इस्तेमाल से हल किया जाना है। केवल मेड इन इंडिया और मेड फॉर इंडिया जैसी योजनाओं के अनुकूल उत्पाद ही इस महती कार्य को पूरा कर सकते हैं। इनमें सबसे बड़ा काम है ग्रामीण इलाकों में रह रही 70 फीसदी से अधिक आबादी की आजीविका की स्थिति में सुधार करना।
 
पहले की दूरसंचार नीतियों में सन 2020 तक दूरसंचार उत्पादों और उपकरणों में स्वदेशी हिस्सेदारी बढ़ाने का लक्ष्य लेकर काम किया गया। परंतु हम अभी भी उन लक्ष्यों को हासिल करने से काफी दूर हैं। निश्चित रूप से सरकार ने नई मसौदा नीति तैयार करते हुए इन वजहों का आकलन किया होगा कि आखिर क्यों ये लक्ष्य पूरे नहीं हो सके। बहरहाल, मसौदा दस्तावेज में इच्छित खाके और कदमों का जिक्र नहीं किया गया है जिनके आधार पर घरेलू क्षमता निर्माण किया जाएगा और घरेलू डिजाइन आधारित विनिर्माण को गति प्रदान की जाएगी। 
 
मसौदा नीति में 40 लाख अतिरिक्त रोजगार की बात कही गई है जो डिजिटल संचार क्षेत्र में तैयार किए जाएंगे। हालांकि इन रोजगारों का बड़ा हिस्सा सेवा क्षेत्र से आने की उम्मीद है। मौजूदा सेवा मॉडल में तकनीकी विकास का अधिकांश काम सेवा प्रदाताओं से आउटसोर्स कराया जाता है इसलिए कुशल इंजीनियरों के लिए रोजगार निर्माण के अवसर सीमित रहते हैं। यह रुझान केवल तब बदला जा सकता है जबकि हमारे पास मजबूत घरेलू औद्योगिक क्षेत्र हो और हमारा ध्यान उच्च मूल्यवर्धन वाली इंजीनियरिंग पर केंद्रित हो।
 
मसौदा नीति में जहां डिजाइन आधारित दूरसंचार विनिर्माण की बात कही गई है, वहीं सरकार को भी पर्याप्त फंडिंग के साथ शोध एवं विकास तथा उत्पाद विकास को मदद करनी होगी। ऐसा करने से हम हर क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर श्रेष्ठïता हासिल कर सकेंगे। इससे सुरक्षित राष्ट्रीय दूरसंचार नेटवर्क हासिल करने और आत्म निर्भर होने का काम पूरा हो सकेगा। दूरगामी लाभ के लिए इस क्षेत्र को कुछ समय तक संरक्षणवादी उपायों की मदद की आवश्यकता होगी ताकि हम वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी क्षमताएं विकसित कर सकें। चीन तथा अन्य एशियाई देशों ने आक्रामक नीतिगत सहयोग की मदद से अपने घरेलू उद्योग को विकसित किया। सरकार को एक साहसी योजना प्रस्तुत करनी चाहिए जिसमें उद्योग आधारित नवाचार के साथ नई तकनीक तलाशने को समर्थन की बात शामिल हो। मसौदा दस्तावेज में यह बात नदारद है। 
 
दूरसंचार के मूलभूत क्षेत्र में आत्मनिर्भरता सुरक्षा की दृष्टिï से भी जरूरी है। चीन के बेतार उपकरण आपूर्तिकर्ताओं से जुड़ी सुरक्षा चिंताएं अब अमेरिका के अलावा कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया तक फैल गई हैं। अमेरिका ने प्रतिबंध भी लगा दिए हैं और चीन की कंपनियों के खिलाफ कदम भी उठाए हैं क्योंकि आशंका है कि चीनी कंपनियों के उपकरण जासूसी कर सकते हैं। ब्रिटेन सरकार के साइबर सुरक्षा केंद्र ने भी ऐसे उपकरणों के सुरक्षा जोखिम पर चिंता प्रकट की है।  ऐसे उत्पादों के आयात पर निर्भरता और बढ़ती सुरक्षा चिंताएं आपूर्ति शृंखला को बाधित कर सकती और दूरसंचार नेटवर्क को नुकसान पहुंचा सकती हैं। जबकि ये डिजिटल अर्थव्यवस्था का मेरुदंड हैं। अगर दूरसंचार नेटवर्क के साथ समझौता हो गया तो देश की अर्थव्यवस्था को अकल्पनीय नुकसान पहुंच सकता है। 
 
ऐसे में यह अहम है कि अंतिम तौर पर तैयार नीति में व्यवस्थित ढंग से एक मजबूत, डिजाइन आधारित घरेलू नीति की योजना हो जो व्यापक पैमाने पर तकनीक की मदद से स्थानीय जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ प्रतिस्पर्धी और वैश्विक स्तर पर प्रासंगिक भी हो। इससे देश में नई श्रेष्ठï कंपनियों का विकास होगा जो वैश्विक कंपनियों का विकल्प बन सकेंगी। राष्ट्रीय स्तर पर एक जीवंत संचार उद्योग के बनने से ऐसा पर्यावास बनेगा जो हजारों रोजगार पैदा करे, उद्यमिता को बढ़ावा दे और जीवन स्तर में सुधार करे। 
Keyword: digital india, communication,,
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