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ब्रोकर पर रखें नजर ताकि महफूज रहें आपकी रकम और शेयर

संजय कुमार सिंह /  06 03, 2018

ओडिशा के विप्लव सेन (बदला हुआ नाम) उन निवेशकों में शामिल हैं, जिन्हें गुडग़ांव की एक शेयर ब्रोकरेज कंपनी एफ 6 के कारण घाटा झेलना पड़ा है। यह ब्रोकरेज कंपनी अपने ग्राहकों को भुगतान करने में नाकाम रही है। सेन को कंपनी पर पहली बार शक फरवरी की शुरुआत में उस वक्त हुआ, जब उनके ट्रेडिंग टर्मिनल ने एकाएक काम करना बंद कर दिया। परेशान सेन ने जब ब्रोकरेज फर्म को फोन किया तो उन्हें बताया गया कि समस्या किसी तकनीकी कारण से आ रही है और जल्द ही उसका समाधान कर दिया जाएगा।

 
सेन इंतजार करते रहे मगर टर्मिनल ठीक नहीं हुआ। बार-बार फोन करने पर भी उनकी परेशानी दूर नहीं हुई। हद तो तब हो गई, जब ब्रोकर ने फोन का जवाब देना भी बंद कर दिया। बाद में बंबई स्टॉक एक्सचेंज की एक घोषणा सेन पर बिजली की तरह गिरी। एक्सचेंज ने एफ 6 को डिफॉल्टर यानी भुगतान करने से मुकरने वाला करार दे दिया। हारकर सेन ने ब्रोकरेज कंपनी से चोट खाए दूसरे निवेशकों का पता लगाना शुरू किया। इस समय वह 90 ग्राहकों के संपर्क में हैं, जिन्हें 10 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। कंपनी के सभी ग्राहकों को कुल 100 करोड़ से ऊपर की चपत लगी है। माना जा रहा है कि बाजार में लगातार नुकसान झेलने के बाद कंपनी के प्रवर्तकों ने ग्राहकों की रकम और शेयरों का इस्तेमाल शुरू कर दिया था। अब प्रवर्तक फरार हैं।
 
ब्रोकर को शेयर सौंपने में जोखिम
 
ऐसी घटनाएं तब घटती हैं, जब ग्राहक अपने शेयर ब्रोकर के पूल खाते में डाल देते हैं। सेबी के पास पंजीकृत स्वतंत्र इक्विटी रिसर्च कंपनी स्टॉलवार्ट एडवाइजर्स के संस्थापक जतिन खेमानी कहते हैं, 'ग्राहक इसलिए ऐसा करते हैं क्योंकि ब्रोकर पूल खाते में शेयर रखने के बदले उन्हें 7 से 10 फीसदी ब्याज देते हैं।' पूख खाते में अधिक से अधिक शेयर रखकर ब्रोकर वायदा एवं विकल्प (एफऐंडओ) में बड़ी पोजीशन ले सकते हैं। खेमानी ने कहा, 'एफऐंडओ में उतार-चढ़ाव बहुत होता है। निवेश का एक फैसला गलत होने पर ब्रोकर लुट सकता है। अगर उसके पास आपके शेयर गिरवी हैं तो आपको चपत लगनी तय है।' कभी-कभी ग्राहक अधिक मार्जिन पाने के लिए भी ब्रोकरों के पूल खाते में शेयर रखते हैं, जो महंगा साबित हो सकता है। 
 
ट्रेडिंग खाते में कितनी रकम
 
आपके ट्रेडिंग खाते में रखी रकम भी ब्रोकर की पहुंच में होती है। नियमित ट्रेडिंग करने वाले को बड़ी रकम रखनी ही पड़ती है, लेकिन उन्हें अपने खाते पर लगातार नजर रखनी चाहिए। बाई-ऐंड-होल्ड निवेशकों (जिन्हें रोज रकम की जरूरत नहीं पड़ती है) को अतिरिक्त रकम जल्द से जल्द अपने बैंक खाते में पहुंचा देनी चाहिए। कई ब्रोकर प्रॉपराइटरी ट्रेडिंग करते हैं यानी वे अपनी कंपनी की रकम का इस्तेमाल करते हैं। इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस में वित्त के लेक्चरर के वैद्यनाथन कहते हैं, 'आदर्श स्थिति तो यह है कि ग्राहकों की रकम और कंपनी के बीच में दीवार बनी रहे। हालांकि असल में ऐसा हो नहीं पाता है।' प्रॉपराइटरी ट्रेडिंग में नुकसान होते ही ब्रोकर अपने ग्राहकों की रकम या प्रतिभूतियां इस्तेमाल करने के बारे में सोचने लगता है। इसलिए रकम और प्रतिभूति दोनों ब्रोकर की पहुंच से दूर होनी चाहिए।
 
ब्रोकर न करें आपके लिए कारोबार
 
अगर आपके ब्रोकर का रिलेशनशिप मैनेजर आपसे कहे कि ब्रोकर को अपने बदले कारोबार करने दें और आपको ऊंचा प्रतिफल मिलेगा तो तुरंत इनकार कर दें। ब्रोकर का काम आप के प्रतिनिधि के तौर पर खरीदारी और बिकवाली का आर्डर देना है। फिनसेक लॉ एडवाइजर्स के संस्थापक संदीप पारेख कहते हैं, 'ब्रोकर को कारोबार करने का अधिकार (पावर ऑफ अटॉर्नी) नहीं दें। अगर फॉर्म भरते वक्त अधिकार दे भी दिया है तो उसे किसी भी समय वापस ले सकते हैं।' टे्रड स्मार्ट ऑनलाइन के कार्यकारी निदेशक विकास सिंघानिया के अनुसार अगर आपको निवेश के लिए सलाह की जरूरत है तो म्युचुअल फंड का सहारा लें या सेबी के पास पंजीकृत निवेश सलाहकार को इसके लिए कुछ शुल्क दें। 
 
ब्रोकर को दें सीमित अधिकार
 
जब आप शेयर बेचते हैं तो शेयर आपके डीमैट खाते से निकलकर एक्सचेंज जाते हैं। आप कागज की एक पर्ची भरकर ब्रोकर को ऐसा करने का अधिकार दे सकते हैं। नियमित कारोबार करने वालों के लिए यह बेकार की कवायद हो जाती है। इसीलिए सहूलियत के लिए वह पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिये ब्रोकर को ही यह जिम्मेदारी दे देते हैं। दिल्ली की डिस्काउंट ब्रोकिंग कंपनी के संस्थापक श्रेय जैन कहते हैं, 'ब्रोकर को सीमित अधिकार ही देना चाहिए ताकि वे शेयर डीमैट खाते से एक्सचेंज को ही दे सकें, किसी और को नहीं।'
 
अपने निवेश पर रखें नजर
 
जब भी आप शेयर खरीदते हैं या बेचते हैं तब आपको स्टॉक एक्सचेंज और डिपॉजिटरी से मोबाइल संदेश आता है। दिन के अंत में ब्रोकर आपको कॉन्ट्रैक्ट नोट भेजता है। इनका गंभीरता से अध्ययन करें। अगर आपकी अनुमति के बिना लेनदेन हुआ है तो ब्रोकर से तत्काल संपर्क करें। सिंघानिया कहते हैं, 'अगर आप सीधे कारोबार करते हैं तो कागजात और एसएमएस पर नजर डालने के लिए समय निकालें।'
 
समय रहते करें शिकायत 
 
निवेशकों की शिकायतें दूर करने की व्यवस्था स्टॉक एक्सचेंजों और भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) दोनों जगह उपलब्ध हैं। एक्सचेंज ब्रोकर पर जुर्माना लगा सकता है। अगर बड़ी रकम की धांधली हुई है तो यह ब्रोकर के खाते की जांच के लिए एक दल भेज सकता है और मामला गंभीर होने पर ब्रोकर की सदस्यता रद्द कर सकता है। एक्सचेंज की कार्रवाई से संतुष्ट नहीं होने पर सेबी के पास ऑनलाइन माध्यम से या इसके क्षेत्रीय कार्यालय में शिकायत दर्ज करा सकते हैं। 
 
सावधानी से चुनें ब्रोकर
 
ग्राहकों को भुगतान नहीं करने वाले ब्रोकरों में अधिकतर छोटी या मझोली कंपनियां ही हैं। लिहाजा अच्छी साख वाले और पहचान वाले ब्रोकर ही चुनें। अगर आप छोटी ब्रोकरेज कंपनी के साथ जाना चाहते हैं तो उसके बारे में पहले लोगों से जानकारी जरूर जुटा लें। यह भी देखें कि ब्रोकर कितने सालों से कारोबार कर रहा है। अगर वह कई कारोबारी उतार-चढ़ावों से गुजर चुका है तो यह उसकी प्रणाली मजबूत होने का संकेत देता है। एनएसई एक सूची जारी करता है, जिसमें किसी ब्रोकर के ग्राहकों और उसके खिलाफ शिकायतों की संख्या होती है। अगर शिकायतों की संख्या अधिक है तो ऐसे ब्रोकर के साथ जाने से परहेज करें। अंत में ब्रोकर की छवि जानने के लिए ऑनलाइन माध्यम से जांच जरूर करें। 
Keyword: share, market, sensex, बीएसई, कंपनी, शेयर,,
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