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नोटबंदी की मार लघु वित्त बैंकों पर

नम्रता आचार्य / कोलकाता 06 03, 2018

वित्तीय समावेशन का दायरा बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू किए गए ज्यादातर लघु वित्तीय बैंकों (एसएफबी) को पिछले वित्त वर्ष में घाटा या बहुत कम लाभ हुआ। इसकी बड़ी वजह गैर-निष्पादित संपत्ति (एनपीए) वाले खातों में बढ़ोतरी है। यह स्थिति नोटबंदी और ऋण माफी से पैदा हुई है।  पिछले वित्त वर्ष में लघु वित्त उद्योग के एनपीए में 5-6 प्रतिशत का इजाफा हुआ जबकि नोटबंदी से पहले इसमें महज एक प्रतिशत का ही इजाफा हुआ था। लगभग सभी एसएफबी, बेरिंग, एयू और कैपिटल स्मॉल फाइनैंस बैंक जो कि शहरी केंद्रित बैंक हैं, का 80 प्रतिशत से अधिक ऋण पोर्टफोलियो लघु वित्तीय क्षेत्र में है।

 इसके चलते करीब आठ एसएफबी के अधिकांश धन लोन बुक को बढ़ाने की जगह एनपीए के प्रावधान करने में चला गया। एसएफबी के सूक्ष्म वित्त पोर्टफोलियो में पिछले वर्ष मामूली तीन प्रतिशत की वृद्घि देखी गई। सूचीबद्घ एसएफबी में से एक उज्जीवन ने वित्त वर्ष 2018 में 7.3 करोड़ रुपये का शुद्घ लाभ दर्ज किया जबकि प्रावधान 3 अरब रुपये के करीब था। एक दूसरी सूचीबद्घ एसएफबी इक्विटास को पिछले वित्त वर्ष में 31.3 करोड़ रुपये का शुद्घ लाभ हुआ जबकि इसका प्रावधान बढ़कर 1.7 अरब रुपये हो गया।  फिनकेयर के मुख्य कार्याधिकारी राजीव यादव ने कहा, 'चूंकि हमने अपने समूचे एनपीए का निस्तारण कर दिया इसलिए पिछले वित्त वर्ष में हमें नुकसान झेलना पड़ा। अगले साल से हमारा स्पष्टï लक्ष्य खुदरा क्षेत्र में उत्पादों को बढ़ाना, डिजिटल रणनीति तैयार करना, घर तक बैंकिंग सुविधा मुहैया कराना और अलग-अलग जमा दरों पर रकम जुटाना होगा।' 

 वाराणसी स्थित उत्कर्ष स्मॉल फाइनैंस बैंक को पिछले वर्ष लगभग 63 करोड़ रुपये की हानि हुई और करीब 1.43 अरब रुपये के ऋण को बट्ïटे खाते में डालना पड़ा। फिलहाल बैंक की खाताबही का लगभग 88 प्रतिशत सूक्ष्म वित्त क्षेत्र में केंद्रित है। उत्कर्ष के प्रवक्ता ने कहा कि बैंक सूक्ष्म ऋण पर ध्यान केंद्रित करते हुए अगले साल बैंक खुदरा क्षेत्र में नए उत्पादों को लाने पर जोर देगा और बैंक बड़ा कर्ज मुहैया कराएगा।  उत्कर्ष के उप मुख्य वित्तीय अधिकारी अश्विनी कुमार ने कहा, 'हालांकि, वित्त वर्ष के अंत में बैंक ने अपने सकल एनपीए को 1.85 प्रतिशत और शुद्घ एनपीए को 1.09 प्रतिशत पर रोका है। जबकि साल भर का परिचालन लाभ 75.6 करोड़ रुपये रहा।' 31 मार्च 2018 तक 10 एसएफबी का सूक्ष्म ऋण पोर्टफोलियो (बकाया ऋण) करीब 300 अरब रुपये था जो कि देश की समूची सूक्ष्म वित्त पोर्टफोलियो का 22 प्रतिशत है।

 एमएफआईएन के पूर्व मुख्य कार्याधिकारी और बैंकिंग क्षेत्र के विशेषज्ञ आलोक प्रसाद ने कहा, 'एसएफबी के लिए पिछले वित्त वर्ष महत्त्वपूर्ण रूप से संक्रमण काल था। तीन मुख्य चुनौतियां बैंक के परिचालन प्रारूप में बाधा बन रही थी जिसमें सभी नियामकीय मंजूरियां लेना, टीम, तंत्र, प्रकियाएं और उत्पाद तैयार करना तथा नोटबंदी के बुरे प्रभाव का प्रबंधन करना शामिल है।' 

Keyword: demonetisation, note, bank, NPA, वित्तीय समावेशन, एसएफबी, एनपीए,
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