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बिल्डर ऋण हो सकते हैं महंगे

अद्वैत राव पालेपू / मुंबई 05 27, 2018

दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) में प्रस्तावित कानूनी संशोधन का घर खरीदारों पर सकारात्मक असर दिखेगा। इस संशोधन के तहत अब होम बायर्स यानी घर खरीदारों को वित्तीय कर्जदाता का दर्जा हासिल होगा। हालांकि डेवलपर-फाइनैंसर मॉडल और उनके बीच संबंध पर कुछ दबाव दिखेगा। 

विश्लेषकों का कहना है कि बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों को अपनी सुरक्षा और अनुषांगिक नीतियों पर पुनर्विचार करने की जरूरत होगी, जबकि डेवलपरों पर भी उनके निर्माण की गुणवत्ता के संदर्भ में नजर रखे जाने की जरूरत होगी। इस बदलाव के संदर्भ में एक अध्यादेश को बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा मंजूरी प्रदान की गई। इसे अमल में लाए जाने के लिए अब राष्टï्रपति की मंजूरी की जरूरत है। 

आईबीसी में यह प्रस्तावित संशोधन घर खरीदारों को बैंकों और अन्य वित्तीय ऋणदाताओं के समान स्तर पर लाएगा। ट्रांस-कंटिनेंटल कैपिटल एडवाइजर्स में प्रबंध निदेशक आशीष शाह का कहना है कि यह संशोधन किसी डेवलपर के दिवालिया होने की स्थिति में घर खरीदारों को कुछ हद तक सुरक्षा मुहैया कराएगा और उन्हें सुरक्षित ऋणदाताओं की श्रेणी में लाएगा तथा बैंकों के साथ रिकवरी में साझीदार बनने में सक्षम बनाएगा।' इसके अलावा रियल एस्टेट बाजार में उपभोक्ताओं की आवाज और अधिकार मजबूत होगी। 

सन कैपिटल एडवाइजरी सर्विसेज के संयुक्त प्रबंध निदेशक अजय जैन कहते हैं, 'यह संशोधन उन घर खरीदारों के लिए व्यापक रूप से सेफगार्ड के तौर पर आया है जो अब तक डेवलपर की मनमानी का शिकार होते रहे हैं। आमतौर पर ग्राहकों को उस वक्त परेशानी का सामना करना पड़ता है जब ऋणदाता और डेवलपर बकाया ऋण का निपटान करते हैं।'

उन्होंने कहा, 'अब घर खरीदार उन डेवलपर्स के खिलाफ जरूरी कानूनी कदम उठा सकते हैं जो या तो फ्लैट पर कब्जा देने में विलंब करते हैं या इस पर कब्जा तो समय पर देते हैं लेकिन गुणात्मक पहलुओं के संदर्भ में मनमाने ढंग से बदलाव कर देते हैं।' हालांकि वित्त पोषण के संदर्भ में आवासीय रियल एस्टेट डेवलपरों को दबाव का सामना करना होगा।

मझोले आकार के एक निजी बैंक में जोखिम प्रबंधन के प्रमुख ने नाम नहीं छापे जाने के अनुरोध के साथ बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, 'इसका पहला नकारात्मक परिणाम धन की उपलब्धता से जुड़ा होगा। पूंजी की समस्या कुछ समय के लिए एक बड़ी चुनौती बन जाएगी,  जबकि अन्य प्रभाव ब्याज दरों में वृद्घि के तौर पर दिखेगा। अच्छी गुणवत्ता वाले डेवलपर ही ऋणदाताओं के लिए मुख्य ग्राहक होंगे। अन्य डेवलपरों के लिए ऋण तक आसानी से पहुंच बनाना एक मुश्किल काम हो जाएगा।'  उन्होंने कहा, 'ऋणदाताओं को अनुषांगिक और प्रतिभूतियों के संदर्भ में अपनी नीति में बदलाव लाने की भी जरूरत होगी। इससे पहले एक विशेष शुल्क लिया जाता था जिसे अब साझा किए जाने की जरूरत हो सकती है।' 

Keyword: आईबीसी, डेवलपर, ऋणदाता,
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