बिजनेस स्टैंडर्ड - वॉलमार्ट के सामने है अस्तित्व का प्रश्न
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Monday, July 23, 2018 06:45 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

वॉलमार्ट के सामने है अस्तित्व का प्रश्न

इंद्रजित गुप्ता /  May 23, 2018

एक बड़ा बहुराष्ट्रीय निगम होने के बावजूद वॉलमार्ट को अपनी जड़ों से बाहर विस्तार करने में संघर्ष करना पड़ा है। इस संबंध में विस्तार से जानकारी दे रहे हैं इंद्रजित गुप्ता

 
कर्नाटक चुनाव से जुड़ी नाटकीय घटनाओं के चलते वॉलमार्ट द्वारा 16 अरब डॉलर खर्च करके फ्लिपकार्ट का अधिग्रहण किए जाने की खबरें उस कदर चर्चा में नहीं रहीं जितना उन्हें होना चाहिए था। परंतु इसने विश्लेषकों और स्तंभकारों को इस सौदे के औचित्य पर सवाल उठाने से नहीं रोका।  यह सौदा वॉलमार्ट द्वारा इससे पहले किए गए सबसे बड़े अधिग्रहण से भी पांच गुना बड़ा था। क्या वॉलमार्ट भारतीय ई-कॉमर्स बाजार में प्रवेश के लिए कुछ ज्यादा बड़ी कीमत चुका रही है? खासतौर पर क्या इसलिए क्योंकि फ्लिपकार्ट के कारोबारी मॉडल के स्थायित्व को लेकर बीते वर्षों के दौरान लगातार बहस चलती रही है। यहां सवाल यह है कि क्या इस मामले में वॉलमार्ट ने क्षमता से बड़ा सौदा कर लिया है। 
 
अब जरा पीछे लौटते हैं। वैश्विक बहुराष्ट्रीय कंपनियों के कामकाज का अपना तरीका होता है। खुदरा कारोबार तो खासतौर पर स्थानीय कारोबार है। दैनिक उपभोग की वस्तुओं के बाजार के उलट खुदरा कारोबारियों मसलन वॉलमार्ट, कार्फू और टेस्को ने दुनिया भर में अपना विस्तार करने में बहुत धीमी गति का परिचय दिया है। खासतौर पर अंतरराष्ट्रीय कारोबार विकसित करने के मामले में वॉलमार्ट की गति बहुत धीमी रही है। उसे इस प्रयास में कई झटके लगे हैं जो बाकायदा दर्ज भी हैं। उसे कई वैश्विक बाजारों से बाहर होना पड़ा। इनमें कोरिया, जर्मनी, ब्राजील और अब ब्रिटेन के नाम शामिल हैं। या तो स्थानीय खुदरा कारोबारियों ने उसे बाहर कर दिया या फिर वह स्थानीय उपभोक्ताओं की आदत समझने में नाकाम रही। चीन में उसने अपनी विफलताओं से सबक सीखने के कई प्रयास किए। परंतु लगता नहीं कि उसने सही सबक सीखेे। 
 
कई चुनौतियां गहरे तक जड़ जमाने वाली संस्कृति से संबंधित हैं। एक बड़ा बहुराष्ट्रीय निगम होने के बावजूद वॉलमार्ट को अपने अराकांसास स्थित मुख्यालय से बाहर विस्तार करने में संघर्ष करना पड़ा है। आज जो लोग कंपनी में शीर्ष पदों पर हैं उनमें से कई शुरुआती दिनों में ठेला चलाने वाले और क्लर्क रह चुके हैं। कंपनी ने बहुत मजबूत सांस्कृतिक मूल्य अपनाए हैं और उसने अपने पांव जमीन पर रखे हैं लेकिन घरेलू बाजार में भी अराकांसास के बाहर बड़े बदलाव को पहचानने की कंपनी के वरिष्ठ नेतृत्व की क्षमता पर सवालिया निशान हैं। वे भारतीयों या हिस्पैनिक्स के रूप में नए समुदायों के उभार को पहचानने में नाकाम रहे। वे खरीद के नए रुझानों को समझ नहीं पाए। 
 
यहां तक कि जब घरेलू बाजार के बाहर नेतृत्वकर्ताओं ने बदलाव को पहचाना भी तो भी संस्थान के भीतर की नौकरशाही को बदलने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। इन सब बातों का नतीजा यह हुआ कि उसका मूल अमेरिकी कारोबार ठहराव पर पहुंच रहा है। वहां उसकी वृद्धि दर 2 फीसदी से भी कम रह गई। इस बीच इन स्टोर की वृद्धि में आई गिरावट के चलते अमेरिका में कंपनी के कई स्टोर बंद हो गए। इस परिदृश्य में एमेजॉन के तकनीक सक्षम ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म ने वॉलमार्ट को गहरी चोट पहुंचाई। वॉलमार्ट के उलट एमेजॉन एक नए तरह के ग्राहकों से मुखातिब है और उनकी सेवा कर रही है। प्राइम मेंबरशिप, घर तक सामान की अबाध आपूर्ति, ऑनलाइन खरीद की सामान्य प्रक्रिया और इन सबके बाद अब एमेजॉन ने एमेजॉन गो और होल फूड के रूप में स्टोर का रास्ता भी अपनाया है।
 
माना जा रहा है कि आने वाले तीन वर्ष में एमेजॉन बिक्री के मामले में वॉलमार्ट के अमेरिकी कारोबार को पीछे छोड़ देगी।  स्टॉक मार्केट ने पहले ही विजेता का चयन कर लिया है। वॉलमार्ट की हालत कुछ ऐसी ही है जैसे कोई हिरण अचानक राजमार्ग पर गाडिय़ों की लाइट की चकाचौंध में फंस गया हो। ऑनलाइन कॉमर्स में बदलाव की उसकी कोशिश कष्टप्रद रही है। उसने अपना खुद का ऑनलाइन कारोबार शुरू करना चाहा लेकिन जल्दी ही उसे पता चल गया कि इस काम के लिए तकनीक की समझ रखने वाले नए किस्म के नेतृत्वकर्ताओं की आवश्यकता है।
 
कंपनी ने जेटडॉटकॉम का अधिग्रहण करने के बाद जेट के संस्थापक मार्क लोर को अपना ई-कॉमर्स विभाग संभालने को कहा लेकिन इस क्षेत्र में भी उसे सफलता मिलती नहीं दिख रही। वॉलमार्ट की विरासत, तकनीक के क्षेत्र में प्रवेश और उसके नौकरशाही ढांचे और एमेजॉन का अनुसरण करने की उसकी कोशिश ने उसके संसाधनों को दबाव में डाला है।  सवाल यह है कि कंपनी अब क्या करेगी? अब जबकि उसके घरेलू बाजार में वृद्घि में धीमापन आ रहा है, वह भारत पर दांव लगाने जा रही है। वॉलमार्ट द्वारा फ्लिपकार्ट के अधिग्रहण को भारतीय बाजार में नए सिरे से दखल का प्रयास माना जा रहा है। 
 
दिक्कत यह है कि फ्लिपकार्ट खुद बहुत अच्छी स्थिति में नहीं है। बीते दो साल में एमेजॉन ने बार-बार उसे पछाड़ा है। उसमें निरंतरता नहीं दिखती। कंपनी ने स्मार्ट फोन और चुनिंदा सामान पर ध्यान केंद्रित करके रखा है। उसके वेंडर अक्सर नाराज रहते हैं क्योंकि भुगतान में अक्सर देरी होती है। उसका किराना कारोबार कमोबेश नाकाम रहा। उसकी कार्यसंस्कृति और कर्मचारियों को हिस्सेदारी देने संबंधी उसकी नीतियों ने आंतरिक स्तर पर काफी दिक्कतें पैदा की हैं। इस बीच कंपनी का घाटा लगातार बढ़ता गया है। जबकि इस बीच उसने कुल बिक्री बढ़ाने पर जोर दिया है।  एक बार अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी हो जाने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही होगा कि क्या वॉलमार्ट फ्लिपकार्ट में मौजूद दिक्कतों को दूर कर सकेगी?
 
खासतौर पर उभरते बाजारों में कंपनी के पुराने प्रदर्शन को देखते हुए तो यह बात और भी महत्त्वपूर्ण है। हकीकत यह है कि वॉलमार्ट में ऐसा कोई नेतृत्व नहीं है जो तकनीक की समझ रखता हो। इसके अलावा उभरते बाजार की तमाम जटिलताएं उसे फ्लिपकार्ट के मौजूदा नेतृत्व पर भरोसा करने पर मजबूर करेंगी। जाहिर है अच्छी खासी धनराशि मिल जाने के बाद वे इसमें कितनी रुचि लेंगे यह कहा नहीं जा सकता है। इस बात की काफी संभावना है कि शुरुआती खुशनुमा दिनों के बाद सारा बोझ एक बार फिर वॉलमार्ट पर ही आ जाए।
Keyword: walmart, flipkart, e commerce, amazone,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या कंपनियों के बेहतर नतीजे अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत हैं?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.