बिजनेस स्टैंडर्ड - रोबोट : वाहन संयंत्र के नए कामगार
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रोबोट : वाहन संयंत्र के नए कामगार

टी ई नरसिम्हन /  05 20, 2018

चेन्नई के श्रीपेरंबुदूर में स्थित हुंडई संयंत्र अब किसी पुरानी फैक्टरी की जगह साफ सुथरा, शोर-शराबे में कमी और आपका स्वागत करने को तैयार संयंत्र का रूप ले चुका है। पंक्तियों में लगी नई कारें साफ बता रही हैं कि संयंत्र अपनी पूरी उत्पादन क्षमता के साथ काम कर रहा है। यहां हर 30 सेकंड में एक नई कार का उत्पादन हो रहा है। लेकिन इसके लिए केवल नीली ड्रेस पहने काम कर रहे कर्मचारियों का आभार प्रकट करना बहुत नहीं होगा। इनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहे रोबोट भी संयंत्र की उत्पादकता और कार्य-क्षमता को बढ़ा रहे हैं। 

 
इससे कुछ सौ किलोमीटर दूर बेंगलूरु के बाहरी छोर पर नरसपुर के पास स्थित होंडा का दो-पहिया वाहन संयंत्र भी अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए रोबोट का प्रयोग कर रहा है। दरअसल भारत में विनिर्माण संयंत्र लगाने वाली अधिकांश कंपनियां उत्पादकता बढ़ाने के लिए स्वचालन की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं।  हुंडई के श्रीपेरंबुदूर फैक्टरी में 580 रोबोट काम कर रहे हैं और संयंत्र में खामी वाली कारों का अनुपात (डिफेक्ट रेश्यो) पांच प्रतिशत से घटकर दो प्रतिशत से भी कम हो गया है। यह संयंत्र हुंडई मोटर समूह के सभी 32 वैश्विक संयंत्रों में क्वालिटिविटी चार्ट (गुणवत्ता और उत्पादकता) के मामले में शीर्ष पांच संयंत्रों में शामिल है। 
 
यह वर्ष 2017 में सुरक्षा मानकों के मामले में हुंडई मोटर समूह का नंबर 1 संयंत्र रहा।  हुंडई मोटर इंडिया लिमिटेड (एचएमआईएल) में उपाध्यक्ष (उत्पादन) एस. गणेश मणि ने कहा, 'हमारी योजना स्वचालन के जरिये कठिन, थकावट भरा और खतरनाक काम को कम करना और संयंत्र की सामूहिक क्षमता को बढ़ाने की है।'  दूसरी ऑटोमोबाइल निर्माता इकाइयां भी बड़े स्तर पर ऑटोमेशन को अपना रही हैं। स्रोत बताते हैं कि इस समय मारुति सुजुकी इंडिया में हर चार कर्मचारियों पर एक रोबोट काम कर रहा है और इसकी मानेसर तथा गुरुग्राम इकाई में लगभग 5,000 रोबोट काम कर रहे हैं। पहले, विनिर्माण इकाइयों में वेल्डिंग गन को श्रमिक हाथ से चलाया करते थे। यह काफी भारी होती थी और वेल्डिंग काफी जटिल काम है, जिससे इसके मानवीय संचालन में कठिनाई आती थी। इस काम के लिए रोबोट एकदम सही हैं। साथ ही, रोबोट अपनी उच्च गति दृष्टि प्रणाली के साथ कार के इंजन की गुणवत्ता जांच भी कर रहे हैं। 
 
फिलहाल एचएमआईएल की बॉडी शॉप 95 प्रतिशत और पेंट शॉप 65 प्रतिशत स्वचलित है। कंपनी साल दर साल के हिसाब से अपनी ऑटोमेशन क्षमता को बढ़ा रही है और अब तीसरी पीढ़ी के रोबोट की जगह चौथी पीढ़ी के रोबोट का उपयोग करना शुरू कर दिया है। बेंगलूरु के पास स्थित होंडा की नई विनिर्माण इकाई पूरी तरह से स्वचलित है। उदाहरण के लिए, पहले श्रमिक एक मशीन से दूसरी मशीन में कच्चा माल डालते थे, जो अब पूरी तरह के एक रोबोट द्वारा किया जाता है।  होंडा मोटरसाइकिल और स्कूटर इंडिया प्रा. लि. (एचएमएसआई) में समूह उपाध्यक्ष और निदेशक वी. श्रीधर ने कहा, 'ऑटोमेशन को धन्यवाद, पहले जिस पंक्ति में 10 श्रमिक काम करने के लिए लगे रहते थे, उनकी जगह केवल तीन-चार रोबोट ने आकर उत्पादकता बढ़ा दी।' भारत में होंडा की पहली इकाई में स्वचालन काफी कम है और नए संयंत्र की उत्पादकता, पहले संयंत्र से 20-25 प्रतिशत अधिक है।
 
वैश्विक स्तर पर विनिर्माण गतिविधियों में नई तकनीकों के प्रयोग से स्वचालन और डेटा साझा करने की प्रक्रिया को इंडस्ट्री 4.0 के नाम से पहचाना जा रहा है। यह तकनीक पुरानी विनिर्माण प्रक्रिया को नए सिरे से परिभाषित कर रही है और भारत इसे तेजी से अपना रहा है। श्रीधर कहते हैं, 'हमारी मशीनों में बहुत से स्मार्ट सेंसर लगे हैं जो विभिन्न गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए रखते हैं।' उदाहरण के लिए, बेरिंग की स्थिति की जांच करने वाला रोबोट इसके तापमान पर लगातार नजर बनाए रखता है और सभी आंकड़े नियंत्रक पैनल पर भेजता रहता है। इससे समय की बचत होती है और मशीन को बार बार उत्पादन इकाई में ले जाने की जरूरत नहीं पड़ती। श्रीधर बताते हैं कि इन आंकड़ों की सहायता से परिसंपत्ति उपयोग 5-7 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। एचएमएसआई ने बेंगलूरु के पास अपनी तीसरी इकाई में मशीन खराब होने का पूर्वानुमान लगाने वाली मशीन लगाई है और कंपनी इसे दूसरे संयंत्रों में भी लगाएगी।
 
इसके अलावा, मनुष्यों के साथ काम करने में सक्षम कोलोबरेटिव रोबोट (कोबोट्स) ने विभिन्न क्षेत्रों में रोबोट के उपयोग की सीमाओं को बढ़ा दिया है। कोबोट्स बनाने में माहिर कंपनी यूनिवर्सल रोबोट्स के भारत एवं श्रीलंका प्रमुख प्रदीप डेविड कहते हैं, 'पहले केवल बड़ी कंपनियां ही रोबोट का उपयोग करती थीं। लेकिन कोबोट्स छोटी कंपनियों के  लिए काफी फायदेमंद साबित हुए हैं और विनिर्माण गतिविधियों में साथ मिलकर काम कर रहे हैं।' वैश्विक स्तर पर बाजार आंकड़े उपलब्ध कराने वाली कंपनी आईडीसी का अनुमान है कि ïवर्ष 2020 तक कंपनियों में दो तिहाई काम कोबोट्स द्वारा किया जाएगा।
 
क्या इससे मानवीय काम निर्थक हो जाएगा? शायद नहीं। कंपनियों का कहना है कि हम अब कर्मचारियों को रोबोट चलाने और उनकी खामियां दूर करने में माहिर बना रहे हैं। ऑटोमेशन से होने वाले बहुत से फायदों के कारण इसके उपयोग से इनकार नहीं किया जा सकता और समाज को मानव-रोबोट सामंजस्य का एक बेहतरीन मॉडल तैयार करना होगा। 
Keyword: vehicle, car, plant, robot,,
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