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2014 से17 के बीच 17 राज्यों में गिरा कर्ज-जमा अनुपात

अद्वैत राव पालेपू / मुंबई 05 20, 2018

मार्च तक के आंकड़ों के मुताबिक देश में करीब 157 करोड़ बैंक खाते खोले गए हैं। देश की करीब 80 प्रतिशत वयस्क आबादी ने 107.3 लाख करोड़ रुपये जमा किए हैं, जबकि वाणिज्यिक बैंकों ने 79.1 लाख करोड़ रुपये कर्ज दिए हैं। भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों से पता चलता है कि 2014 के बाद से सिर्फ 12 राज्यों में कर्ज जमा अनुपात में सुधार हुआ है।  रिजïर्व बैंक के हैंडबुक में भारतीय राज्यों के आंकड़ों से पता चलता है कि महाराष्ट्र को कर्ज हासिल करने में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी मिली है, वहीं दक्षिण में कर्ज और जमा के हिसाब से असमानता कम है। 
 
2011 में खाताधारकों की संख्या महज 35 प्रतिशत थी, जो नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री पद संभालने के पहले 2014 में 53 प्रतिशत पर पहुंच गई। 2014 में देश भर में जमा 80 लाख करोड़ रुपये था, जिसमें 34 प्रतिशत वृद्धि होकर मार्च 2017 में यह 107.3 लाख करोड़ रुपये हो गया। वहीं दूसरी ओर 2014 में कर्ज 62.8 लाख करोड़ रुपये था, जो मार्च 2017 के आखिर तक 26 प्रतिशत बढ़कर 79.2 लाख करोड़ रुपये हो गया। 
 
उत्तर 
 
जमा के हिसाब से देखें तो दिल्ली में कुछ आश्चर्यजनक नहीं है। दिल्ली में 11 लाख करोड़ रुपये, पंजाब में 3.3 लाख करोड़ रुपये, राजस्थान में 3.1 लाख करोड़ रुपये जमा हुए। वहीं 2017 में बैंकों ने दिल्ली में 9.6 लाख रुपये कर्ज कर्ज दिए, वहीं पंजाब को 2.2 लाख करोड़ रुपये और राजस्थान को 2.1 लाख करोड़ रुपये कर्ज मिला। 
 
पूर्वोत्तर
 
पूर्वोत्तर राज्यों में असम की स्थिति सबसे मजबूत है, जहां 1.2 लाख करोड़ रुपये जमा हुए। रिजर्व बैंक के आंकड़ों से पता चलता है कि पूर्वोत्तर राज्यों में जमा का आधार दशकों से कम रहा है। पूर्वोत्तर के राज्यों का औसत जमा अंडमान निकोबार, पुदुच्चेरी, दमन और दीव जैसे केंद्र शासित प्रदेशों की तुलना में ज्यादा रहा है। पूर्वोत्तर राज्यों की अर्थव्यवस्था पर विभिन्न केंद्र सरकारों द्वारा दशकों से विशेष ध्यान न दिए जाने की वजह से इस क्षेत्र में कर्ज मिलने की दर कम रही। 2017 में अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मिजोरम और नगालैंड को करीब 28.5 अरब रुपये कर्ज मिले हैं। वहीं असम को 2017 में वाणिज्यिक बैंकों से 28.5 अरब रुपये कर्ज मिला है। 2014-17 के बीच अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर और नगालैंड में कर्ज जमा अनुपात बढ़ा है, जबकि मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम में कम हुआ है। 
 
पूर्व 
 
पश्चिम बंगाल ने 2017 में वाणिज्यिक बैंकिंग व्यवस्था में 6.8 लाख करोड़ रुपये जमा कराए। उसके बाद बिहार मेंं 2.9 लाख करोड़ रुपये और ओडिशा में 2.45 लाख करोड़ रुपये जमा हुए। कर्ज के हिसाब से देखें तो पश्चिम बंगाल मेंं 3.4 लाख करोड़ रुपये और बिहार व ओडिशा में 900 अरब रुपये के आसपास कर्ज दिया गया।
 
मध्य
 
मध्य के राज्यों छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश में 14.2 लाख करोड़ रुपये जमा हुए, जबकि पूर्व के राज्यों में 14.1 लाख करोड़ रुपये जमा हुए थे। इस तरह से मध्य व पूर्व के राज्यों में अंतर कम हुआ है। उत्तर प्रदेश के बैंकों में जमा  बढ़कर 8.9 लाख करोड़ रुपये हो गया है, वहीं मध्य प्रदेश में 3.1 लाख करोड़ रुपये जमा हुए हैं। उत्तर प्रदेश में 3.5 लाख करोड़ रुपये जबकि मध्य प्रदेश मेंं 1.9 लाख करोड़ रुपये कर्ज दिया गया है।
 
पश्चिम
 
देश की वित्तीय राजधानी महाराष्ट्र में 21.9 लाख करोड़ रुपये जमा हुए जबकि 23.3 करोड़ रुपये कर्ज दिया गया। 2017 में गुजरात में 4.2 लाख करोड़ रुपये कर्ज दिया गया, जबकि 6 लाख करोड़ रुपये जमा हुए हैं। 
 
दक्षिण
 
तमिलनाडु मेंं 7 लाख करोड़ रुपये कर्ज वितरित किया गया, जबकि कर्नाटक में 5.2 लाख करोड़ रुपये कर्ज दिया गया। वहीं आंध्र प्रदेश व तेलंगाना को क्रमश: 2.5 लाख करोड़ रुपये और 3.9 लाख करोड़ रुपये कर्ज मिला है। 
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