बिजनेस स्टैंडर्ड - मुखौटा फर्मों पर टेढ़ी नजर
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मुखौटा फर्मों पर टेढ़ी नजर

वीणा मणि / नई दिल्ली 05 20, 2018

कर चोरी की आशंका

कंपनी पंजीयक ने रिटर्न दाखिल नहीं करने वाली 3 लाख फर्मों का पंजीकरण किया रद्द
इन फर्मों के निदेशकों को किसी अन्य कंपनी में निदेशक बनने पर रोक
इन फर्मों की अचल संपत्तियों की बिक्री या हस्तांतरण पर है पाबंदी

बिजनेस स्टैंडर्ड मुखौटा फर्मों पर टेढ़ी नजरकेंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने उन मुखौटा कंपनियों के कर चोरी करने की आशंका जताई है जिनका पंजीकरण रद्द हुआ है या फिर रद्द होने की प्रक्रिया चल रही है। बोर्ड ने कंपनी मामलों के मंत्रालय और कंपनी रजिस्ट्रार को इन कंपनियों के बारे में विस्तृत जानकारी देने को कहा है। उसने साथ ही मंत्रालय से कहा है कि वह किसी भी कंपनी का पंजीकरण रद्द करने से पहले बोर्ड को सूचित करे क्योंकि उस कंपनी पर कर बकाया हो सकता है।

कर विभाग ने इन कंपनियों की विस्तृत जानकारी और उन पर कर बकाये की सूचना 31 मई तक जानकारी देने को कहा है। सीबीडीटी ने कंपनी मामलों के मंत्रालय को हाल में भेजे पत्र में कहा है कि अगर किसी कंपनी का पंजीकरण रद्द कर दिया गया है और वह बहाली के लिए आवेदन करती है तो कंपनी रजिस्ट्रार को राष्ट्रीय कंपनी कानून पंचाट (एनसीएलटी) में इसका विरोध नहीं करना चाहिए क्योंकि कुछ कंपनियों के खिलाफ बकाया कर वसूलने की कार्यवाही चल रही है।

एक आंतरिक पत्र में सीबीडीटी ने कहा कि इन कंपनियों पर कर विभाग की नजर रहनी चाहिए क्योंकि यह राजस्व का मामला है। सीबीडीटी ने साथ ही आयकर विभाग के सभी मुख्य आयुक्तों को पत्र लिखकर कर बकाये वाली निष्क्रिय कंपनियों के खिलाफ सीमित कार्रवाई पर चिंता जताई है।  आयकर विभाग ने अपने नोडल अधिकारियों को विभिन्न निष्क्रिय कंपनियों के खिलाफ इस महीने के अंत तक एनसीएलटी के विभिन्न पीठों में मामला दायर करने को कहा है।  

सूत्रों का कहना है कि मुखौटा कंपनियों पर प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा गठित कार्य बल की पिछले साल 30 नवंबर को हुई बैठक में कंपनी मामलों के महानिदेशक ने सुझाव दिया था कि कंपनियों का पंजीकरण बहाल करने का मामला एनसीएलटी में उठाने के लिए आयकर विभाग कंपनी रजिस्ट्रार से संपर्क साध सकता है। साथ ही यह सुझाव भी दिया गया था कि इस तरह की बहाली के पक्ष में राजस्व के हितों का बचाव एक मजबूत आधार होगा। लेकिन कंपनी को तभी बहाल किया जाना चाहिए जब सरकार के पास इसके लिए वैध कारण हो।

कंपनी मामलों के मंत्रालय का कहना है जिन कंपनियों का पंजीकरण रद्द हुआ है वे देरी के लिए माफीनामा और सभी दस्तावेज जमा कराकर फिर से सिस्टम में वापसी कर सकती हैं। हालांकि सरकार ने साफ किया है कि अगर कोई निदेशक अपना पंजीकरण बहाल करना चाहता है तो वह एनसीएलटी का कार्यवाही के बाद ही ऐसा कर सकता है और वह भी तब जब वह किसी अन्य मुखौटा कंपनी से न जुड़ा हो।  

उल्लेखनीय है कि कंपनी रजिस्ट्रार ने करीब 3 लाख कंपनियों का पंजीकरण रद्द कर दिया था। इन कंपनियों ने जरूरी नियामकीय रिटर्न दाखिल नहीं किए थे। इन कंपनियों के निदेशकों के किसी अन्य कंपनी में निदेशक बनने पर पाबंदी लगा दी गई थी। सरकार ने साथ ही इन कंपनियों की  अचल संपत्ति की बिक्री और हस्तांतरण पर भी रोक लगा दी है।

मुखौटा कंपनियों की दूसरी सूची भी तैयार है जिसमें 2 लाख से अधिक कंपनियां हैं। इन कंपनियों को पहले ही नोटिस भेजे जा चुके हैं और जल्दी ही उनके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। 

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