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केंद्र ने कमजोर बैंकों संग बैठक की

सोमेश झा / नई दिल्ली May 17, 2018

केंद्र ने गुरुवार को सार्वजनिक क्षेत्र के कमजोर बैंकों को समर्थन देने की प्रतिबद्घता जताई। सरकार ने इन बैंकों को केंद्रीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के प्रॉम्प्ट करेक्टिव एक्शंस (पीसीए) से बाहर निकालने के प्रयास में समर्थन देने का वादा किया है। एक बैंक के वरिष्ठï अधिकारी ने कहा कि पीसीए ढांचे के तहत शामिल 11 पीएसबी के वरिष्ठï अधिकारियों की समीक्षा बैठक में केंद्र ने इन बैंकों को आश्वस्त किया कि वह आरबीआई के साथ बातचीत कर नियामक से सख्त उधारी रुख नहीं अपनाने का अनुरोध करेगा। 
 
यह बैठक ऐसे समय में की गई है जब यह आशंका बनी हुई है कि पीसीए के तहत कई बैंकों को आरबीआई से सख्त उधारी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है। आरबीआई ने देना बैंक पर सभी नई उधारी पर प्रतिबंध लगाया है जबकि 2017-18 में वित्तीय प्रदर्शन में कमजोरी की वजह से इलाहाबाद बैंक के लिए जोखिमपूर्ण परिसंपत्तियों के लिए उधारी सीमित करने और अधिक लागत वाली जमाएं जुटाने से प्रतिबंधित किया है। वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने पत्रकारों को बताया, 'अगले कुछ दिनों में, हम यह सुनिश्चित करेंगे कि केंद्र सरकार इन बैंकों को पीसीए से बाजर निकालने के लिए मजबूत बनाने के लिए जल्द से जल्द और हरसंभव समर्थन दे।' अरुण जेटली के स्वस्थ नहीं हो जाने तक वित्त मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी संभालने वाले गोयल ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की मौजूदा स्थिति को 'पुरानी समस्या' करार दिया और भरोसा जताया कि बैंक जल्द ही इस स्थिति से उबरेंगे।
 
मौजूदा समय में 21 में से 11 पीएसबी आरबीआई के पीसीए फ्रेमवर्क के तहत शामल हैं। इन बैंकों में देना बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, यूको बैंक, आईडीबीआई बैंक, ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स, इंडियन ओवरसीज बैंक, कॉरपोरेशन बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, इलाहाबाद बैंक और यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया शामिल हैं। वित्त मंत्री ने कहा कि आरबीआई उचित बैंकिंग निगरानी सुनिश्चित कर रहा है और इसके लिए अनिवार्य कदम उठा रहा है। उन्होंने कहा, 'बैंकिंग निगरानी व्यवस्था पिछली सरकार के तहत इतनी सख्त नहीं थी।'
 
पीसीए के दायरे में शामिल बैंकों ने स्थिति में सुधार के लिए और ज्यादा पूंजी डाले जाने और इस वित्त वर्ष के अंत तक अनिवार्य नियामकीय पूंजी बरकरार रखने पर जोर दिया गया है। एक वरिष्ठï बैंकर ने कहा, 'पिछले राउंड में मिली रकम पिछले साल की हमारी पूंजी जरूरतों का प्रबंधन करने के लिहाज से पर्याप्त थी। लेकिन हमें सरकार से अभी और कोष की जरूरत है और पीसीए से बाहर लाए जाने के संदर्भ में यह एक प्रमुख कारक होगा।'  केंद्र ने अपनी 2.11 लाख करोड़ रुपये की बैंक पुनर्पूंजीकरण योजना के तहत पिछले साल पीएसबी में 800 अरब रुपये डाले थे। पीसीए में शामिल 11 बैंकों को 2017-18 में 523 अरब रुपये मिले जबकि तुलनात्मक रूप से मजबूत बैंकों, या गैर-पीसीए बैंकों को पुनर्पूंजीकरण बॉन्डों के जरिये 358 अरब रुपये प्राप्त हुए। 
 
पीसीए फ्रेमवर्क में शामिल बैंकों को विभिन्न स्तरों के उल्लंघन के लिए गंभीर प्रतिबंधों का सामना करना पड़ता है जिनमें लाभांश वितरण, शाखा विस्तार आदि पर नियंत्रण मुख्य रूप से शामिल हैं। इसके अलावा, ज्यादा बदतर हालात में आरबीआई कमजोर बैंक को अन्य बैंकों के साथ विलय किए जाने या उसे बंद किए जाने को भी कह सकता है। 
Keyword: bank, loan, debt, RBI,,
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