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कर्नाटक में सरकार के लिए दांव-पेच

अर्चिस मोहन / नई दिल्ली 05 16, 2018

कर्नाटक में सरकार गठन को लेकर अनिश्चितता का दौर बुधवार को भी जारी रहा। राज्यपाल वजूभाई वाला ने अभी तक किसी को भी सरकार बनाने के लिए आमंत्रित नहीं किया है। कर्नाटक विधानसभा के मंगलवार को आए नतीजों में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी लेकिन वह बहुमत के जादुई आंकड़े तक नहीं पहुंच पाई। उसे सरकार बनाने के लिए 8 विधायकों के समर्थन की जरूरत है।

दूसरी ओर कांग्रेस और जनता दल (सेक्युलर) का गठबंधन बहुमत का दावा कर रहा है। बेंगलूरु में कांग्रेस और जद (एस) के विधायकों ने राज्यपाल से मुलाकात कर 117 विधायकों के समर्थन की सूची सौंपी। उन्होंने कहा कि राज्यपाल ने उन्हें आश्वासन दिया है कि वह संविधान, उच्चतम न्यायालय के फैसलों और परंपराओं के मुताबिक निर्णय लेंगे। अलबत्ता कर्नाटक के स्थानीय टीवी चैनल सुवर्ण टीवी ने दावा किया कि राज्यपाल भाजपा के बी एस येदियुरप्पा को गुरुवार को शपथ ग्रहण के लिए बुला सकते हैं।

राज्यपाल के कार्यालय ने न तो इस खबर की पुष्टि की और न ही इसका खंडन किया। कांग्रेस ने गोवा, मणिपुर और मेघालय का हवाला दिया जहां भाजपा के चुनाव बाद गठबंधन को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया गया जबकि इन सभी राज्यों में कांग्रेस को सबसे ज्यादा सीटें मिली थीं। लेकिन कुछ कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि राज्यपाल सबसे बड़े दल को भी सरकार बनाने के लिए आमंत्रित कर सकता है।

इस बीच जद (एस) के नेता एच डी कुमारस्वामी ने एक संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया कि भाजपा ने उनके विधायकों को तोडऩे के लिए एक अरब रुपये की पेशकश की थी। उन्होंने दावा किया कि भाजपा की तरफ से भी उन्हें मुख्यमंत्री बनने की पेशकश की गई है लेकिन कहा कि उनका भाजपा के साथ जाने का सवाल ही नहीं उठता है।

कुमारस्वामी ने कहा कि वह संत नहीं हैं और अगर भाजपा ने उनके विधायकों को तोडऩे की कोशिश की तो वह भी भाजपा के विधायकों को तोड़ सकते हैं। उन्होंने सवाल किया कि भाजपा को कैसे सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया जा सकता है। भले ही वह सबसे बड़ा दल है लेकिन उसके पास पर्याप्त बहुमत नहीं है। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कुमारस्वामी के आरोपों को खारिज कर दिया।

निवर्तमान मुख्यमंत्री सिद्घरमैया ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर विधायकों की खरीद फरोख्त को प्रोत्साहित करने का आरोप लगाया। कांग्रेस और जद (एस) अपने नवनिर्वाचित विधायकों को भाजपा के खेमे में जाने से रोकने के प्रयास में लगे हैं लेकिन कांग्रेस के नेता डी के शिवकुमार इस गठबंधन के लिए संकटमोचक बनकर उभरे हैं। पिछले साल गुजरात में राज्य सभा चुनावों से पहले वहां के कांग्रेसी विधायक कर्नाटक में शिवकुमार के ही रिजॉर्ट में ठहरे थे। शिवकुमार ने इन खबरों का खंडन किया कि दो निर्दलीय विधायक भाजपा के साथ चले गए हैं। 

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