बिजनेस स्टैंडर्ड - दक्षिण के द्वार पर अटकी भाजपा
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Monday, September 24, 2018 01:35 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम जिरह खबर

दक्षिण के द्वार पर अटकी भाजपा

बीएस संवाददाता / नई दिल्ली 05 15, 2018

बिजनेस स्टैंडर्ड दक्षिण के द्वार पर अटकी भाजपा
कर्नाटक विधानसभा चुनावों में भाजपा 104 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी लेकिन वह 112 के जादुई आंकड़े से दूर रह गई। इससे राज्य में राजनीतिक अस्थिरता की स्थिति पैदा हो गई। इससे पहले कि भाजपा जनता दल (सेक्युलर) से संपर्क साधती, 78 सीट जीतने वाली कांग्रेस ने उसे मुख्यमंत्री पद की पेशकश कर दी। पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा की पार्टी जद (एस) को 37 सीटें मिली हैं जबकि एक सीट उसकी सहयोगी बसपा के खाते में गई है।

कर्नाटक के राज्यपाल वजूभाई वाला ने सरकार बनाने के लिए विभिन्न दलों के दावों पर अपने पत्ते नहीं खोले हैं और उन्हें आधिकारिक नतीजे आने तक इंतजार करने को कहा। संविधान के जानकारों का कहना कि राज्यपाल सबसे बड़े दल को सरकार बनाने के वास्ते आमंत्रित करने के लिए बाध्य नहीं हैं। हालांकि बहुमत परीक्षण सदन में होना है। भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी लेकिन किंगमेकर बनी जद (एस) इस अहम राज्य में कांग्रेस को सत्ता में बने रहने के लिए मदद कर रही है।

शुरुआती रुझानों से भाजपा में जश्न का माहौल था लेकिन जैसे ही यह साफ हुआ कि पार्टी बहुमत हासिल नहीं कर पाएगी, यह मायूसी में बदल गया। पार्टी अध्यक्ष अमित शाह की प्रेस कांफ्रेंस स्थगित कर दी गई, भाजपा मुख्यालय में आयोजित लंच भी रद्द कर दिया गया और वहां जमा हुए ढोल नगाड़े वालों को भी वापस भेज दिया गया। भाजपा मुख्यालय के बाहर फूलों के गुच्छे पार्टी कार्यकर्ताओं की मायूसी बयां कर रहे थे। बेंगलूरु और दिल्ली में शुरुआती प्रतिक्रियाओं से साफ था कि किसी भी कीमत पर जद (एस) के साथ सरकार बनाने का भाजपा का कोई इरादा नहीं था।

कांग्रेस ने सोमवार को ही संकेत दे दिए थे कि वह मुख्यमंत्री पद को लेकर समझौता करने को तैयार है। निवर्तमान मुख्यमंत्री सिद्घरमैया ने कहा था कि वह दलित मुख्यमंत्री के लिए कुर्सी छोडऩे को तैयार हैं। कांग्रेस की शीर्ष नेता सोनिया गांधी ने देवेगौड़ा को फोन किया और उनके बेटे एच डी कुमारस्वामी को कांग्रेस के समर्थन से मुख्यमंत्री बनाने की पेशकश की। इसका मकसद भाजपा को सत्ता में आने से रोकना है।

हालांकि जद (एस) की सीटों की संख्या कांग्रेस से आधी है लेकिन उसने मुख्यमंत्री पद की कांग्रेस की पेशकश को हाथोंहाथ ले लिया। भाजपा का दावा था कि उसे सरकार बनाने का जनादेश मिला है। लेकिन कांग्रेस और जद (एस) के पास भाजपा से कुछ सीटें ज्यादा हैं और उनका दावा है कि उन्हें भाजपा को सरकार बनाने से रोकने का जनादेश मिला है।

एक तरह से कांग्रेस ने कर्नाटक में भाजपा को उसी की चाल से मात दे दी। पिछले साल गोवा, मेघालय और मणिपुर चुनावों में भाजपा ने छोटे दलों और निर्दलीयों के साथ हाथ मिलाकर सबसे बड़े दल कांग्रेस को सरकार बनाने से वंचित कर दिया। कांग्रेस और जद (एस)के मिलकर सरकार बनाने के दावे को सही ठहराते हुए कांग्रेस के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने गोवा, मेघालय और मणिपुर के मामले में व्यवस्था दी है कि सबसे बड़े दल होने का मतलब यह नहीं है कि आप स्वाभाविक रूप से सरकार बनाने के योग्य हैं।

कांग्रेस के नेता और लोकसभा सांसद मल्लिकार्जुन खडग़े ने कहा, 'आज हमारे पास संख्याबल है, इसलिए हम सरकार बनाने का दावा लेकर राज्यपाल के पास पहुंचे थे। कल स्थितियां बदली हुई होंगी।' कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी इस मौके पर नदारद रहे और गुलाम नबी आजाद जैसे वरिष्ठ नेताओं ने देवेगौड़ा के साथ बातचीत की। जद (एस) के सभी विधायकों को पड़ोसी राज्य केरल ले जाया जा सकता है ताकि उन्हें भाजपा की ओर तरफ से होने वाली संभावित खरीद फरोख्त से बचाया जा सके।  

कर्नाटक में जद (एस) और कांग्रेस के गठबंधन के सरकार बनाने की संभावना है लेकिन यह कैसे काम करेगा यह अलग मुद्दा है। चुनाव परिणाम आने से पहले कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, 'अगर जद (एस) को 25 से अधिक सीटें मिलती है तो फिर चूहा हाथी को नचाएगा।' कांग्रेस के कई नेताओं की चिंता यह है कि जद (एस) की क्या मांगें होंगी और पार्टी उन्हें कैसे पूरा करेगी।

सिद्घरमैया को चामुंडेश्वरी सीट पर 30 हजार से अधिक वोटों से शिकस्त का सामना करना पड़ा जबकि बादामी में वह केवल 1600 वोटों से ही जीत दर्ज कर पाए। चामुुंडेश्वरी में बड़ी संख्या में अल्पसंख्यक और उनकी अपनी जाति कुरुबा के मतदाताओं की अच्छी खासी तादाद है, इसके बावजूद उन्हें हार का सामना करना पड़ा। सिद्घरमैया को उसी व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनाने में मदद करनी होगी जिसके खिलाफ उन्होंने बगावत की थी। वर्ष 2005 में उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण जद (एस) से निकाल दिया गया था और उन्होंने पार्टी छोड़ दी थी।

Keyword: karnataka, election, BJP, congress, narendra modi, कर्नाटक, विधानसभा चुनाव, भाजपा, राजनीतिक अस्थिरता, जनता दल (सेक्युलर),
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या नए निवेश से सुधरेगी आईएलऐंडएफएस की सेहत?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.