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रत्नाभूषण क्षेत्र को मिलेगा महंगा कर्ज

दिलीप कुमार झा और अभिजीत लेले / मुंबई May 11, 2018

भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) नीरव मोदी की कंपनियों की धोखाधड़ी के असर से अब भी उबर नहीं पाया है। बैंक ने आज कहा कि रत्नाभूषण क्षेत्र को ऋण की लागत तब तक ऊंची रहेगी, जब तक इसमें डिफॉल्ट अधिक रहते हैं और उद्योग को एक जोखिम वाले क्षेत्र के रूप में देखा जाता रहेगा। देश का यह सबसे बड़ा बैंक इस क्षेत्र की कंपनियों को ऋण देने में सतर्कता बरतेगा।  एसबीआई के प्रबंध निदेशक डी खारा ने कहा कि एक ऋणदाता के रूप में बैंक रत्नाभूषण निर्यात संवर्धन परिषद के उन कदमों की प्रशंसा करता है, जो उसने बैंकों की चिंताएं दूर करने और आभूषण क्षेत्र के तंत्र को ज्यादा साफ-सुथरा बनाने के लिए उठाए हैं। बैंक किसी उद्योग को दो नजरियों से देखता है। पहला नुकसान देने वाले डिफॉल्ट, जो बीते समय में हुए हैं। दूसरा आगे डिफॉल्ट की आशंका। मूल्यांकन और मध्यस्थता जैसे नए उपाय शुरू होने से दूसरे पहलू की चिंताएं कम हो जाएंगी। 
 
रत्नाभूषण निर्यात संवर्धन परिषद द्वारा आयोजित बैंकिंग सेमिनार को संबोधित करते हुए खारा ने कहा कि इन पहल का असर दिखने तक डिफॉल्ट की आशंका ज्यादा बनी रहेगी। निश्चित रूप से पिछले कुछ महीनों के दौरान उद्योग की उधारी लागत बढ़ी है। यह जोखिम और प्रतिफल संबंध के अलावा कुछ नहीं है, जिस पर बैंक ऋण की दर तय करते हैं।  इससे भी ज्यादा अहम पहलू जोखिम की धारणा है, जो पिछले अनुभवों का असर है। जब तक यह अनुभव बेहतर नहीं बनता, तब तक इसे एक जोखिम वाले क्षेत्र के रूप में देखा जाएगा। इस क्षेत्र को बैंकिंग क्षेत्र ने 700 अरब रुपये का ऋण दिया हुआ है, जिसमें से 70 अरब रुपये का ऋण एसबीआई का है। 
 
पंजाब नैशनल बैंक-नीरव मोदी घोटाले के बाद भारत का 41 अरब डॉलर का रत्नाभूषण क्षेत्र भरोसे की कमी से जूझ रहा है। एसबीआई इस क्षेत्र में कारोबारी भरोसा बहाल करने के मकसद से स्थापित की जा रही स्थायी समिति में सक्रिय रूप से हिस्सा लेने के बारे में विचार कर रहा है। इस समिति का सुझाव केंद्रीय वाणिज्य सचिव रीता तेवतिया ने एक बैंकिंग सेमिनार में दिया था। समिति को रत्नाभूषण क्षेत्र को आसान ऋण मुहैया कराने की एक रूपरेखा के बारे में सुझाव देने हैं। इस समिति में एसबीआई की अगुआई में बैंक, वित्तीय संस्थान और रत्नाभूषण क्षेत्र के प्रतिनिधि शामिल होंगे। 
 
इस विशेष समिति का गठन रत्नाभूषण क्षेत्र में बैंकों का भरोसा करने के लिए बहुत अहम है। इस उद्योग का देेश के कुल वस्तु निर्यात में 14 फीसदी और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 7 फीसदी हिस्सा है। यह उद्योग करीब 50 लाख लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार देता है।  उद्योग का दावा है कि वित्त वर्ष 2018-19 के लिए बैंकों द्वारा इस क्षेत्र के लिए तय ऋण सीमा पर कोई असर नहीं हुआ है, लेकिन उद्योग के जानकारों का अनुमान है कि उद्योग को आने वाले समय में मुश्किलें झेलनी पड़ेंगी। ऋणदाताओं की तरफ से भविष्य में ऋण कम दिए जाने जैसी स्थिति से बचने के लिए जीजेईपीसी ऋणदाताओं को आभूषण उद्योग के साथ दोस्ताना कारोबारी माहौल के लिए राजी करने की पूरी कोशिश कर रहा है। 
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