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डालमिया भारत की याचिका वापस भेजी

अभिषेक रक्षित / कोलकाता 05 10, 2018

उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को दूसरी बार बिनानी सीमेंट अधिग्रहण मामले में हस्तक्षेप न करने का रुझान दिखाया। हालांकि अदालत ने एनसीएलटी के आदेश को पलटने के लिए डालमिया भारत की तरफ से दाखिल मामले को बंद कर दिया, लेकिन उसने एनसीएलएटी को डालमिया भारत की याचिका पर तेजी से सुनवाई करने का आदेश दिया।

न्यायमूर्ति रोहिंटन नरीमन और न्यायमूर्ति एएम सप्रे ने पाया कि डालमिया भारत के आरोप एनसीएलएटी में लंबित हैं। उन्होंने इस मामले को फिर से एनसीएलएटी में भेज दिया। उन्होंने एनसीएलएटी को इस साल 22 मई से रोजाना मामले की सुनवाई करने का निर्देश दिया। डालमिया भारत से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि कंपनी की याचिका पर उच्चतम न्यायालय के गुरुवार के फैसले से उसके लिए आगे अपील करने के दरवाजे बंद नहीं हुए हैं। 

सूत्र ने कहा, 'अगर डालमिया भारत एनसीएलएटी के फैसले से खुश नहीं होती है तो वह फिर से उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर कर सकती है।' उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय के आदेश से एनसीएलएटी में डालमिया भारत की याचिका की तेजी से सुनवाई होगी। इस याचिका में कहा गया है कि एनसीएलएटी के कोलकाता पीठ के आदेश पर रोक लगाई जाए। पहले जब बिनानी सीमेंट ने उच्चतम न्यायालय से संपर्क किया था और अपने ऋणदाताओं के साथ अदालत से बाहर निपटारे और दिवालिया प्रक्रिया को बंद करने की मंजूरी मांगी थी, तब भी देश की इस सर्वोच्च अदालत ने मामले की सुनवाई में अनिच्छा जताई थी। 

हालांकि तब आवेदक ने कोई फैसला सुनाए जाने से पहले ही अपनी याचिका वापस ले ली थी। डालमिया भारत ने बिनानी सीमेंट के समाधान पेशेवर (आरपी) और उसकी ऋणदाताओं की समिति को पत्र भेजा है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि अल्ट्राटेक आईबीसी की धारा 29ए के तहत बोली लगाने के योग्य नहीं है। हालांकि इसके बाद समाधान पेशेवर के इन आरोपों को लेकर आंतरिक जांच करने और उसके बाद अपनी पड़ताल पर अल्ट्राटेक का रुख जानने की संभावना है। 

 

हालांकि उच्चतम न्यायालय के फैसले ने ऋणदाताओं की समिति को अल्ट्राटेक की पेशकश के बारे में बातचीत करने से नहीं रोका है। लेकिन इस पत्र से ऋणदाताओं की समिति की अहम बैठक में और देरी हो सकती है। सूत्रों ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि इस गुरुवार को होने वाली ऋणदाताओं की समिति की बैठक इस बात का सबूत है कि समाधान पेशेवर आरोपों की जांच करेंगे। समाधान पेशेवर ने गुरुवार को ऋणदाताओं की समिति की बैठक बुलाई थी, लेकिन उन्हें और ऋणदाताओं की समिति को डालमिया भारत का यह पत्र मिलने के बाद उन्होंने यह बैठक बुधवार शाम रद्द कर दी। 

दिवालिया कानून (आईबीसी) की धारा 29ए बोलीदाता की अयोग्यता से संबंधित हैं। आईबीसी की धारा 29 (ए) (सी) के मुताबिक कोई व्यक्ति या प्रवर्तक, जो गैर-निष्पादित संपत्ति (एनपीए) के रूप में वर्गीकृत कंपनी का उसकी दिवालिया प्रक्रिया शुरू होने तक की एक साल की अवधि में प्रबंधन कर रहे हैं तो वह अयोग्य हैं। 

Keyword: उच्चतम न्यायालय, बिनानी सीमेंट, अधिग्रहण, न्यायमूर्ति रोहिंटन नरीमन, न्यायमूर्ति एएम सप्रे,
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