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ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों से तत्‍काल प्रभावित नहीं होगा भारत का तेल आयात

भाषा / नई दिल्ली May 09, 2018

अमेरिका द्वारा ईरान पर वित्तीय प्रतिबंध के फैसले से भारत का वहां से कच्चे तेल का आयात प्रभावित नहीं होगा। अधिकारियों का कहना है कि जब तक यूरोपीय संघ भी इसी तरह के कदम नहीं उठाता, ईरान से कच्चे तेल के आयात पर असर नहीं पड़ेगा। अधिकारियों ने कहा कि भारत अपने तीसरे सबसे बड़े तेल आपूर्तिकर्ता को यूरो में यूरोपीय बैंकिंग चैनल का इस्तेमाल कर भुगतान करता है। जब तक कि इसे नहीं रोका जाता, तब तक आयात जारी रहेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कल घोषणा की थी कि अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अंकुश के लिए वित्तीय प्रतिबंध लगाएगा। इस घोषणा के तुरंत बाद कच्चे तेल के दाम 2014 के बाद अपने उच्च स्तर पर पहुंच गए। ब्रेंट क्रूड 2.5 प्रतिशत चढ़कर 76.75 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया।

देश की सबसे बड़ी पेट्रोलियम कंपनी इंडियन आयल कॉरपोरेशन के निदेशक (वित्त) एके शर्मा ने कहा, तत्काल इसका कोई असर नहीं होगा, लेकिन हमें यह इंतजार करना होगा कि अन्य देश, विशेषरूप से यूरोपीय ब्लॉक क्या प्रतिक्रिया देता है। शर्मा ने कहा कि यदि यूरोपीय संघ यथास्थिति कायम रखता है और पुन: प्रतिबंध नहीं लगाता है, तो भारत को ईरान की आपूर्ति में कोई बाधा नहीं आएगी। उन्होंने कहा कि यूरोपीय देश भी यदि अमेरिका की तरह ईरान पर प्रतिबंध लगाते हैं, तो भारत के लिए कच्चे तेल की खरीद का भुगतान करना मुश्किल हो जाएगा।  

फ्रांस के राष्ट्रपति एमैनुअल मैक्रान ने पिछले महीने वाशिंगटन यात्रा के लिए इसके लिए लॉबिंग की थी कि अमेरिका इस समझौते में बना रहे। उन्होंने कहा था कि फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन को अमेरिका द्वारा संयुक्त वृहद कार्रवाई योजना (जेसीपीओए) से बाहर निकलने का अफसोस है। जेसीपीओए पर ईरान और पी5 प्लस 1 ( संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थाई सदस्यों चीन, फ्रांस, ब्रिटेन, रूस और अमेरिका के साथ जर्मनी) तथा यूरोपीय संघ ने विएना में 14 जुलाई, 2015 को हस्ताक्षर किए थे। जेसीपीओए के तहत वित्तीय प्रतिबंध हटाए जाने के बदले ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम में कटौती करनी है। इराक और सऊदी अरब के बाद ईरान भारत का तीसरा सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता है। अप्रैल, 2017 से जनवरी, 2018 के दौरान उसने भारत को 1.84 करोड़ टन कच्चे तेल की आपूर्ति की है।

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