बिजनेस स्टैंडर्ड - रेहड़ी-पटरी वालों पर अतिक्रमण की मार, छिना रोजगार
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रेहड़ी-पटरी वालों पर अतिक्रमण की मार, छिना रोजगार

रामवीर सिंह गुर्जर / नई दिल्ली 05 08, 2018

न्यायालय जाएंगे रेहड़ी-पटरी विक्रेता

कानून बनने के चार साल बाद भी नहीं लागू हुए रेहड़ी-पटरी वालों को नियमित करने के नियम
दिल्ली में इनकी संख्या है करीब 4 से 5 लाख

बिजनेस स्टैंडर्ड रेहड़ी-पटरी वालों पर अतिक्रमण की मार, छिना रोजगारमयूर विहार में दस साल से भी अधिक समय से सब्जी का रेहड़ी-पटरी लगाने वाले दीपक कुमार (बदला हुआ नाम) से उनका कारोबार छिन गया। दीपक की तरह ही दिल्ली में लाखों रेहड़ी पटरी विक्रेताओं के कारोबार पर अतिक्रमण हटाओ अभियान की मार पडऩी शुरू हो गई।  सदर बाजार, खारी बावली जैसे बाजारों से लेकर कॉलोनियों के स्थानीय बाजारों में रेहड़ी-पटरी वालों पर मार पडऩे लगी है। रेहड़ी-पटरी वाले इसके पीछे सरकार की लापरवाही बता रहे हैं। उनका कहना है कि रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को नियमित करने का कानून बनाने के चार साल बाद भी इसे लागू नहीं किया गया है। दिल्ली में 4 से 5 लाख रेहड़ी-पटरी विके्रताओं से करीब 15 से 20 लाख लोग जुड़े हैं, जिनका सालाना कारोबार 700 से 1,000 करोड़ रुपये होने का अनुमान है।

नैशनल एसोसिएशन ऑफ स्ट्रीट वेंडर्स ऑफ इंडिया (नासवी) के राष्टï्रीय समन्वयक अरविंद सिंह कहते हैं कि न्यायालय द्वारा अतिक्रमण हटाने के आदेश के नाम पर दिल्ली में रेहड़ी-पटरी वालों की रोजी-रोटी छीनी जा रही है। उन्होंने कहा कहा कि चार साल पहले रेहड़ी-पटरी वालों को नियमित करने के लिए कानून बना था लेकिन इसे अब तक लागू नहीं किया गया। रेहड़ी-पटरी वालों को उजाडऩे के खिलाफ नासवी न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगी। उनका कहना है कि टीवीसी का गठन न होने तक रेहड़ी-पटरी वालों को हटाने पर रोक लगनी चाहिए। इस संबंध में अगले सप्ताह उप राज्यपाल कार्यालय का घेराव भी किया जाएगा।
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