बिजनेस स्टैंडर्ड - एलआईसी के लिए सीएसआर पर विचार
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Wednesday, September 23, 2020 04:54 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम कंपनिया खबर

एलआईसी के लिए सीएसआर पर विचार

श्रीमी चौधरी / मुंबई 05 06, 2018

सीएसआर पर खर्च करना होगा दो फीसदी 

एलआईसी कानून में नहीं है इसका प्रावधान
निगम के पास 440 अरब रुपये से अधिक अतिरिक्त कोष

बिजनेस स्टैंडर्ड एलआईसी के लिए सीएसआर पर विचारकेंद्र सरकार भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) को कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) के तहत लाने की योजना बना रही है। इससे इस दिग्गज सरकारी कंपनी को अपने अतिरिक्त कोष का कम से कम 2 फीसदी सामाजिक गतिविधियों पर खर्च करना होगा। एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक सरकार का मानना है कि देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी को सामाजिक गतिविधियों में योगदान करना चाहिए। अभी कंपनी के लिए इस तरह की कोई बाध्यता नहीं है। सूत्रों के मुताबिक संसदीय समिति की 25 अप्रैल को मुंबई में हुई बैठक में बैंकों और एलआईसी सहित दूसरे वित्तीय संस्थानों के लिए सीएसआर नियमों के अनुपालन की समीक्षा की गई। समिति ने पाया कि एलआईसी कानून में सीएसआर के लिए कोई प्रावधान नहीं है जबकि कंपनी कानून के मुतबिक कंपनियों के लिए अपने शुद्ध लाभ का कम से कम दो फीसदी हिस्सा सीएसआर पर खर्च करना अनिवार्य है। 

सूत्रों ने कहा कि समिति ने एलआईसी से उसके अतिरिक्त कोष के बारे में जानकारी मांगी और बैठक में मौजूद निगम के अधिकारियों से पूछा कि सामाजिक गतिविधियों के लिए धन के आवंटन को लेकर उन्हें कोई आपत्ति तो नहीं है। बैठक में मौजूद एक अधिकारी ने कहा कि निगम को इस प्रस्ताव पर कोई आपत्ति नहीं है। अधिकारी ने कहा, 'सरकार चाहती है कि एलआईसी जैसे वित्तीय संस्थान अपने अतिरिक्त कोष का इस्तेमाल सामाजिक गतिविधियों के लिए करे। निगम 22 लाख करोड़ रुपये से अधिक संपत्ति का प्रबंधन करती है और सीएसआर से संबंधित गतिविधियों के लिए सरकार के लिए फंड का बड़ा स्रोत बन सकता है।'

एलआईसी की 2016-17 की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक उसके पास 440 अरब रुपये से अधिक अतिरिक्त कोष है। एलआईसी कानून के मुताबिक उसे अपने अतिरिक्त कोष का 95 फीसदी हिस्सा पॉलिसीधारकों को बोनस के तौर पर देना पड़ता है और बाकी 5 फीसदी सरकार की हिस्सेदारी है। ऐसे में अगर सरकार के प्रस्ताव को लागू किया जाता है तो निगम को अपने अतिरिक्त कोष में से कम से कम 8.80 अरब रुपये कल्याणकारी गतिविधियों पर खर्च करने होंगे।

संसदीय समिति ने अतिरिक्त कोष के आवंटन के बारे में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। सूत्रों ने कहा कि समिति अपने सुझाव सरकार को सौंपेगी। आमतौर पर अतिरिक्त कोष रिटर्न होता है जो निगम जीवन बीमा, पेंशन और एन्युटी आदि के कारोबार से जुटाता है। एलआईसी के एक पूर्व अधिकारी ने कहा, 'परोपकारी कामों के लिए एलआईसी का अपना खुद का कोष है जिसे बढ़ाया जा सकता है और इसे सीएसआर कहा जा सकता है।' वह एलआईसी गोल्डन जुबली फाउंडेशन की बात कर रहे थे जिसकी स्थापना 2006 में की गई थी। इसका मकसद गरीबों को मदद और शिक्षा को बढ़ावा देना है। मार्च 2017 तक फाउंडेशन के पास 1.60 अरब रुपये का कोष था जो एलआईसी के आकार को देखते हुए मामूली रकम है।

Keyword: सीएसआर, एलआईसी, कानून, कोष, जीवन बीमा निगम, कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व, LIC, CSR, Insurance,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या सेबी के नए निर्देशों से डेट म्युचुअल फंडों पर घटेगा प्रतिफल?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.