बिजनेस स्टैंडर्ड - मांग की कमी से जूझ रही एलएनजी
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मांग की कमी से जूझ रही एलएनजी

शाइन जैकब / नई दिल्ली 05 06, 2018

तरलीकृत प्राकृतिक गैस

25,329 मेगावाट गैस आधारित बिजली संयंत्र हैं भारत के पास
इनमें से 14,000 मेगावाट से अधिक  फंसे हुए हैं परेशानी में
इसके बावजूद, कम से कम 10 और एलएनजी परियोजनाएं शुरू होने वाली हैं
बिजली, शहरी गैस, उर्वरक और औद्योगिक उपभोक्ताओं की ओर से मांग में वृद्धि होने की है उम्मीद
भारत में 2026-27 तक एलएनजी की मांग 82 प्रतिशत तक बढ़कर 654 एमएमएससीएमडी होने वाली है

2017-18 में प्राकृतिक गैस की खपत 144.75 मिलियन घन मीटर थी, जबकि अनुमान था 494 का, बड़ी संख्या में गैस आधारित बिजली संयंत्रों के फंसने के बाद घरेलू बाजार की मांग में आई कमी

एक तरफ भारत ने जहां पिछले हफ्ते ही एक और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) टर्मिनल का उद्घाटन किया है, वहीं देश को इसकी मांग में गंभीर कमी का सामना करना पड़ रहा है। सरकार द्वारा संचालित प्रमुख कंपनी गेल इंडिया का पाइपलाइन क्षमता उपयोग मात्र 40-45 फीसदी है, जबकि इसे आयातित एलएनजी के लिए और बाजार खोजने में मुश्किल आ रही है। नाम न बताने की शर्त पर गेल के एक अधिकारी ने कहा कि बड़ी संख्या में गैस आधारित बिजली संयंत्रों के परेशानी में फंसने के बाद घरेलू बाजार में मांग की कमी है। हमने जिस एलएनजी का अमेरिका से अनुबंध किया है, उसका भी 50-60 प्रतिशत भाग मांग में कमी की वजह से बाहर बेचा जाएगा या उसका विनिमय किया जाएगा।

भारत के पास कुल 25,329 मेगावाट गैस आधारित बिजली संयंत्र हैं। इनमें से 14,000 मेगावाट से अधिक परेशानी में फंसे हुए बताए जाते हैं। इसके बावजूद, भारत में कम से कम 10 और एलएनजी परियोजनाएं शुरू होने वाली हैं। इनमें से चार के पास टर्मिनलों की कुल क्षमता की लगभग 7.25 करोड़ टन प्रति वर्ष (एमटीपीए) परिचालन क्षमता है। पेट्रोलियम योजना एवं विश्लेषण प्रकोष्ठ (पीपीएसी) की एक रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2017-18 में 494 एमएमएससीएमडी (मिलियन मीट्रिक स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर पर डे यानी 10 लाख मानक घन मीटर प्रतिदिन) प्राकृतिक गैस की अनुमानित खपत की तुलना में वास्तविक खपत केवल 144.75 एमएमएससीएमडी थी।

हालांकि वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान भारत में एलएनजी के आयात में पिछले वर्ष की तुलना में 6.65 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई। दिलचस्प बात यह है कि इस वर्ष मार्च महीने का कुल एलएनजी आयात 2577.75 एमएमएससीएम (मिलियन मीट्रिक स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर) था, जिसमें पिछले वर्ष के इसी महीने के मुकाबले 19.63 प्रतिशत का इजाफा हुआ। वर्तमान में भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा एलएनजी आयातक है।

यह ऐसे समय में हुआ है कि जब पिछले हफ्ते महाराष्‍ट्र के रत्नागिरि जिले में जेएसडब्ल्यू जयगढ़ बंदरगाह में एच-एनर्जी गेटवे (हीरानंदानी समूह का ऊर्जा उद्यम) द्वारा एलएनजी टर्मिनल आधारित 40 लाख टन फ्लोटिंग स्टोरेज री-गैसीफिकेशन यूनिट (एफएसआरयू) की शुरुआत की गई। यह टर्मिनल 2018 की चौथी तिमाही तक परिचालित होने की संभावना है। एच-एनर्जी के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी दर्शन हीरानंदानी ने कहा कि वर्तमान में हमारे पास भारत में 100 जिले हैं, जहां शहरी  गैस लाइसेंस दिए गए हैं। इस जून में भारत के कुल 670 जिलों में से 100 और जिलों को लाइसेंस दिए जाएंगे। इस तरह, भारत में हमारी कनेक्टीविटी एक-तिहाई तक पहुंच जाएगी। इसलिए हमें लगता है कि मांग में दोगुनी वृद्धि होगी। वर्तमान में गैस की कुल खपत 40 मीट्रिक टन है और हमें लगता है कि यह अगले 5-6 सालों में कम से कम 80 टन तक पहुंच जाएगी। इसमें से आधी खपत घरेलू बाजार की है। हम 22 टन आयात करते हैं और 20 टन का घरेलू रूप से उत्पादन करते हैं। हीरानंदानी ने कहा कि भले ही सभी बड़े टर्मिनल बहुत अच्छा कारोबार न करें, लेकिन सभी छोटे पैमाने वाले टर्मिनल अच्छा कारोबार करेंगे।

बाजार में उत्साह का एक अन्य कारण बिजली, शहरी गैस, उर्वरक और औद्योगिक उपभोक्ताओं की में वृद्धि की उम्मीद होना है। पेट्रोनेट एलएनजी के मुताबिक भारत में 2026-27 तक एलएनजी की मांग 82 प्रतिशत तक बढ़कर 654 एमएमएससीएमडी होने वाली है। शहरी गैस की मांग 2016-17 में 22 एमएमएससीएमडी से बढ़कर 2026-27 तक 68 एमएमएससीएमडी तक होने जा रही है। इसी प्रकार, इस दौरान बिजली क्षेत्र की मांग भी 157 एमएमएससीएमडी से दोगुनी होकर 309 एमएमएससीएमडी हो सकती है।
Keyword: LNG, oil, gas,,
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