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इंडिगो से घोष के इस्तीफे को लेकर उठते कई सवाल

इंसानी पहलू
श्यामल मजूमदार /  May 06, 2018

यह उम्मीद करना बेमानी होगा कि भारत की सबसे बड़ी विमानन कंपनी के प्रमुख चुपचाप अपना इस्तीफा दे सकते हैं, इसलिए आदित्य घोष के इंडिगो से त्यागपत्र को लेकर शोर-शराबा होना स्वाभाविक है। वह इस विमानन कंपनी के करीब 10 साल से अध्यक्ष थे। हालांकि इस शोर-शराबे को घोष ने 'नाटक' और  इंडिगो के संस्थापक एवं अंतरिम सीईओ राहुल भाटिया ने 'अनुचित' करार दिया है। लेकिन उनके मीडिया बयानों से इस्तीफे की वजह साफ नहीं हुई हैं क्योंकि उन्होंने अचानक त्यागपत्र की वास्तविक वजहों के बारे में मीडिया के कयासों को खारिज करने के अलावा कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। 

 
घोष के इस्तीफे के बाद उठे सवालों की कई वजह हैं। उदाहरण के लिए पिछले सप्ताह इंडिगो के मीडिया बयान में कहा गया कि ग्रेगोरी टेलर को वरिष्ठ सलाहकार नियुक्त किया गया है और वह नियामकीय मंजूरी मिलने के बाद नए सीईओ का पदभार संभालेंगे। टेलर पहले इस विमानन कंपनी में राजस्व प्रबंधन एवं नेटवर्क योजना के कार्यकारी उपाध्यक्ष थे। उन्होंने इस साल फरवरी में इस्तीफा दिया था और वह देश छोड़कर चले गए थे। इससे यह सवाल पैदा होता है कि फरवरी से अप्रैल के बीच ऐसा क्या हुआ कि इंडिगो को उन्हें वापस लाना पड़ा और वह भी घोष के उत्तराधिकारी के रूप में? 
 
दूसरा सवाल घोष के इस्तीफे से पहले के कुछ महीनों में बहुत से अहम लोगों की एक के बाद एक नियुक्ति से संबंधित है। उस समय कयास लगाए गए थे कि नए कार्याधिकारी फैसलों का काम अपने हाथ में ले रहे हैं और एक सांस्कृतिक बदलाव ला रहे हैं। लिहाजा, पहले से कार्यरत प्रबंधन के लिए बहुत कम मौके बचे हैं। उदाहरण के लिए हाल में नियुक्त होने वाले वोल्फगैंग प्रोक-शाउअर को जनवरी में मुख्य परिचालन अधिकारी के रुप में लाया गया। इंडिगो ने इन नियुक्तियों को यह कहकर तर्कसंगत साबित करने की कोशिश की है कि विमानन कंपनी लंबी दूरी की उड़ानों की तैयारी कर रही है, जिसमें इन विदेशी अधिकारियों का अनुभव बहुत महत्त्वपूर्ण है। लेकिन बहुत से लोगों का कहना है कि एकदम अलग पृष्ठभूमि के लोगों को लाने से एक सुसंगठित टीम नहीं बन सकती। विशेष रूप से उस स्थिति में, जब वे उस व्यक्ति को रिपोर्ट करेंगे, जिसकी उनकी नियुक्तियों में कोई राय नहीं ली गई। 
 
इन विदेशी लोगों में से ज्यादातर को लंबा वैश्विक अनुभव है। उदाहरण के लिए वोल्फगैंग प्रोक-शाउअर इस उद्योग में करीब 40 वर्षों से हैं। वह एयर बर्लिन, ऑस्ट्रेलियन एयरलाइंस, जेट एयरवेज और गोएयर (सीईओ के रूप में) में काम कर चुके हैं। टेलर भी इस उद्योग में 40 वर्षों से हैं। वह यूनाइटेड एयरलाइंस और यूएस एयरवेज में कंपनी योजना, रणनीति, नेटवर्क योजना, बेड़ा योजना जैसे क्षेत्रों में वरिष्ठ प्रबंधन भूमिकाएं निभा चुके हैं। अन्य नियुक्तियां मुख्य योजना अधिकारी के रूप में माइकल स्वीटेक और मुख्य रणनीति अधिकारी के रूप में विली बोल्टर की रही हैं। सभी को भारतीय विमानन बाजार की अच्छी समझ है। इसलिए उनके लिए घोष के नीचे लंबे समय तक काम करना मुश्किल होता। ऐसा नहीं है कि इंडिगो के प्रवर्तकों को इस तथ्य का पता नहीं होगा। हालांकि इंडिगो की सफलता में घोष की अहम भूमिका रही है, लेकिन उनका विमानन क्षेत्र में अनुभव महज 13 वर्ष ही है। इंटरग्लोब ने वर्ष 2005 में अपनी विमानन परियोजना शुरू की थी। 
 
घोष के इस्तीफे का एक बिंदु यह भी हो सकता है कि इंडिगो ने हाल में कई गलत कदम उठाए हैं। उदाहरण के लिए पिछले कुछ महीनों के दौरान इस विमानन कंपनी को अपने ए320 नियो के बेड़े में इंजन की खामियों के कारण बहुत से विमानों का परिचालन बंद करना पड़ा और कई उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। कंपनी के एक समय 11 विमान खराब हो गए। वहीं मार्च की दूसरे पखवाड़े में 900 से उड़ानें रद्द हुईं। इंडिगो विमानों के एक इंजन से आपात लैंडिंग के कुछ मामले सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुए। इससे भी शर्मनाक वह घटना थी, जिसमें इंडिगो के एक ग्राउंड स्टाफ ने एक यात्री से मारपीट की। विमानन कंपनी ने यह खबर मीडिया को देने वाले व्यक्ति को इस आधार पर हटा दिया कि उसने इस मारपीट के लिए उकसाया और फिर माफी भी मांगने से इनकार कर दिया। बाद में घोष ने अपना रुख नरम किया, लेकिन तब तक नुकसान हो चुका था। 
 
विमानन कंपनी दिल्ली इंटरनैशनल एयरपोर्ट (डायल) के साथ भी एक अनावश्यक कानूनी झगड़े में फंस गई। दरअसल डायल ने इंडिगो को अपनी कुछ उड़ानें टर्मिनल-2 पर स्थानांतरित करने को कहा था। बिना किसी स्पष्ट वजह के इंडिगो ने डायल को अदालत में घसीटा, लेकिन वह यह मुकदमा हार गई। उसके बाद संसदीय समिति की रिपोर्ट में इसकी सेवाओं की कड़ी आलोचना की गई। ये ऐसे उदाहरण हैं, जो ऐसे सीईओ का संकेत नहीं देते हैं, जिसके पास पूरी ताकत है।  इसमें कोई संदेह नहीं है कि घोष का लोगों (वह कनिष्ठ सहित ज्यादातर कर्मचारियों को नाम से जानते थे) के साथ गहरा जुड़ाव था और उन्होंने इंडिगो की सफलता में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।  हो सकता है कि संस्थापकों को यह लगा हो कि अब प्रबंधन की शीर्ष टीम में बदलाव का सही वक्त है, जो उस विमानन कंपनी की बढ़ती मांग को संभाल सके, जो अपनी उम्मीद से बहुत ज्यादा बढ़ गई है। 
Keyword: aviation, indigo, aditya ghosh, विमानन,
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