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श्नाइडर के बाद आगे कोई बिक्री नहीं करेगी एलऐंडटी

अमृता पिल्लै और उज्ज्वल जौहरी /  May 06, 2018

इंजीनियरिंग कंपनी लार्सन ऐंड टुब्रो (एलऐंडटी) ने श्नाइडर को अपना इलेक्ट्रिकल ऐंड ऑटोमोशन (ईए) कारोबार 140 अरब रुपये में बेचने का सौदा किया है। कंपनी के अधिकारियों की मानें तो इस सौदे के साथ ही कंपनी के गैर-प्रमुख विनिवेश पर अब विराम लग गया है। एलऐंडटी के मुख्य कार्याधिकारी एवं प्रबंध निदेशक एस एन सुब्रमण्यन ने कहा, 'एक समय पर कुछ परिसंपत्तियां परिपक्व हो जाती हैं और प्रमुख कारोबार की श्रेणी में फिट नहीं बैठती हैं। ऐसे में हम इन्हें बेचकर रकम दूसरी जगह निवेश करते हैं। अब इस सौदे के बाद विनिवेश गतिविधियों की संभावना नहीं दिख रही है।'

 
हालांकि बाजार का मानना है कि एलऐंडटी आगे भी विनिवेश गतिविधियां जारी रख सकती है। इक्विनॉमिक्स रिसर्च ऐंड एडवाइजरी के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक जी चोकालिंगम का कहना है कि विनिवेश से कंपनी को खासी नकद रकम की प्राप्ति होगी। यह ऐसे समय में होगा जब आर्थिक वृद्धि में तेजी आने की उम्मीद है।  यह सौदा 18 महीने में पूरा होने की उम्मीद है। इस सौदे से एलऐंडटी को अपने कर्ज (वित्तीय सेवाएं एवं विकास परियोजनाएं शामिल नहीं) को लगभग आधा करने में मदद मिली है। कंपनी के अनुसार दिसंबर 2017 तक यह 208 अरब रुपये था। विश्लेषकों के अनुसार आने वाले समय में और विनिवेश हो सकता है।   
 
परिसपंत्तियों के मौद्रीकरण की एलऐंडटी की रणनीति के तहत इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट स्थापित होने की गुंजाइश दिख रही है। इसके अलावा कंपनी की राजपुरा पावर संयंत्र की बिक्री से जुड़ी और गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। आईआईएफएल के विश्लेषकों रेणु वैद्य और नयन पारेख ने एलऐंडटी पर अपनी रिपोर्ट में कहा, '2019-20 की दूसरी छमाही में राजपुरा पावर संयंत्र को लेकर कुछ हलचल दिख सकती है।' हालांकि इस संयंत्र के लिए मौजूदा बाजार में खरीदार खोजना महंगा पड़ सकता है, क्योंकि बड़ी मात्रा में ताप विद्युत परियोजनाएं पहले से ही अटकी पड़ी हैं।
 
ऐसी परिसंपत्तियों की बिक्री से कर्ज और कम करने में मदद मिलेगी, लेकिन यह समेकित स्तर पर होगा। मार्च 2017 तक एलऐंडटी पर 939.76 करोड़ रुपये का समेकित कर्ज था। हालांकि कंपनी के प्रबंधन ने मंगलवार को सौदे से प्राप्त रकम के इस्तेमाल के बारे में कुछ नहीं कहा था, लेकिन आईआईएफएल के विश्लेषकों ने कहा कि रकम का इस्तेमाल कर्ज कम करने और रक्षा एवं अंतरिक्ष क्षेत्र में तकनीकी एवं विनिर्माण कारोबार के अधिग्रहण के लिए हो सकता है।  एलऐंडटी को कट्टïुपल्ली बंदरगारह की बिक्री से पूरी रकम नहीं मिली है। हालांकि सूत्रों ने इस सौदे का मूल्यांकन 22 अरब रुपये बताया है। यह बिक्री एलऐंडटी के 'लक्ष्य' कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसके तहत यह कम महत्त्वपूर्ण परिसंपत्तियां (नॉन-कोर ऐसेट्स) बेचना चाहती हैं और अपने प्रमुख कारोबार निर्माण एवं इंजीनियरिंग पर ध्यान केंद्रित करना चाहती है। इसके साथ ही कंपनी मार्जिन सहित दूसरी चीजों में अगले पांच साल में सुधार करना चाहती है। 
 
श्नाइडर सौदा
 
मोतीलाल ओसवाल सिक्योरिटीज के विश्लेषकों ने कहा कि यह सौदा एलऐंडटी के लक्ष्य कार्यक्रम के अनुसार है और 140 अरब रुपये के स्तर पर ईऐंडए खंड का मूल्यांकन वित्त वर्ष 2018 के अनुमानों के आधार पर 2.7 गुना बिक्री और 33 गुना आय पर किया गया। विश्लेषकों ने कहा कि सौदा कमाई बढ़ाएगा और इस वजह से उन्होंने 2020-21 के आय के अनुमानों में 2 प्रतिशत इजाफा किया है और सम-ऑफ-पाट्र्स (एकल आधार पर मूल्य) आधारित मूल्य लक्ष्य 1,690 कर दिया है। मॉर्गन स्टैनली का भी ऐसा ही मानना है। उसनेे कहा, 'एलऐंडटी शेयर का कारोबार आय के अनुमानों के आधार पर 2018-19 के लिए अनुमानित प्रति शेयर आय के 24 गुना स्तर पर हो रहा है। सौदे का बेहतर मूल्य हासिल करने की क्षमता और ईपीसी खंड में वर्चस्व कायम रखने की एलऐंडटी की खूबी की वजह से हम इस सौदे को सकारात्मक रूप में देखते हैं।'
 
प्रमुख कारोबार में दिख रही तेजी
 
सौदे से पहले भी विश्लेषक क्रियान्वयन क्षमता में सुधार की वजह से एलऐंडटी को लेकर उत्साहित थे। उदाहरण के लिए, एडलवाइस को एलऐंडटी के लिए मार्च तिमाही के दौरान घरेलू बाजार में धीमी एवं पूर्ण सुधार की उम्मीद है। 2017-18 के पहले नौ महीनों में भी ऐसा ही दिखा था। 2017-18 की तीसरी तिमाही में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) प्रभावी होने के बाद घरेलू इंजीनियरिंग एवं निर्माण खंड में परियोजनाओं का क्रियान्वयन बढ़ा है और विश्लेषकों का मानना है कि मार्च तिमाही में भी यह रुख जारी रह सकता है। मोतीलाल ओसवाल ने मार्च तिमाही में सालाना आधार पर 462 अरब रुपये मूल्य के सौदे मिलने का अनुमान जताया है।  दिसंबर से एलऐंडटी के शेयर ने सेंसेक्स के मुकाबले अच्छा प्रदर्शन किया है। 
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