बिजनेस स?टैंडर?ड - गूगल एआई बताएगा आपकी आंखों का हाल
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Friday, December 09, 2022 10:43 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम कंपनिया खबर

गूगल एआई बताएगा आपकी आंखों का हाल

अलनूर पीरमोहम्मद /  May 06, 2018

करीब 45 साल की एक महिला भारत के एक छोटे कस्बे में एक मधुमेह क्लीनिक में जाती है। डॉक्टर उनकी आंखों की कई जांच करता है। वह महिला की आंखों की तस्वीर लेता है। उसके बाद इस तस्वीर को एक सिस्टम पर अपलोड किया जाता है, जो मरीज के रेटिना की हालत को ग्रेडिंग देता है और दो में से एक रिपोर्ट देता है- तुरंत नेत्र रोग विशेषज्ञ को दिखाएं या अगले 12 महीनों में एक अन्य जांच कराएं।  यह डॉक्टर डायबिटिक रेटिनोपैथी (डीआर) के लक्षणों का पता लगा रहा है। इस बीमारी का उन मामलों में 10 फीसदी हिस्सा है, जिनमें मधुमेह से पीडि़त मरीज अपनी आंखों की रोशनी गंवा देते हैं। देश में मधुमेह के 7 करोड़ मरीज हैं, इसलिए भारत को विश्व की मधुमेह राजधानी के रूप में जाना जाता है। इस बीमारी का पता लगाने के लिए अभी तक रेटिना की तस्वीरों की ग्रेडिंग की प्रक्रिया मैनुअल तरीके से की जाती है, जिसमें कई घंंटे लगते हैं। दिग्गज इंटरनेट कंपनी गूगल के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) एल्गोरिद्म के इस्तेमाल से कुछ ही मिनटों में जांच की जा सकती है। 

 
पिछले चार वर्षों के दौरान गूगल ब्रेन एआई के शोधार्थियों ने भारत के तीन अस्पतालों- अरविंद आई हॉस्पिटल, शंकर नेत्रालय और नारायण नेत्रालय के साथ तस्वीरों को एल्गोरिद्म में फीड करने के लिए काम किया है ताकि एआई को मरीजों के रेटिना की तस्वीरों के ग्रेडिंग में प्रशिक्षित किया जा सके।  अब भारत असल दुनिया में एल्गोरिद्म के सटीक प्रदर्शन पर मुहर लगाने की अगुआई कर रहा है। गूगल मदुरै में अरविंद आई हॉस्पिटल में एक प्रायोगिक योजना चला रहा है। शंकर नेत्रालय में भी ऐसी योजना शुरू करने पर विचार किया जा रहा है। इसका मकसद एआई के जरिये मरीजों के रेटिना की तस्वीरों की ग्रेडिंग करना है। यह मुहिम तब शुरू हुई, जब गूगल के शोधार्थियों ने एक पत्र प्रकाशित किया। इसमें कहा गया कि उनके एल्गोरिद्म ने डायबिटिक रेटिनोपैथी का पता लगाने में 98.6 फीसदी सटीकता हासिल की है, जो अमेरिका में आंखों के चिकित्सक और रेटिना विशेषज्ञों के प्रदर्शन के समान है। 
 
गूगल ब्रेन टीम के उत्पाद प्रबंधक लिली पेंग कहते हैं, 'हमारे और अन्य कई शोधार्थियों के काम ने यह दर्शाया है कि डायबिटिक रेटिनोपैथी जैसी बीमारियों का पता लगाने के लिए बहुत सटीक एल्गोरिद्म को प्रशिक्षित करने के लिए डीप लर्निंग का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि एक एल्गोरिद््म को प्रशिक्षित करना महज एक शुरुआत है। अगला चरण ठीक से यह समझना है कि कैसे इन एल्गोरिद्म को डॉक्टरों और हेल्थकेयर सिस्टम के साथ मिलकर लागू किया जाए।' गूगल के एआई को मैनुअल ग्रेडिंग प्रक्रिया के साथ इस्तेमाल किया जा रहा है, जो पहले ही अस्पतालों में इस्तेमाल की जा रही है। मदुरै में अरविंद आई हॉस्लिटल के चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉ. आर किम ने कहा, 'हम पिछले 15 वर्षों से मरीजों के रेटिना की तस्वीरें ले रहे हैं और हमारे पास एक ऐसा सॉफ्टवेयर है, जो डायबिटिक रेटिनोपैथी का पता लगाने के लिए ग्रेडिंग प्रक्रिया को आंशिक स्वचालित बना देता है। अब हमने एआई को शामिल किया है, जो मैनुअल ग्रेडिंग के बाद तस्वीरों को देखता है।' उन्होंने कहा, 'जब मैनुअल प्रक्रिया और एआई के नतीजों में बड़ा अंतर होता है तो हम इसे वरिष्ठ रेटिना विशेषज्ञ के पास भेजते हैं।'
 
किम कहते हैं कि डायबिटिक रेटिनोपैथी प्रक्रिया के पूरक के रूप में अस्पताल के एआई का इस्तेमाल शुरू करने के बाद के तीन महीनों में यह मैनुअल ग्रेडर की तुलना में ज्यादा सटीक साबित हो चुका है। हालांकि अभी उन्होंने मैनुअल ग्रेडिंग प्रक्रिया की जगह नहीं ली है, लेकिन यह अस्पतालों को उन मरीजों की तादाद बढ़ाने से नहीं रोक रहा है, जिनकी अब ग्रेडिंग गूगल एल्गोरिद्म से की जाएगी।  मदुरै की अस्पताल शृंखला अगले महीने से अपनी मुख्य विजन सेंटरों मे एआई सिस्टम का इस्तेमाल शुरू करेगी, जहां आंखों की सामान्य जांच के अलावा मधुमेह के रोगियों की डायबिटिक रेटिनोपैथी की भी जांच की जाएगी। एआई मरीजों के रेटिना की तस्वीरों की ग्रेडिंग करेगा और ये नतीजे एक नेत्र रोग विशेषज्ञ को दिखाए जाएंगे, जो टेलीकॉन्फ्रेंस के जरिये उपलब्ध होगा।
 
किम ने कहा, 'बड़ी तादाद में ग्रेडिंग करने में दिक्कत है, लेकिन एआई के लिए यह बहुत आसान है। जब हम इसकी सटीकता को लेकर सहज होंगे तो एआई को मैनुअल ग्रेडर की जगह लागू किया जाएगा। उसके बाद यह रेटिना की अन्य स्थितियों की भी जांच करेगा।' हालांकि अभी गूगल को यह साबित करना होगा कि यह सॉफ्टवेयर असल दुनिया में कैसे काम करता है, जहां तस्वीर की गुणवत्ता काफी अगल होगी। नियामकीय दृष्टिकोण से अप्रैल ऐतिहासिक रहा, जब अमेरिकी खाद्य एवं दवा प्रशासन (एफडीए) ने एआई सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल वाले पहले चिकित्सा उपकरण की बिक्री को मंजूरी दे दी। आईडीएक्स-डीआर एक ऐसा उत्पाद है, जो डायबिटिक रेटिनोपैथी की पहचान करता है। यह उत्पाद 'मामूली से थोड़े अधिक' डायबिटिक रेटिनोपैथी की मौजूदगी को पहचानने में 87.4 फीसदी सटीकता हासिल करने में सफल रहा।  
 
गूगल के समाधान से इतर आईडीएक्स का सॉफ्टवेयर एक विशेष हार्डवेयर- एक रेटिना कैमरा टॉपकोन एनडब्ल्यू400 के साथ मिलकर काम करता है।  भारत में यह एक समस्या है क्योंकि रेटिना कैमरे की कीमत (5 लाख से 40 लाख रुपये तक)  और गुणवत्ता अलग-अलग होती है। अगर गूगल के एआई आई डॉक्टर को यहां काम करना है तो यह कम रिजॉल्यूशन की तस्वीरों से भी डायबिटिक रेटिनोपैथी की मौजूदगी की पहचान करने में सक्षम होना चाहिए।  नारायण नेत्रालय के वाइस-चेयरमैन डॉ. रोहित शेट्टी के लिए यह बड़ी बाधा है। जब अध्ययन किए जाते हैं तो उनमें उच्च-गुणवत्ता की तस्वीरों का इस्तेमाल किया जाता है ताकि मरीज की आंख की स्थिति की बिल्ुकल सटीक जानकारी मिल सके। भारत और दक्षिण एशिया एवं अफ्रीका के अन्य देशों में यह एल्गोरिद्म काफी उपयोगी साबित हो सकता है, लेकिन वहां महंगे कमरों की उपलब्धता एक बड़ी दिक्कत है। 
 
चिकित्सा क्षेत्र में एआई को लागू करने की सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि उसमें एआई को लेकर नियमों का अभाव है। भारत टेलीमेडिसिन कानून पर काम कर रहा है ताकि तकनीक की मदद से मरीजों का दूर बैठे ही इलाज करने वाले डॉक्टरों को नियमित किया जा सके, लेकिन इस दिशा में अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। नारायण नेत्रालय के शेट्टी पूछते हैं, 'गूगल की एआई आई डॉक्टर जैसी तकनीक का इस्तेमाल ग्रामीण इलाकों में सुदूरवर्ती विजन सेंटरों में किया जा सकता है। लेकिन अगर कोई डॉक्टर एआई की जांच रिपोर्ट पर हस्ताक्षर करता है तो क्या वह मशीन की रिपोर्ट के लिए जवाबदेह है।?' उन्होंने कहा, 'निश्चित रूप से गूगल जवाबदेह नहीं है क्योंकि उनके द्वारा भेजी जाने वाली हर रिपोर्ट में एक स्पष्टीकरण होता है।' 
 
माइक्रोसॉफ्ट भी डायबिटिक रेटिनोपैथी की जांच में एआई के इस्तेमाल पर काम कर रही है। कंपनी ने  भारत में आंखों के इलाज के उपकरण बनाने वाली फोरस हेल्थ के साथ साझेदारी की है और अपने एआई आधारित रेटिना तस्वीर सॉफ्टवेयर को इन मशीनों के साथ जोड़ा है। माइक्रोसॉफ्ट ने एक बयान में कहा, 'इससे फोरस के तकनीकीविदों को आंखों की अंतर की तस्वीरों का पता लगाने और बीमारी की स्थितियों को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलेगी।' इस चिकित्सा क्षेत्र में एआई की संभावना को देखते हुए डायबिटिक रेटिनोपैथी और अन्य चिकित्सा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल शुरू होने में लंबा वक्त नहीं लगेगा। 
Keyword: startup, company, google, eye,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या लेनदारों व नए खरीदारों के विवाद से जेट समाधान में होगी देरी
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.