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सिक्किम के चुनावी मैदान पर बाजी मारना भूटिया के लिए नहीं आसान

सियासी हलचल
आदिति फडणीस /  May 04, 2018

पिछले सप्ताह सिक्किम के मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग ने देश में सबसे ज्यादा समय तक मुख्यमंत्री बने रहने का रिकॉर्ड बना लिया। इस बीच दिग्गज फुटबॉल खिलाड़ी बाइचुंग भूटिया ने सिक्किम में एक नई राजनीतिक पार्टी बनाने की घोषणा की जो चामलिंग सरकार को चुनौती देगी। वैसे चामलिंग के लंबे राजनीतिक अनुभव और लोकप्रियता को देखते हुए उन्हें चुनौती देना मुश्किल काम है।  चामलिंग की तरह भूटिया भी नेपाली भाषी हैं। वह चामलिंग से ज्यादा युवा, ज्यादा ऊर्जावान हैं और राजनीति के क्षेत्र में नौसीखिए नहीं हैं। लेकिन उन्हें राजनीति के मैदान में ज्यादा सफलता नहीं मिली है। वह 2013 में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस से जुड़े थे। उन्होंने 2013 में दार्जिलिंग से लोकसभा चुनाव लड़ा लेकिन उन्हें भाजपा के एस एस आहलूवालिया के हाथों करीब 200,000 से अधिक वोटों से शिकस्त का सामना करना पड़ा। तब उनकी हार के लिए मैदानी क्षेत्र के गैर नेपाली मतदाताओं को जिम्मेदार माना गया जिन्होंने भाजपा को बढ़चढ़कर वोट दिया। वह 2016 में सिलिगुड़ी से विधानसभा चुनाव हार गए। इस बार उन्हें माकपा के अशोक भट्टïाचार्य के हाथों हार का सामना करना पड़ा। इस साल फरवरी में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस से इस्तीफा देने की घोषणा की। 

 
फुटबॉल के मैदान में झंडे गाडऩे वाले भूटिया क्या राजनीति के मैदान में सफल हो पाएंगे? सिक्किम में एक बात साफ है-पहचान की राजनीति सफल हो सकती है लेकिन एक सीमा तक। आपको काम करके दिखाने की जरूरत होती है। भूटिया ने हमरो सिक्किम के गठन की घोषणा करते हुए कहा कि राज्य ने भले ही अच्छा विकास किया है लेकिन वहां आत्महत्या की दर देश में सबसे ज्यादा है। इससे पता चलता है कि राज्य में रोजगार और अन्य सुविधाओं की कमी है।  लेकिन उनके आरोपों में दम नहीं है। सिक्किम के विकास के चमत्कार को समझने के लिए आपको यूएनडीपी द्वारा तैयार 2014 सिक्किम ह्यïूमन डेवलपमेंट रिपोर्ट को पढऩा होगा। इसमें कहा गया है कि 2001 से 2012 के बीच सिक्किम का शुद्घ सकल घरेलू उत्पाद सालाना 17 फीसदी की दर से बढ़ा जो देश में सर्वाधिक है। इस दौरान राष्टï्रीय औसत 10 फीसदी था। चामलिंग ने हाल में इंडिया टुडे पत्रिका को दिए साक्षात्कार में कहा, 'मैं नहीं चाहता हूं कि सिक्किम उपभोक्ता राज्य बने। हमारा विकास मॉडल मानव और प्राकृतिक संसाधनों के इस्तेमाल पर आधारित है। इसकी शुरुआत पर्यावरण पर्यटन से हुई और इसे स्थानीय संस्कृति के प्रसार के साथ जोड़ा गया। अगला कदम राज्य को जैविक बनाना था। शुरुआत में इस बात के लिए लोगों को मनाना, अधिकारियों को प्रोत्साहित करना और रासायनिक खाद के बजाय जैविक खाद का इस्तेमाल करना मुश्किल था। इससे न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था में तेजी आई बल्कि जीवन प्रत्याशा भी 10 साल बढ़ गई। कार्बन डाई ऑक्साइड के उत्सर्जन में कृषि का 50 फीसदी योगदान है। अगर हम रासायनिक खाद का इस्तेमाल बंद कर देंगे तो इससे कार्बन डाई ऑक्साइड का उत्सर्जन कम होगा। हमें अगले पांच साल में खाद्यान्न उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर बनने की उम्मीद है। पर्यावरण की कीमत पर कभी भी विकास नहीं हो सकता है। सिक्किम में कई बिजली परियोजनाएं हैं लेकिन इन बांधों के कारण केवल सात परिवार विस्थापित हुए हैं।' सिक्किम की प्रति व्यक्ति आय पूर्वाेत्तर राज्यों में सबसे ज्यादा है और देश में वह दिल्ली, गोवा, चंडीगढ़ और पुदुच्चेरी के बाद पांचवें स्थान पर है।  2018-19 के बजट में चामलिंग ने बुनियादी ढांचे के विकास पर जोर दिया है। बजट का अधिकांश हिस्सा सड़कों के उन्नयन के लिए रखा गया है। 
 
बेशक सिक्किम में पहचान की राजनीति भी काम आती है। सिक्किम के मूल निवासी लेप्चा हैं। लेकिन तीन दशक तक नेपाली भाषी भूटिया लोगों ने उन्हें दबाकर रखा। इस प्रक्रिया में लिंबू और तमांग जैसे दूसरे जनजातीय समुदायों को उनका अधिकार नहीं दिया गया। चामलिंग के मुताबिक चोग्याल (राजा) के खिलाफ विद्रोह असल में एक क्रांति थी जिसने दमनकारी शासन को उखाड़ दिया और सिक्किम के सैकड़ों युवाओं को जागरूक बना दिया। अलबत्ता सिक्किम के पहले दीवान जॉन लॉल, आईसीएस, ने इसकी अलग व्याख्या की है। सिक्किम की संप्रभुता और चीन की भावनाओं का सम्मान करने के बजाय भारत ने दार्जिलिंग और कलिमपोंग से नेपाली भाषी भीड़ को वहां भेजा, चोग्याल से कहा कि उनके लोगों ने उनके खिलाफ विद्रोह कर दिया है और सिक्किम पर कब्जा कर लिया। 
 
यह आप पर निर्भर करता है कि आप किसकी बातों पर यकीन करेंगे। लेकिन चोग्याल को गद्दी से हटाने के बाद नरबहादुर भंडारी मुख्यमंत्री बने। जब चामलिंग ने 1989 में दामथांग सीट पर 96.6 फीसदी वोट हासिल किए तो भंडारी ने उन्हें अपनी सरकार में मंत्री बना लिया। लेकिन चामलिंग की कुछ और महत्त्वाकांक्षाएं थीं। ढाई साल तक मंत्री रहने के बाद उन्होंने 1993 में भंडारी सरकार से इस्तीफा दे दिया और नई क्षेत्रीय पार्टी सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट (एसडीएफ) का गठन किया। 1994 में एसडीएफ ने 32 में से 19 सीटें हासिल कीं। वर्ष 1999 में उसे 25, 2004 में 31 और 2009 में सभी 32 सीटें जीती। 
 
चामलिंग ने यह उपलब्धि कैसे हासिल की? उन्होंने लिंबू और तमांग जनजातियों को आरक्षण देने की लड़ाई लड़ी और इसमें सफल रहे। सिक्किम में 20 फीसदी आबादी भूटिया-लेप्चा की और 40 फीसदी अन्य पिछड़ा वर्ग की है। ओबीसी में कारोबार करने वाली समृद्घ नेवार जाति भी शामिल है। लिंबू, राय और तमांग की आबादी 20 फीसदी है। जब उन्हें आरक्षण की सूची में शामिल किया गया तो वे चामलिंग के वोट बैंक बन गए। लेकिन चामलिंग के विपक्षी भी हार मानने वाले नहीं थे। 2014 में एसडीएफ को 32 में से 22 सीटें ही हासिल हुई। उसे कुछ सीटें सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा के हाथों गंवानी पड़ी। अब उनके सामने एक और चुनौती खड़ी हो गई है। सिक्किम में 2019 में होने वाले विधानसभा चुनाव दिलचस्प होने चाहिए। 
Keyword: sikkim, election,,
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