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नई संचार नीति में कंपनियों पर लगेगा कम शुल्क

किरण राठी / नई दिल्ली May 04, 2018

कर्ज के बोझ से दबे और संकटग्रस्त दूरसंचार क्षेत्र के लिए कुछ राहत की खबर है। सरकार स्पेक्ट्रम उपभोग शुल्क (एसयूसी) और अन्य शुल्क कम करने पर विचार कर रही है, जिससे कि समेकन का मौजूदा चरण खत्म होने के बाद यह क्षेत्र मजबूत बनकर उभर सके।  राष्ट्रीय संचार नीति के तहत दूरसंचार विभाग (डीओटी) ने साफ संकेत दिए हैं कि एसयूसी कम हो  सकते हैं और इनपुट टैक्स क्रेडिट की उपलब्धता के आधार पर अन्य शुल्कों की भी समीक्षा हो सकती है। अगले महीने नई राष्ट्रीय संचार नीति आने की संभावना है। दूरसंचार ऑपरेटरों को अपने समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) का 8 प्रतिशत लाइसेंस शुल्क के रूप में भुगतान करना होता है और एसयूसी 3 से 6 प्रतिशत के बीच होता है, जो कंपनी की एयरवेब्स की किस्म पर निर्भर होता है। संचार उद्योग लंबे समय से कर और शुल्क घटाने की मांग कर रहा है, जो कुल राजस्व का करीब 30 प्रतिशत होता है। दूरसंचार कंपनियों के वित्तीय संकट पर विचार करने के लिए पिछले साल अंतरमंत्रालयी समूह का गठन किया गया था। कुछ महीने पहले घोषित राहत के कदमों में समूह ने एसयूसी और लाइसेंस शुल्क को लेकर कोई छूट नहीं दी थी। 
 
इस उद्योग पर बकाया बढ़कर 4.5 लाख करोड़ रुपये हो गया है। संचार कंपनियों को यह भुगतान मुख्य रूप से स्पेक्ट्रम शुल्क और अन्य शुल्कों के रूप मेंं करना है।  दूरसंचार सचिव अरुणा सुंदरराजन ने कहा, 'हमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि एसयूसी तार्किक होना चाहिए, इसलिए इसमें प्रशासनिक शुल्क शामिल होगा। इससे बहुत साफ संकेत मिलते हैं कि हमें किस दिशा मेंं जाना है और क्या किया जाना है।' पुनरीक्षित एसयूसी और अन्य शुल्कों  को नई संचार नीति अधिसूचित किए जाने के तुरंत बाद लागू किया जाएगा। 
 
मसौदा संचार नीति, जिसे राष्ट्रीय डिजिटल संचार नीति 2018 नाम दिया गया है, में सरकार ने लेवी व लाइसेंस शुल्क सहित शुल्कोंं और युनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन फंड (यूएसओएफ) शुल्क की समीक्षा व इनपुट लाइन क्रेडिट के सिद्धांतों के तर्ज पर पास थ्रू राजस्व की अवधारणआ का प्रस्ताव किया है। इसमें एसयूसी को भी तार्किक करने का प्रस्ताव है, जिसमें स्पेक्ट्रम के नियमन और प्रशासन की लागत शामिल होगी। नीति के मसौदे में सभी के लिए अगले 4 साल में देश में सभी के लिए 50 एमबीपीएस स्पीड वाले ब्राडबैंड सुलभ बनाने तथा 5 जी मोबाइल तथा दूरसंचार क्षेत्र में 40 लाख नए रोजगारों का लक्ष्य रखा गया है। 
 
अन्य अहम नीतिगत पहल भविष्य में होने वाली नीलामी में स्पेक्ट्रम के सर्वोत्तम मूल्य को लेकर है, जिसका मतलब होगा कि आरक्षित मूल्य बहुत ज्यादा नहीं होगा, जो ऑपरेटरों को बिक्री में हिस्सेदारी लेने से रोके। सरकार का मानना है कि पिछली नीलामी में 62 प्रतिशत स्पेक्ट्रम की बिक्री नहीं हो सकी। आने वाले दिनों में पूरे स्पेक्ट्रम की बिक्री का लक्ष्य होगा।  सुंदरराजन ने कहा, 'पहला उद्देश्य यह देखना होगा कि सभी स्पेक्ट्रम की बिक्री हो। दूसरे हमने ऐसी स्थिति देखी कि 700 मेगाहट्र्ज बैंड के लिए डिवाइस इकोसिस्टम नहीं था और उसका कोई लिवाल नहीं था। ऐसी विसंगतियों को दूर करने की जरूरत होगी।' सरकार का मकसद है कि 2022 तक ब्रॉडबैंड की पहुंच मौजूदा 30 प्रतिशत से बढ़कर 100 प्रतिशत हो। इसके लिए बड़ी मात्रा में स्पेक्ट्रम की जरूरत होगी। इसके लिए स्पेक्ट्रम सहित इनपुट संसाधनों की लागत को तार्किक बनाना होगा, जिससे कि लक्ष्य हासिल किया जा सके। 
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