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एचडीएफसी म्युचुअल फंड का आईपीओ सेबी में अटका

बीएस संवाददाता / मुंबई May 04, 2018

परिसंपत्ति प्रबंधक की तरफ से नियामकीय उल्लंघन के चलते बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने एचडीएफसी म्युचुअल फंड के बहुप्रतीक्षित आरंभिक सार्वजनिक निर्गम पर रोक लगा दी है। सेबी की वेबसाइट पर अपलोड की गई आईपीओ की स्थिति पर कहा गया है कि पिछले उल्लंघन की जांच के लिए एचडीएफसी म्युचुअल फंड के आईपीओ को स्थगित रखा गया है। 26 अप्रैल को बाजार नियामक सेबी ने आईपीओ का प्रबंधन कर रहे निवेश बैंकों से स्पष्टीकरण के लिए पत्र भेजा था।
 
उद्योग के जानकारों ने कहा कि सेबी उस स्थिति में किसी आईपीओ को स्थगित रखता है जब उल्लंघन का मामला गंभीर प्रकृति का हो या ऐसा हो जिसके समाधान में वक्त लगता हो। एचडीएफसी एमएफ के अलावा श्रेय इक्विपमेंट फाइनैंस और विश्वराज शुगर इंडस्ट्रीज के आईपीओ को स्थगित रखा गया है, जिसे पिछले साल सेबी के पास जमा कराया गया था। एचडीएफसी एमएफ ने सेबी के पास 15 मार्च को पेशकश दस्तावेज जमा कराए थे। एक निवेश बैंकर ने कहा, अगर सबकुछ ठीकठाक रहता है तो किसी आईपीओ को मंजूरी देने में सेबी करीब छह हफ्ते का समय लेता है। अगर नियामकीय आधार पर आईपीओ पर रोक लगती है तो आईपीओ प्रक्रिया में मामले के निपटान होने तक की देरी हो सकती है।
 
सेबी ने उल्लंघन की प्रकृति सार्वजनिक नहीं की है। एचडीएफसी एमएफ की तरफ से सेबी के पास जमा कराए गए पेशकश दस्तावेज में प्रतिभूति उल्लंघन के लिए लंबित प्रक्रिया का जिक्र है। इसमें कहा गया है, हम (प्रवर्तक, निदेशक व समूह कंपनियां) सेबी की तरफ से शुरू की गई जांच में शामिल हैं, जो प्रतिभूति कानून के कथित उल्लंघन को लेकर है। फंड हाउस के खिलाफ विगत के गंभीर आरोपों में इसके इक्विटी डीलर नीलेश कपाडिय़ा की तरफ से फ्रंट रनिंग का मामला शामिल है। सेबी ने इस मामले में जुलाई 2014 और जनवरी 2016 में आदेश पारित किए थे।
 
24 जुलाई के आदेश में सेबी ने कपाडिय़ा व अन्य आरोपियों को प्रतिभूति बाजार में प्रवेश से 10 साल के लिए रोक लगा दी थी। जनवरी 2016 के अंतरिम आदेश में सेबी ने कपाडिय़ा व अन्य फ्रंट रनर्स की गई कथित अवैध कमाई को वापस करने का आदेश दिया था। सेबी ने हालांकि फंड हाउस, ट्रस्टी कंपनी या प्रबंध निदेशक को निर्देश जारी नहीं किए थे। 10 मार्च 2016 को एचडीएफसी एमएफ ने नवंबर 2001 व सितंबर 2007 के दौरान निवेशकों को हुए नुकसान की रकम जमा कराई थी, जो 7 करोड़ रुपये था और यह रकम सेबी ने तय की थी, जिसे एक अलग बैंक खाते में जमा कराया गया था। पेशकश दस्तावेज में यह जानकारी दी गई है। इसमें कहा गया है कि सेबी ने 20 मार्च 2014 के कारण बताओ नोटिस को छोड़ दिया था जब फंड हाउस ने नियामक के निर्देश के मुताबिक निवेशकों की भरपाई कर दी थी। इस बारे में जानकारी के लिए एचडीएफसी एमएफ को भेजे गए ईमेल का जवाब नहीं मिला। एचडीएफसी एमएफ मौजूदा तिमाही में 35 अरब रुपये का आईपीओ पेश करने की उम्मीद कर रहा था। लेकिन सूत्रोंं का कहना है कि यह अगले तिमाही तक टल सकती है।
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