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कानून-निर्माण में सुस्ती मगर सुधारवादी रुख बरकरार

दिल्ली डायरी
ए के भट्टाचार्य /  05 01, 2018

वित्त वर्ष 2017-18 समाप्त हुए एक महीना हो चुका है, लिहाजा निर्णय-निर्माण की दिशा में नरेंद्र मोदी सरकार के पिछले साल के प्रदर्शन का आकलन करने का यह माकूल वक्त है। पिछला वित्त वर्ष एक तरह से मोदी सरकार के कार्यकाल का चौथा साल रहा। अतीत के अनुभव से कहा जा सकता है कि किसी भी सरकार के पांचवें साल में चुनावी गहमागहमी तेज होने से अधिक ठोस पहल नहीं हो पाती है। मौजूदा वित्त वर्ष में निर्णय-निर्माण प्रक्रिया के सुस्त होने के अनुमानों के संदर्भ में पिछले वित्त वर्ष में उठाए गए मोदी सरकार के कदमों का आकलन करना रोचक होगा। वर्ष 2018-19 के दौरान कर्नाटक, मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में विधानसभा के चुनाव भी होने वाले हैं। और संभवत: मई 2019 में लोकसभा के आम चुनाव भी होंगे।

 
विधायी मोर्चे पर सरकारी प्रयासों के बारे में समुचित राय पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च के आंकड़ों के अध्ययन से बनाई जा सकती है। बजट में पेश विधेयकों को अलग रखकर देखें तो मोदी सरकार ने वर्ष 2017-18 के दौरान 25 कानूनों को संसद से पारित कराने में सफलता हासिल की। वैसे 2016-17 के दौरान संसद से पारित 34 कानूनों की तुलना में यह संख्या काफी कम लगती है। निश्चित रूप से पिछले वित्त वर्ष में लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही में पड़े व्यवधानों का कानून-निर्माण क्षमता पर प्रतिकूल असर पड़ा है।
 
हालांकि मोदी सरकार के पहले दो साल की तुलना में कानून-निर्माण की प्रक्रिया वर्ष 2016-17 में तेज रही थी। वित्त वर्ष 2014-15 और 2015-16 में केवल 24-24 कानून ही बनाए जा सके थे। लेकिन 2016-17 में सरकार को मिली गति 2017-18 में सुस्त पड़ती हुई नजर आने लगी। सरकार को इस बारे में आत्ममंथन करना चाहिए कि वह किस तरह से विपक्ष को अधिक रचनात्मक तरीके से अपने साथ मिलकर काम करने के लिए राजी कर सकती है ताकि 2016-17 की रफ्तार आगे भी कायम रहे। अगर जरूरत पड़े तो सरकार को अपने रुख में बदलाव भी करना चाहिए।
 
मोदी सरकार के कार्यकाल के पहले चार वर्षों में पारित कुल 107 कानूनों में से करीब आधे कानून वित्तीय, आधारभूत ढांचे और शिक्षा क्षेत्रों से संबंधित हैं। इससे शासन में प्राथमिकता वाले क्षेत्रों और सरकार की तवज्जो के बारे में सही अंदाजा लगाया जा सकता है। निश्चित रूप से इन कानूनों में बड़ी हिस्सेदारी वित्तीय क्षेत्र की है। मोदी सरकार ने पिछले चार वर्षों में वित्तीय मामलों से संबंधित 27 कानून बनाए हैं। इनमें दिवालिया समाधान, बीमा कंपनियों में अधिक विदेशी निवेश को मंजूरी और अघोषित आय के खुलासे जैसे कानून शामिल हैं।
 
सरकार ने ढांचागत क्षेत्रों से संबंधित जो 13 कानून बनाए वे कोयला, खनन, ऊर्जा, विमानन, जहाजरानी और दूरसंचार जैसे अहम क्षेत्रों से तालुल्क रखते हैं। इनमें से तीन कानून परिवहन क्षेत्र से भी संबंधित हैं।  भले ही पिछले वित्त वर्ष में सरकार अधिक कानून पारित करा पाने में सफल नहीं रही लेकिन उनमें से कुछ कानून सुधार के नजरिये से काफी अहम हैं। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को जुलाई 2017 में कार्यान्वित किया गया था जबकि उस समय ऐसी आशंका जताई जा रही थी कि इस कर-सुधार प्रणाली को एक बार फिर स्थगित किया जा सकता है। सरकार ने एयर इंडिया का निजीकरण करने का भी फैसला किया और इस सरकारी एयरलाइन में विदेश निवेश आकर्षित करने के लिए मानकों को शिथिल किया है। एयर इंडिया के निजीकरण की राह में आ रही बाधाओं के बावजूद सरकार चालू वित्त वर्ष में इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध दिख रही है।
 
वर्ष 2017-18 में सरकार ने रेल विकास प्राधिकरण बनाने का भी फैसला किया। यह प्राधिकरण ही यात्री किराये एवं मालभाड़े के बारे में फैसला करेगा। भारतीय रेलवे को मिलने वाले बजट सहयोग पर लाभांश का भुगतान करने की जिम्मेदारी से मुक्त करने का कदम भी बड़े सुधार वाला है। इसके अलावा सरकार ने भारतीय प्रबंध संस्थानों (आईआईएम) को अधिक स्वायत्तता देने के लिए भी कानून में बदलाव किया।  सरकार ने एक निश्चित अवधि के अनुबंध पर कर्मचारियों को काम पर रखने की इजाजत देने वाला कानून भी पारित कराया। इस प्रावधान से निर्माण क्षेत्र और मौसमी जरूरत वाले उद्योगों में नियुक्ति को पहले से ही तेजी मिली है। उद्योग जगत के लिए यह कानून एक बड़ी राहत लेकर आया है क्योंकि अभी तक यह पता नहीं है कि सभी श्रम कानूनों का सरलीकरण कर एक श्रम संहिता बनाए जाने के वादे का क्या होगा?
 
इसके विपरीत वित्त वर्ष 2016-17 को सरकार के नोटबंदी संबंधी गतिरोधक फैसले के लिए ही अधिक याद किया जाएगा। सरकार ने 8 नवंबर, 2016 को अचानक ही यह ऐलान कर दिया था कि चलन वाली मुद्रा के करीब 86 फीसदी नोट आधी रात के बाद वैध नहीं रह जाएंगे। वर्ष 2016-17 के चुनिंदा उल्लेखनीय सुधारवादी कदमों में रेल बजट को आम बजट में ही समाहित करना और फंसे हुए कर्ज की वसूली के लिए ऋणशोधन एवं दिवालिया संहिता को पारित करना था। सरकार ने छोटे शहरों को हवाई मार्ग से जोडऩे के लिए क्षेत्रीय हवाई संपर्क योजना की भी शुरुआत की थी।
 
इसकी संभावना बहुत कम है कि मौजूदा वित्त वर्ष में आर्थिक नीति के मोर्चे पर कोई बड़ा कदम उठाया जाएगा। इस साल सरकार की तरफ से लाए गए कुछ अध्यादेशों को कानूनी शक्ल देने के लिए ही कुछ विधेयक संसद के आगामी अधिवेशनों में पारित किए जा सकते हैं। इस सरकार के बाकी बचे 12 महीनों के कार्यकाल को लेकर केवल यही उम्मीद की जा सकती है कि पिछले साल लिए जा चुके फैसलों पर अमल किया जाए।
Keyword: narendra modi, BJP, law, policy,,
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