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जल्द निवेश शुरू करेगा उद्योग जगत: सीआईआई

इंदिवजल धस्माना /  04 29, 2018

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति के सख्त रुख के बीच भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के अध्यक्ष राकेश भारती मित्तल ने इंदिवजल धस्माना से कहा कि भारत उन देशों में शामिल है, जहां ब्याज दरें सर्वाधिक हैं। लेकिन उन्होंने कहा कि उद्योग जगत को लागत में कमी के लिए नई प्रौद्योगिकी अपनानी चाहिए। कुछ बैंकों के साथ धोखाधड़ी और कंपनियों के कामकाज से जुड़ी समस्याओं के बारे में उन्होंने कहा कि सीआईआई जल्द ही कारोबार के बारे में एक स्वैच्छिक नैतिक और पारदर्शी संहिता लेकर आएगा। मुख्य अंश:

 
आप ऐसे वक्त में सीआईआई अध्यक्ष की कुर्सी संभाल रहे हैं, जब मोदी सरकार अपने चार साल पूरे करने जा रही है। आप सरकार के प्रदर्शन को कैसे आंकते हैं?
 
सरकार ने अपनी कई योजनाओं को अच्छे ढंग से संचालित किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अधिकांश विचारों को मिशन की तरह क्रियान्वित किया गया है। स्वच्छ भारत अभियान, डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया, मेक इन इंडिया सभी नए कार्यक्रम हैं। मुझे लगता है कि मोदी और उनकी सरकार ने कुछ साहसिक तथा अच्छे फैसले लिए हैं।
 
आलोचकों का कहना है कि पर्याप्त संख्या में रोजगार के अवसर पैदा नहीं हो रहे हैं? क्या सही में ऐसा है?
 
इस पर मेरी अलग राय है। हम आमतौर पर संगठित क्षेत्र में पैदा हुई नौकरियों को ही देखते हैं। वर्ष 2016-17 में संगठित क्षेत्र ने करीब 57 लाख रोजगार पैदा किए। वर्ष 2017-18 में संगठित क्षेत्र में 15 लाख नौकरियों का नुकसान हुआ। लेकिन इसमें हम असंगठित क्षेत्र में पैदा हुई नौकरियों को शामिल नहीं करते हैं। मुद्रा योजना तीन साल पहले शुरू की गई थी। इसके तहत 12 करोड़ लोगों को कुल 3.5 लाख करोड़ रुपये ऋण दिया गया है। मुझे लगता है कि मुख्यत: बेरोजगार लोगों को ही ऋण दिया गया है। अगर उनमें से हरेक शख्स एक-एक व्यक्ति को रोजगार देता है तो 12 करोड़ रोजगार पैदा होंगे। विश्लेषकों ने इस आंकड़े पर ध्यान नहीं दिया है। 
 
नोटबंदी और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के कारण मुख्य रूप से असंगठित क्षेत्र प्रभावित रहा...
 
नोटबंदी और जीएसटी का असर 2016-17 और 2017-18 में रहा। असंगठित क्षेत्र में नुकसान हुआ और इसका पता नहीं चल पाया। अलबत्ता वैश्विक अर्थव्यवस्था अब पटरी पर लौट रही है और इस वर्ष इसके 3.9 फीसदी की दर से बढऩे का अनुमान है जबकि पिछले वर्ष यह दर 3.7 फीसदी थी। वर्ष 2008 की मंदी के बाद हम पहली बार विश्व अर्थव्यवस्था में इस तरह का विकास देख रहे हैं। इसमें भारत एक चमकता हुआ सितारा है। सीआईआई का अनुमान है कि मौजूदा वित्त वर्ष में भारत की विकास दर 7.3 से 7.7 फीसदी रहेगी, जो 2016-17 में 6.6 फीसदी थी। विकसित अर्थव्यवस्थाओं में संरक्षणवाद का जोखिम है, लेकिन घरेलू अर्थव्यवस्था में तेजी से इसे नजरंदाज किया जा सकता है। उद्योग जगत जल्द ही निवेश शुरू करेगा। पिछले 3-4 साल से 20 से 25 फीसदी क्षमता का इस्तेमाल नहीं हुआ है। 
 
मोदी सरकार सीआईआई से प्रतिक्रिया मांगती है। इसे आप किस तरह देखते हैं क्योंकि जब मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे तो उनमें और सीआईआई में मतभेद थे?
 
मुझे इसकी जानकारी नहीं है। सीआईआई सरकार का अच्छा साझेदार है। वह सरकार और उद्योग के बीच पुल का काम करता है। यह नीतिगत वकालत से इतर जाकर काम करता है। जीएसटी का ही उदाहरण लीजिए। सरकार ने हमसे संपर्क किया। हमने इस बारे में कारोबारियों को जागरूक करने के लिए देशभर में शिविर लगाए और सम्मेलन आयोजित किए। खासकर छोटे और मझोले उद्योगों के लिए ऐसा किया गया। निवेशकों के अधिकतर सम्मेलनों में सीआईआई साझेदार रहा है।
 
जीएसटी को लागू हुए नौ महीने से अधिक समय हो गया है। आप इसके अब तक के सफर को कैसे देखते हैं?
 
इसे बहुत पहले कर दिया जाना चाहिए था। लेकिन जब इसे लागू किया तो सीआईआई और उद्योग जगत ने इसका स्वागत किया। 
 
लेकिन अब भी कई चुनौतियां हैं...
 
जब भी आप कोई कानून लाते हैं तो शुरुआत में समस्याएं होती हैं। संभवत: स्वतंत्र भारत में इतने व्यापक स्तर का यह पहला कानून है। मुझे लगता है कि जीएसटी और नोटबंदी से जुड़े मुद्दे अब इतिहास बन चुके हैं। क्या भारत में जीएसटी की एक ही दर होगी? इसका उत्तर है नहीं? हमने सरकार को सिफारिश की है कि दरों की मौजूदा पांच श्रेणियों को तर्कसंगत बनाया जाए।
 
आखिर में आप कितनी श्रेणियों की कल्पना करते हैं?
 
शायद दो या तीन।
 
दरों के अलावा उद्योग को जीएसटी से जुड़े अन्य मुद्दों से भी जूझना पड़ रहा है?
 
हमें पेट्रोलियम, अल्कोहल, बिजली और रियल एस्टेट को जीएसटी के तहत लाना होगा। तभी कर समान रूप से लागू होंगे और उद्योग जगत प्रतिस्पद्र्घी बनेगा। 
 
ई-वे बिल के बारे में आपका क्या कहना है?
 
यह व्यवस्था अभी-अभी शुरू हुई है। अच्छी बात यह है कि ट्रकों को लंबी कतारों में खड़ा नहीं रहना पड़ेगा। मगर राज्य जरूरत से ज्यादा सक्रिय नहीं हों और उन्हें रोकने की कवायद शुरू नहीं करें।
 
बैंकों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उन्हें हल करने में सीआईआई की क्या भूमिका हो सकती है?
 
सरकार और नियामक को इरादतन चूक और कारोबार चक्रों के कारण चूक में अंतर करने की जरूरत है। इरादतन चूककर्ता के मामले कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। नैतिक और पारदर्शी तरीके से काम करना उद्योग जगत का कर्तव्य है। सीआईआई बड़े उद्योगों, छोटे उद्योगों और वित्तीय क्षेत्र के अनुपालन के लिए एक स्वैच्छिक संहिता बनाएगा। हमारे पास कंपनियों के कामकाज के बारे में एक स्वैच्छिक संहिता है।
 
अगर संहिता स्वैच्छिक होगी तो विजय माल्या और नीरव मोदी जैसे लोगों को धोखाधड़ी में संलिप्त होने से कैसे रोकेगी?
 
मैं यह तय करने के लिए यहां नहीं हूं कि चूक इरादतन है या नहीं। यह काम जांच एजेंसियों को करना है। मैं केवल इतना कह रहा हूं कि अगर इरादतन चूक है तो ऐसा करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
 
कंपनी प्रशासन के बारे में आपकी संहिता के बावजूद आईसीआईसीआई बैंक में कई गड़बडिय़ां सामने आई हैं....
 
मामले की जांच चल रही है। हमें इसका नतीजा देखने की जरूरत है। अभी तक किसी के खिलाफ अभियोग साबित नहीं हुआ है। 
 
सीआईआई नीतिगत दर में कटौती की मांग कर रहा है? अलबत्ता मौद्रिक नीति समिति का रुख इस बार सख्त हो गया है। आप आरबीआई को दरों में कटौती के लिए किस तरह मनाएंगे?
 
भारत उन देशों में शामिल है जहां कारोबार करना सबसे ज्यादा महंगा है। इसका एक कारण यह है कि देश में ब्याज दरें बहुत ज्यादा हैं। हमें यह देखना होगा कि आरबीआई इस मोर्चे पर क्या करता है। भारतीय उद्योगों को तकनीक पर निवेश करने और उत्पादन बढ़ाने की जरूरत है। मुझे इस बात का कोई कारण नजर नहीं आता कि हम इस मोर्चे पर प्रतिस्पद्र्घी क्यों नहीं बन सकते।
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