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कमाई से तिहाई ही हो कर्ज की ईएमआई

संजय कुमार सिंह /  04 29, 2018

इन दिनों खुद का कारोबार करने वाले लोग सहूलियत की वजह से हाउसिंग फाइनैंस कंपनियों से ऋण लेने को तरजीह दे रहे हैं, लेकिन ऐसे लोगों को दिए जा रहे ऋण तेजी से डूब भी रहे हैं। हालांकि खुद का कारोबार करने वाले लोगों को ऋणदाताओं की तरफ से दिए जा रहे आवास ऋण का फायदा उठाना चाहिए, लेकिन उन्हें यह सुनिश्चित करने के लिए सतर्कता बरतनी चाहिए कि वे अपनी क्षमता से ज्यादा कर्ज न लें और डिफॉल्ट न करें।

 
ज्यादा ऋण ज्यादा डिफॉल्ट 
 
क्रिसिल के मुताबिक हाउसिंग फाइनैंस कंपनियों द्वारा खुद का काम-धंधा करने वाले लोगों को दिए जाने वाले ऋणों का हिस्सा उनके पोर्टफोलियो में करीब 30 फीसदी पर पहुंच गया है, जो चार साल पहले 20 फीसदी था। ऐसे लोगों को ऋणों में पिछले चार साल के दौरान हर साल 33 फीसदी बढ़ोतरी हुई है, जबकि पूरे आवास ऋण खंड की वृद्धि 20 फीसदी रही है। लेकिन ज्यादा ऋणों से डिफॉल्ट भी बढ़े हैं। दो साल के दौरान अपना कारोबार करने वाले लोगों के खंड में फंसे कर्ज 1.8 फीसदी रहे हैं , जो वेतनभोगी खंड के स्तर से तिगुने हैं।
 
छोटी हाउसिंग फाइनैंस कंपनियों के कर्ज खराब रिकॉर्ड वालों को  यह उद्योग आवास ऋणों को प्रमुख खंड में वर्गीकृत करता है, जिसमें अच्छे ग्राहकों को 8.4 से 9 फीसदी की दर पर ऋण दिए जाते हैं। गैर-प्रमुख खंड में ऋण की दरें 10 से 15 फीसदी हैं। बहुत सी हाउसिंग फाइनैंस कंपनियां पिछले दो वर्षों में वजूद में आई हैं। उन्होंने मुख्य खंड में बैंकों और बड़ी हाउसिंग फाइनैंस कंपनियों से मिल रही कड़ी टक्कर के कारण गैर-प्रमुख खंड में जोर-शोर से ऋण  वितरित करने की रणनीति अपनाई है। इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनैंस के उप-प्रबंध निदेशक अश्विनी कुमार हुडा कहते हैं, 'नई हाउसिंग फाइनैंस कंपनियों की उधारी लागत अधिक है। इस वजह से वे उन ग्राहकों को ऋण देना चाहती हैं, जो ज्यादा ब्याज दर चुकाने को तैयार हैं। इस खंड में वे छोटे कारोबार या बड़े कारोबार शामिल हैं, जो पूरी तरह अपनी आमदनी की घोषणा नहीं करते हैं। लेकिन ऐसे कर्जदारों के डिफॉल्ट करने की दर भी अधिक है। इसी खंड से डिफॉल्ट के ज्यादातर मामले आ रहे हैं।'
 
स्व-रोजगार वालों को ऋण देने में जोखिम 
 
वेतनभोगी वर्ग के पास नियमित आमदनी का जरिया होता है। उसके पास कई दस्तावेज होते हैं। इन दस्तावेज में वेतन की पर्ची, फॉर्म 16, बैंक स्टेटमेंट आदि शामिल हैं। इन दस्तावेज की मदद से ऋणदाता उनकी वास्तविक आय का पता कर लेता है और यह अनुमान लगाने में सक्षम होता है कि कोई व्यक्ति कितनी ईएमआई चुका सकता है। बैंक इसी आधार पर उस व्यक्ति को दी जाने वाली ऋण की राशि का फैसला करता है। क्रिसिल रेटिंग्स के वरिष्ठ निदेशक कृष्णन सीतारामन कहते हैं, 'अपना कारोबार करने वाले व्यक्ति की हर महीने की आमदनी अलग-अलग होती है, जिससे ऋणदाताओं के लिए ऋण राशि और सही ईएमआई का आकलन करना मुश्किल हो जाता है।'
 
इसके अलावा अपना कारोबार करने वाले लोगों के खंड की आय पर कारोबारी चक्र का असर पड़ सकता है। लोगों को अपना के्रडिट स्कोर सुधारने में मदद करने वाली एक कंपनी क्रेडिट सुधार के सह-संस्थापक अरुण राममूर्ति कहते हैं, 'अगर कोई कंपनी मुश्किल दौर से गुजर रही है तो कर्मचारी दूसरी कंपनी में जा सकता है। अपना कारोबार करने वाले व्यक्ति के पास यह विकल्प नहीं होता है। वे केवल मंदी खत्म होने का इंतजार कर सकते हैं।' नोटबंदी और जीएसटी जैसी सरकार की पहलों से अपना कारोबार करने वाले लोग बुरी तरह प्रभावित हुए हैं, जिससे डिफॉल्ट में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। अपना कारोबार करने वाले व्यक्तियों को ऋण देने का जोखिम इसलिए भी बढ़ जाता है कि आम तौर पर लोग टैक्स रिटर्न भरते समय अपनी कम आमदनी कम दिखाते हैं। सीतारामन कहते हैं, 'अपना कारोबार करने वाले लोगों के खंड में हमेशा डिफॉल्ट का स्तर वेतनभोगी खंड से ज्यादा रहेगा। हाउसिंग फाइनैंस कंपनियां इसकी भरपाई ज्यादा ब्याज दर वसूलकर करती हैं।'
 
ऋणदाताओं के जोखिम कम करने के तरीके 
 
ऋणदाता अपना कारोबार करने वाले लोगों को कर्ज देते समय ज्यादा जांच-पड़ताल करते हैं। वे उन उद्यमों को ऋण देने को तरजीह देते हैं, जो कम से कम 10 साल पुराने हों  एवं पिछले 3-4 साल से मुनाफे में चल रहे होंं और जिनका राजस्व एवं लाभ लगातार बढ़ रहा हो। ऋणदाता कर्ज लेने वाले के हालिया टर्नओवर की थाह लेने के लिए उनके हाल के जीएसटी रिटर्न का भी ब्योरा देखते हैं। ऋणदाता कंपनी के आयकर रिटर्न और उसकी पिछले 3 से 4 वर्षों की बैलेंसशीट और लाभ-हानि का ब्योरा देखते हैं। वे ऋणी के कारोबार का पता लगाने के लिए उसके परिसरों का भी दौरा कर सकते हैं। ऋणदाता कर्ज लेने वाले के क्रेडिट स्कोर को भी देखते हैं। क्रिफ हाईमार्क में उपाध्यक्ष पारिजात गर्ग के अनुसार, '700 से अधिक संखया को अच्छा क्रेडिट स्कोर माना जाता है, लेकिन कुछ 650 स्कार वालों को भी होम लोन दे देते हैं।'
 
ऋणदाता कर्ज लेने वाले का क्रेडिट रिकॉर्ड भी देखते हैं, जो उसने ऋण लेकर और उन्हें समय पर चुकाकर बनाया होता है। वह एक बैंक ग्राहक भी होना चाहिए, जहां उसकी क्रेडिट लाइन चालू होनी चाहिए। हुडा कहते हैं, 'अगर उसे किसी बैंक से पिछले तीन वर्षों से नकद क्रेडिट सुविधा मिली हुई है तो यह सकारात्मक संकेत होता है। इस तरह की सुविधा का हर साल मूल्यांकन होता है और इसका नवीनीकरण केवल तभी होता है जब ग्राहक समय से कर्ज लौटाता है।' ऋणदाता हाल की ऋण पूछताछ को भी देखते हैं। अगर कोई व्यक्ति ज्यादातर असुरक्षित ऋण की तलाश कर रहा होता है तो इसे वित्तीय तंगी के एक संकेत के रूप  में लिया जाता है। अंत में, ऋणदाता स्व-रोजगार लोगों के खंड के लिए कीमत के मुकाबले ऋण (एलटीवी) का अनुपात कम रखते हैं। उनके मामले में यह 70 फीसदी से अधिक नहीं होता है, जबकि वेतनभोगी लोगों को 80 फीसदी तक ऋण मिल जाता है। 
 
क्षमता से ज्यादा कर्ज न लें 
 
अपना कारोबार करने वाले व्यक्ति को अपना रिटर्न भरते समय आमदनी कम नहीं दिखानी चाहिए। अपना कारोबार करने वाले लोग चार्टर्ड अकाउंटेंट की सेवाएं लेने के झंझट और ज्यादा अनुपालन के बोझ की वजह से रिटर्न भरने की जहमत नहीं उठाते हैं। इसका असर तब पड़ता है जब भविष्य में वे ऋण लेना चाहते हैं। हर साल समय से और ठीक से रिटर्न भरने के लिए अच्छे चार्टर्ड अकाउंटेंट की सेवाएं लें। इसके अलावा अपनी हैसियत से ज्यादा ऋण लेने से बचें। हैप्पीनेस फैक्टरी डॉट इन के संस्थापक अमर पंडित कहते हैं 'आम तौर पर लोग घर खरीदते समय अपने बजट से आगे निकल जाते हैं। आपकी सभी ईएमआई आपकी शुद्ध आमदनी के 35 फीसदी से अधिक होनी चाहिए। जिन लोगों की आमदनी बहुत अधिक है, वे इसे 50 फीसदी तक बढ़ा सकते हैं।' उनका सुझाव है कि लोगों को अपने लिए 9 से 12 महीने के खर्च के बराबर राशि का आपात कोष बनाना चाहिए।
 
अगर आप डिफॉल्ट के कगार पर हैं 
 
अगर कारोबार करने वाला कोई व्यक्ति अपनी ईएमआई चुकाने में असमर्थ होता है तो उसे अपने ऋणदाता से संपर्क करना चाहिए। गर्ग कहते हैं, 'ऋणदाता को अपनी मुश्किल के बारे बताएं। आमतौर पर ऋणदाता ईएमआई घटाकर और अवधि बढ़ाकर आपके ऋण को पुनर्गठित करने के लिए सहमत हो सकता है।' अगर आप कम राशि भी नहीं चुका सकते तो परिवार के किसी सदस्य या किसी स्रोत से ब्रिज लोन लें या शेयर या सोने जैसी संपत्तियां बेचें। पंडित के मुताबिक अंतिम विकल्प घर को ही बेचना है। वह कहते हैं, 'किसी भी कीमत पर अपने ऋण को डिफॉल्ट करने से बचें क्योंकि इससे आपका क्रेडिट स्कोर प्रभावित होगा और आपको भविष्य में ऋण बाजार से बाहर कर देगा।'
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