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बाजार पूंजीकरण के लिहाज से लोढ़ा ने डीएलएफ को पीछे छोड़ा

राघवेंद्र कामत / मुंबई 04 29, 2018

पिछले वित्त वर्ष के शुरुआती 9 महीनों में लोढ़ा का राजस्व 66 अरब रुपये रहा
इस दौरान डीएलएफ की आय रही 53.29 अरब रुपये
50 से 55 अरब रुपये का आईपीओ लाने की तैयारी में लोढ़ा

बिजनेस स्टैंडर्ड बाजार पूंजीकरण के लिहाज से लोढ़ा ने डीएलएफ को पीछे छोड़ालोढ़ा डेवलपर्स ने बाजार पूंजीकरण के लिहाज से देश की सबसे बड़ी रियल एस्टेट कंपनी डीएलएफ को राजस्व के मामले में पीछे छोड़ दिया है। पिछले वित्त वर्ष के शुरुआती 9 महीनों के दौरान लोढ़ा डेवलपर्स का राजस्व डीएलएफ से अधिक रहा। लोढ़ा डेवलपर्स ने दिसंबर 2017 तक पिछले वित्त वर्ष के शुरुआती 9 महीनों में 66 अरब रुपये का राजस्व अर्जित किया जबकि इस दौरान डीएलएफ की आय 53.29 अरब रुपये रही।

2016-17 की बात करें तो समान अवधि में लोढ़ा का राजस्व 55.72 करोड़ रुपये था जबकि डीएफ ने 59.96 अरब रुपये की आय हासिल की थी। लोढ़ा ने चौथी तिमाही में डीएलएफ के साथ अपने राजस्व अंतर को कम किया। चौथी तिमाही में लोढ़ा का राजस्व 79.26 अरब रुपये रहा, वहीं डीएलफ का राजस्व 82.21 अरब रुपये रहा।

लोढा ने आईपीओ लाने के लिए गुरुवार को भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के पास मसौदा प्रपत्र जमा कराया है। कंपनी के आईपीओ का आकार 50 से 55 अरब रुपये होने का अनुमान है। लोढ़ा आईपीओ के माध्यम से ताजा इक्विटी जारी कर 37.5 अरब रुपये जुटाने की संभावना तलाश रही है। आईपीओ में प्रवर्तक भी 13 से 18 अरब रुपये की अपनी हिस्सेदारी बेचेगी। सूत्रों के अनुसार आईपीओ निर्गम से लोढ़ा डेवलपरर्स का मूल्यांकन करीब 380 अरब रुपये हो सकता है। डीएलफ का मूल्यांकन 396 अरब रुपये है।

डीएलएफ के बाद लोढ़ा का आईपीओ देश में रियल एस्टेट का दूसरा सबसे बड़ा आईपीओ होगा। डीएलएफ ने 2007 में 92 अरब रुपये का आईपीओ लाया था। दिसंबर 2017 तक लोढ़ा के 37 परियोजनाओं पर काम चल रहा था, जिनमें 35 परियोजनाएं भारत में हैं और दो लंदन में हैं।

इन परियोजनाओं के तहत विकसित होने वाला क्षेत्र 3.38 करोड़ वर्ग फुट है। लोढ़ा ने भारत में भी 22 परियोजनाएं विकसित करने की योजना बनाई है, जो 6.421 करोड़ वर्ग फुट में होगा।

डीएलएफ की वेबसाइट के अनुसार 23.5 वर्ग फुट क्षेत्र में विकास की संभावना है जिनमें से 1.1 करोड़ वर्ग फुट परियोजना पर काम चल रहा है। इन परियोजनाओं से मिलने वाली रकम का एक बड़ा हिस्सा कर्ज चुकाने में खर्च किया जाएगा। कंपनी पर 31 जनवरी, 2018 तक 180 अरब रुपये का कर्ज था। दिसंबर 2017 में डीएलएफ पर 123.8 अरब रुपये का कर्ज था।

 

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