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पहली पेशकश के तरजीही बोलीदाता से हो बात: आर्सेलर

ईशिता आयान दत्त / कोलकाता April 27, 2018

आर्सेलरमित्तल ने कहा है कि पहली पेशकश के तरजीही बोलीदाता से बातचीत होनी चाहिए। कंपनी ने न्यूमेटल द्वारा लेनदारों को लिखे गए पत्र के संदर्भ में यह बात कही है। न्यूमेटल ने अपने पत्र में कहा है कि वह एस्सार स्टील के लिए आर्सेलरमित्तल के बराबर अथवा उससे बेहतर बोली लगाने के लिए तैयार है। हालांकि फिलहाल यह स्पष्टï नहीं है कि आर्सेलरमित्तल अपनी बोली में संशोधन करना चाहती है अथवा नहीं, लेकिन उसके लिए बातचीत की गुंजाइश हो सकती है। आर्सेलरमित्तल इंडिया ने अपने एक बयान में कहा है, 'आर्सेलरमित्तल ने एक दमदार, आकर्षक और योग्य बोली जमा कराई है। हमारा मानना है कि आगे की बातचीत के लिए पहली पेशकश के आधार पर तरजीही बोलीदाता का चयन होना चाहिए। निप्पॉन के साथ मिलकर हम ईएसआईएल (एस्सार स्टील इंडिया लिमिटेड) के लिए सबसे योग्य एवं विश्वसनीय उम्मीदवार हैं।'

 
आर्सेलरमित्तल ने न्यूमेटल के उस पत्र के जवाब में यह बयान जारी किया है जिसमें उसने लेनदारों से आर्सेलरमित्तल के बराबर अथवा उससे बेहतर पेशकश के लिए तैयार होने की बात कही थी। हालांकि उसकी बोली को वैध माना गया था क्योंकि लेनदारों ने आर्सेलरमित्तल द्वारा जमा कराई गई पेशकश पर गौर करने से इनकार कर दिया था। नैशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) के अहमदाबाद पीठ के आदेश के बाद मंगलवार को हुई लेनदारों की समिति (सीओसी) की बैठक में एस्सार स्टील के लिए आर्सेलरमित्तल और न्यूमेटल की पहली बोली को खोला गया। समझा जाता है कि आर्सेलरमित्तल की बोली 320 अरब रुपये की थी जबकि न्यूमेटल ने 180 अरब रुपये की बोली लगाई थी।
 
न्यूमेटल के पत्र में यह भी कहा गया है कि वह एस्सार के लिए एकमात्र योग्य उम्मीदवार है क्योंकि आर्सेलरमित्तल दो डिफॉल्टिंग कंपनियों- उत्तम गैल्वा और केएसएस पेट्रोन की प्रवर्तक है और  उस पर एनसीएलटी के पीठ का 30 दिन में बकाये का आदेश लागू नहीं होता है।  न्यूमेटल के मुताबिक यह प्रावधान उन बोलियों पर लागू होता है, जिन्हें आईबीसी को सौंपा गया था और जिनमें संशोधन हुआ है। न्यूमेटल की याचिका राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण में उन्हीं आधार पर स्वीकार की गई, जिन आधार  पर आर्सेलरमित्तल को एस्सार स्टील की बोली लगाने के लिए अयोग्य करार दिया गया है। 
Keyword: arcelor mittal steel, NCLT,,
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