बिजनेस स्टैंडर्ड - प्रचार पर चेहरा बदलेगी फेसबुक
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Monday, October 15, 2018 02:19 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम जिरह खबर

प्रचार पर चेहरा बदलेगी फेसबुक

अर्चिस मोहन और करण चौधरी / नई दिल्ली 04 27, 2018

मतदाताओं को प्रभावित करने के आरोपों में घिरी सोशल मीडिया कंपनी फेसबुक ने अपने प्लेटफॉर्म को राजनीतिक उद्देश्य के लिए इस्तेमाल होने से बचाने के कई उपाय किए हैं। फेसबुक अब अपने प्लेटफॉर्म पर सभी राजनीतिक दलों के विज्ञापनों पर किए गए खर्च का हिसाब किताब रखेगी। प्लेटफॉर्म पर पोस्ट होने वाली हर सामग्री की भी गहराई से छानबीन की जाएगी ताकि मतदाताओं को प्रभावित न किया जा सके। फेसबुक के मालिक मार्क जकरबर्ग की करीब पांच घंटे तक अमेरिकी कांग्रेस में सुनवाई हुई थी। इससे मिली सीख को अपनाते हुए फेसबुक ने ये कदम उठाए हैं। इस साल कर्नाटक, मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में विधान सभा चुनाव होने हैं जबकि अगले वर्ष लोक सभा चुनाव होंगे। चुनावों को प्रभावित करने के आरोपों के मद्देनजर फेसबुक को केंद्र सरकार की नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है। फे सबुक ने स्पष्टï किया है कि राजनीति और राजनीतिक दलों के बारे में विचारों की बारीकी से जांच की जाएगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई समाचार या पोस्ट चुनावों को प्रभावित न करे।
 
प्रत्येक राजनीतिक दल द्वारा विज्ञापन पर किए गए खर्च पर भी नजर रखी जाएगी ताकि सरकार या कोई एजेंसी यह आरोप न लगा सके कि कंपनी ने विज्ञापनों से अपना राजस्व बढ़ाने के लिए चुनावों को प्रभावित किया है। यह कंपनी की विज्ञापन पारदर्शिता पहल का हिस्सा है। कंपनी के एक करीबी सूत्र ने कहा कि संभव है कि सभी विज्ञापन राजनीतिक दल द्वारा नहीं दिए जाएंगे क्योंकि कुछ उनके समर्थकों द्वारा भी पोस्ट किए जाएंगे। लेकिन इससे फेसबुक को यह पता लग जाएगा कि हर राजनीतिक दल ने उसके प्लेटफॉर्म पर प्रचार के लिए कितना पैसा खर्च किया। कंपनी यह सुनिश्चित करना चाहती है कि कोई भी मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए उसके प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल न करे। 
 
आम आदमी पार्टी के सोशल मीडिया रणनीतिकार अंकित लाल ने इस कदम का स्वागत किया है। उन्होंने कहा, 'राजनीतिक उद्देश्यों के लिए सोशल मीडिया पर प्रचार की पारदर्शी फंडिंग सभी को बराबर मौका देने के लिए बहुत अहम कदम है।' कंपनी ने भारत में कन्नड़, तमिल, बांग्ला, हिंदी, गुजराती और कई अन्य क्षेत्रीय भाषाओं के जानकारों को भी नियुक्त किया है जो इन भाषाओं में पोस्ट होने वाली सामग्री पर नजर रखेंगे। सूत्र ने कहा, 'पहले लोग क्षेत्रीय भाषाओं में पोस्ट करके बच जाते थे लेकिन अब कंपनी क्षेत्रीय भाषाओं के जानकारों की सेवा ले रही है ताकि किसी तरह की आपत्तिजनक पोस्ट से बचा जा सके।' साथ ही फेसबुक पर पोस्ट किए गए राजनीतिक विज्ञापनों की भी जांच होगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसी राजनीतिक दल की छवि धूमिल न हो या फिर किसी जाति, समुदाय या नस्ल के लोगों को निशाना न बनाया जा सके।
 
देश में अगले साल होने वाले आम चुनावों के मद्देनजर फेसबुक ने कहा कि कंपनी यह सुनिश्चित करने के लिए अपने स्तर पर और तीसरे पक्ष के साथ मिलकर काम कर रही है कि कोई भी गलत सूचना उसके प्लेटफॉर्म पर न आए। कंपनी की ग्लोबल प्रोडक्ट मैनेजमेंट की उपाध्यक्ष मोनिका बिकर्ट ने हाल में कहा, 'हम इसे गंभीरता से लेते हैं। कंपनी चुनावों की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए प्रयास कर रही है। हम दुष्प्रचार और गलत प्रचार से निपट रहे हैं। यह हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। हम अपने टूल्स का वैश्वीकरण कर रहे हैं जो चुनाव के संदर्भ में बहुत अहम है। हम तीसरे पक्ष द्वारा तथ्यों की जांच पर निर्भर हैं और हमने भारत में भी ऐसी एक सेवा शुरू की है।'
 
कर्नाटक चुनावों के मद्देनजर फेसबुक तथ्यों की जांच के लिए प्रयोग के तौर पर एक तीसरे पक्ष के साथ काम कर रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल चुनावों को प्रभावित करने के लिए न हो। कंपनी ने अपनी वेबसाइट पर कहा, 'अपने प्लेटफॉर्म पर गलत खबरों के खिलाफ जंग के उद्देश्य से हमने एक स्वतंत्र डिजिटल पत्रकारिता पहल बूम के साथ हाथ मिलाया है। यह एक प्रायोगिक कार्यक्रम है जो सबसे पहले कर्नाटक में शुरू किया जाएगा।' अगर तथ्यों की जांच करने वाला पक्ष किसी पोस्ट को गलत करार देगा तो फेसबुक न्यूज फीड में उसे नीचे दिखाएगा जिससे इसके प्रसार में उल्लेखनीय कमी आएगी। इससे अफवाहों का फैलना बंद होगा और कम से कम लोग इसे देख पाएंगे।
 
फेसबुक ने मंगलवार को पहली बार उन दिशानिर्देशों को सार्वजनिक किया जिनके आधार पर उसके मॉडरेटर किसी पोस्ट या समाचार को हटाते हैं। इनमें कई तरह की आशंकाएं शामिल हैं जैसे हिंसा, स्पैम, उत्पीडऩ, खुद को नुकसान पहुंचाने, आतंकवाद, बौद्घिक संपदा की चोरी और नफरत फैलाने वाले भाषण।
Keyword: facebook, BJP, congress, data, leak, election,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या मुनाफाखोरी-रोधी मामले में स्पष्ट नियम लाए सरकार?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.