बिजनेस स्टैंडर्ड - लंबे चक्र के बाद भविष्य की राह!
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Sunday, July 22, 2018 08:49 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

लंबे चक्र के बाद भविष्य की राह!

आकाश प्रकाश /  04 26, 2018

अगर कोई व्यक्ति अगली मंदी और उसके संभावित समय को लेकर सही राय बना सकता है तो वह अपने पोर्टफोलियो को भी उसके मुताबिक तैयार कर सकता है। इस संबंध में विस्तार से बता रहे हैं आकाश प्रकाश

 
अमेरिका में कारोबारी विस्तार के रुख के नौ वर्ष पूरे होने वाले हैं। आधिकारिक तौर पर यह दूसरा सबसे बड़ा विस्तार है और ऐसा लगता है कि अभी यह जारी रहेगा। मौजूदा चक्र जून 2009 में शुरू हुआ और अप्रैल 2018 में यह आर्थिक विस्तार के लगातार 106 महीने पूरे कर लेगा।  यह फरवरी 1961 से दिसंबर 1969 के बाद कारेाबारी विस्तार का दूसरा सबसे बड़ा चक्र है। मई में यह अवधि के मामले में दूसरे स्थान पर पहुंच जाएगा और मार्च 1991 से मार्च 2001 की 10 वर्षीय कारोबारी विस्तार की अवधि ही इससे आगे रह जाएगी। 
 
यह बहुत अहम है क्योंकि अब इस चक्र में परिपक्वता आ रही है। हम निरंतर विस्तार की अवस्था में नहीं रह सकते। मंदी के चलते कारोबारी आय में भारी गिरावट आती है, जीडीपी की वृद्घि नकारात्मक हो जाती है और शेयर बाजार में मंदडि़ए हावी रहते हैं।  अमेरिका में मौजूदा आर्थिक विस्तार को देखें तो यह कितने लंबे समय तक जारी रह सकता है और हमारे यहां मंदी कब आएगी यह जानना बहुत महत्त्वपूर्ण है और इसी के आधार पर बाजार को लेकर कोई दृष्टिïकोण बनाया जा  सकता है। पहले एक नजर इतिहास पर डालते हैं। डॉयचे बैंक के मुताबिक सन 1854 से एकत्रित आंकड़ों पर नजर डाले तो अमेरिका में आर्थिक विस्तार की औसत अवधि 41 माह रही है। जबकि इसकी मध्यम अवधि 32 माह है। बहरहाल सन 1961 से औसत लंबाई बढ़कर 75 महीने हो गई। जबकि सन 1981 से इनकी अवधि बढ़कर 98 महीने हो गई। कई टीकाकारों ने इसके लिए बढ़ती आर्थिक स्थिरता और लंबे कारोबारी चक्र को वजह बताया।
 
एक स्पष्टीकरण फेडरल रिजर्व का बेहतर आर्थिक प्रबंधन भी है। इसने आर्थिक चक्र को पूरी भूमिका निभाने का अवसर दिया और विस्तार को सीमित नहीं किया। दूसरी बात, हमने देखा कि मुद्रास्फीति में निरंतर और ढांचागत ढंग से गिरावट आई है। इस गिरावट में श्रम शक्ति की अपर्याप्तता का भी योगदान रहा क्योंकि चीन वैश्विक आपूर्ति शृंखला में दाखिल हुआ और पश्चिम में भी श्रम शक्ति की जननांकीय शृंखला मजबूत रही। इस शिथिलता ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था को तेज गति से विकसित होने का अवसर दिया। वेतन भत्तों का कोई दबाव न होने के कारण यह अपेक्षाकृत लंबी अवधि तक चला। वेतन भत्तों पर सीमित दबाव के चलते मुद्रास्फीति सीमित रही। मुद्रास्फीति के निरंतर कम रहने के चलते फेडरल रिजर्व के आकलन का आधार ब्याज दर वृद्घि रही और अर्थव्यवस्था अबाध ढंग से विकसित होती रही।
 
सन 1980 के दशक के आरंभ से ही इस बढ़े हुए विस्तार की अवधि में कर्ज में बढ़ोतरी देखने को मिली है। यह बढ़ोतरी आम घरेलू, कारोबारी और सरकारी स्तरों पर है। कर्ज में निरंतर बढ़ोतरी होने से यह भी तय हुआ कि आर्थिक गतिविधि पहले की तुलना में ऊंची भी थी और कम अस्थिर भी। बढ़े हुए कर्ज से व्यय आय पर भारी पडऩे लगा। डॉयचे बैंक का कहना है कि अतिरिक्त विस्तार की इन दोनों वजहों में अब बदलाव आ रहा है। मुद्रास्फीति और ब्याज दर दोनों एकदम निचले पायदान पर हैं जहां से उनका और नीचे जाना मुश्किल है। कर्ज की बात करें तो लगता नहीं है कि इस बढ़े हुए कर्ज के स्तर से आगे और अधिक इजाफा जारी रहेगा। 
 
अगर यह कारण और प्रभाव की सही व्याख्या है तो शायद हम इस लंबाई के आखिरी कारोबारी चक्र के गवाह हैं। क्या यह पिछले 100 महीनों का आखिरी चक्र हो सकता है? जाहिर सी बात है केवल समय ही बताएगा लेकिन इस बारे में सोचना जरूरी है। निवेशक लंबे और मुनाफेवाले कारोबारी विस्तार के अभ्यस्त हो गए हैं। उन्हें अपना रुख बदलना होगा।  डॉयचे बैंक का पर्चा अगली मंदी के समय के आकलन के बारे में  भी बात करता है। जैसा कि कहा गया है। यह एक अहम बात है क्योंकि मंदी शेयर बाजार में भी मंदी लाती है। अगर अगली मंदी का अंदाजा हो तो पोर्टफोलियो को सही तरीके से तैयार करने में मदद मिलती है।
 
इसके तीन तरीके हैं। पहला, अमेरिका में बेरोजगारी दर के न बढऩे का आकलन। इस मानक पर देखें तो बेरोजगारी दर के बेरोजगारी के मुद्रास्फीति अप्रभावित दर से नीचे जाने में 36 महीने का समय लगता है तब मंदी आती है। यानी अमेरिका में सितंबर 2019 तक मंदी आ सकती है। दूसरा तरीका है फेडरल रिजर्व के ब्याज दर चक्र का अध्ययन। इस समय हम ब्याज दर में बढ़ोतरी के चक्र में हैं। इसकी शुरुआत दिसंबर 2016 में हुई थी। अतीत में बढ़ोतरी के चक्र के करीब 41 महीने बाद मंदी आती रही है जबकि इसकी माध्य अवधि 33 माह है। इस दृष्टि से भी अमेरिका में सितंबर 2019 से मई 2020 के बीच मंदी आ सकती है।
 
तीसरा रुख है यील्ड कर्व के क्रम में बदलाव का प्रयोग। जब कभी दो वर्ष से 10 वर्ष के बीच यील्ड कर्व का क्रम पलटता है तो इसे मंदी का स्पष्ट संकेतक माना जाता है। औसतन ऐसा होने के 15 माह बाद मंदी आती है। फिलहाल हम यील्ड कर्व के क्रम में बदलाव से 50 आधार अंक दूर हैं। अगर फेड अपेक्षाओं के अनुरूप इजाफा करता है तो यह अंतर तेजी से भरेगा। इससे भी संकेत मिलता है कि 2019 तक मंदी आ सकती है। किसी को नहीं पता कि क्या होगा। संभव है कि मुद्रास्फीति सहज बनी रहे और यह कारोबारी विस्तार भी जारी रहे। हो सकता है बिना मुद्रास्फीति के मजबूत वृद्धि और बढिय़ा मुनाफे का सिलसिला जारी रहे। बहरहाल, कभी न कभी तो यह सिलसिला थमेगा। अगर हम यह मान कर चलें कि 2019 के मध्य तक अमेरिका में मंदी आएगी तो हमें इस वर्ष के अंत से ही बाजार की चिंता शुरू करनी होगी। इसके अलावा तेजी के बाजार के आखिरी दौर में निवेश करना मुश्किल होगा। 
 
यह काफी चुनौतीपूर्ण समय है। बहरहाल, यह मानना होगा कि हम इस चक्र के आखिरी दौर में हैं और इससे निपटने की तैयारी के लिए हमारे पास उतना वक्त नहीं है। अगले नौ महीनों में कभी न कभी हमें जोखिम उठाना होगा। कम से कम अमेरिकी शेयरों के लिहाज से तो यह तय है। भारत या अन्य उभरते बाजार अमेरिकी शेयरों में कमजोरी के बावजूद अच्छा प्रदर्शन कर पाएंगे या नहीं यह एक सवाल है जिस पर हम भविष्य में बात करेंगे।
Keyword: india, economy, america,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या ट्रांसपोर्टरों का हड़ताल पर जाना है वाजिब?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.