बिजनेस स्टैंडर्ड - फ्लिपकार्ट को कर पंचाट से मिली राहत
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फ्लिपकार्ट को कर पंचाट से मिली राहत

इंदिवजल धस्माना / नई दिल्ली 04 25, 2018

पंचाट ने छूट, विज्ञापन और मार्केटिंग खर्च को राजस्व व्यय बताया
इससे कंपनी को कर देनदारी में मिली राहत
अन्य ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए भी यह फैसला बनेगा नजी

बिजनेस स्टैंडर्ड फ्लिपकार्ट को कर पंचाट से मिली राहतआयकर अपीलीय पंचाट से ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट इंडिया को बड़ी राहत मिली है। पंचाट ने कंपनी की ओर से ग्राहकों को दी गई छूट के साथ ही साथ विज्ञापन एवं मार्केटिंग पर किए गए खर्च पर कर छूट लेने की अनुमति दी है। इस आदेश का अन्य कारोबार पर भी परोक्ष प्रभाव पड़ेगा।  आयकर अपीलीय पंचाट, बेंगलूरु ने बुधवार को फ्लिपकार्ट के पक्ष में फैसला सुनाया है।

फ्लिपकार्ट ने आयकर अधिकारियों के उस आदेश के खिलाफ पंचाट में अपील की थी जिसमें कर विभाग ने कंपनी से ग्राहकों को दी गई छूट एवं विज्ञापन तथा मार्केटिंग पर खर्च के 110 अरब रुपये को 2015-16 के आकलन वर्ष में शामिल करने को कहा था।

मुद्दा असल में यह था कि ऐसे खर्च को पूंजीगत व्यय माना जाय या राजस्व व्यय। अगर इसे राजस्व व्यय माना जाता है तो इस मद में किए गए खर्च को कर देनदारी से पहले आय से घटाया जा सकता है। दूसरी ओर अगर इसे पूंजीगत व्यय माना जाता है तो व्यय को चार से दस साल तक बांट कर केवल एक हिस्से को कर देनदारी से पहले राजस्व में से घटाया जा सकता है।

अधिकारियों का कहना था कि फ्लिपकार्ट के ब्रांड की खातिर भारी छूट दी गई इसलिए इसे पूंजीगत व्यय माना जाएगा। इसी तरह आयकर विभाग ने फ्लिपकार्ट की ओर से रिटर्न में जो घाटा दिखाया था उसमें 10 अरब रुपये जोड़ दिए थे। इससे फ्लिपकार्ट मुनाफे में आ गई और उस पर 30 फीसदी की दर से कॉरपोरेट कर की देनदारी बनती है।

कर रिटर्न में फ्लिपकार्ट ने दावा किया है कि अपने उत्पादों को बेचने तथा बाजार हिस्सेदारी बनाए रखने के लिए सालाना आधार पर इस तरह का खर्च किया गया, ऐसे में पूरी रकम पर कर कटौती मिलनी चाहिए। कर पंचाट ने फ्लिपकार्ट के दावे को स्वीकार किया और ऐसे व्यय को कर कटौती योग्य राजस्व व्यय करार दिया तथा आयकर विभाग की पहल को खारिज कर दिया।

नांगिया ऐेंड कंपनी एलएलपी के मैनेजिंग पार्टनर राकेश नांगिया ने कहा कि उत्पाद पर छूट, विज्ञापन तथा मार्केटिंग व्यय के लिहाज से यह आदेश काफी महत्त्वपूर्ण है क्योंकि ई-कॉमर्स कंपनी के खर्च में इसकी बड़ी हिस्सेदारी होती है। उन्होंने कहा, 'यह ई-कॉमर्स अपरिहार्य कारोबारी मॉडल है। इस तरह के मामले में यह कर पंचाट का पहला फैसला है, जिससे निश्चित तौर पर देश की अन्य ई-कॉमर्स कंपनियों को राहत मिलेगी।'

इससे पहले फ्लिपकार्ट को आयकर विभाग के खिलाफ इस मामले में राहत नहीं मिली थी। आयकर विभाग की बेंगलूरु इकाई ने फ्लिपकार्ट को मार्केटिंग खर्च को पूंजीगत व्यय के तौर पर वर्गीकृत करने को कहा था। इसके खिलाफ कंपनी ने पिछले साल अगस्त में आयकर अपीलीय आयुक्त के पास याचिका दायर की थी। लेकिन उसे राहत नहीं मिली थी। हालांकि आयकर अपीलीय पंचाट ने आयकर अपीलीय आयुक्त के आदेश को दरकिनार कर दिया।

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