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चीन की मुद्रा रेनमिनबी का अंतरराष्ट्रीयकरण

श्याम सरन /  April 20, 2018

चीन की मुद्रा युआन अथवा रेनमिनबी के अंतरराष्टरीयकरण पर नजर रखी जाए तो यह भूराजनैतिक श्रेष्ठता हासिल करने की उसकी नीति के बारे में काफी अहम जानकारी देता है। इससे पहले एक आलेख में मैं यह कह चुका हूं कि वर्ष 2015 और 2016 के आरंभ में शेयर बाजार में अस्थिरता और पूंजी के बड़े पैमाने पर बाहर जाने से आए गतिरोध के बावजूद रेनमिनबी को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बनाने के कई चरणबद्घ प्रयास बरकरार रहे। चीन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश है और उसने अपने आर्थिक कद का पूरा लाभ लेने का प्रयास किया। वह वैश्विक वित्तीय बाजारों में अपनी हैसियत मजबूत करने के साथ पश्चिमी नेतृत्व वाले संस्थानों और प्रक्रियाओं को चुनौती देने का इरादा रखता रहा है। 

हाल की एक अहम घटना है 222 चीन ए शेयरों का मॉर्गन स्टैनली कैपिटल इंटरनैशनल (एमएससीआई) नामक उभरते बाजारों के सूचकांक में समावेशन। यह जून 2017 में हुआ लेकिन इस वर्ष जून से प्रभावी होगा। हालांकि शुरुआती दौर में चीन के शेयरों को सूचकांक में 0.72 फीसदी की मामूली वरीयता दी जाएगी। शायद इसमें धीरे-धीरे इजाफा हो क्योंकि चीन के पूंजी बाजार में खुलापन जारी रहेगा और वहां अधिक पारदर्शी नियामकीय और कानूनी ढांचा सामने आएगा। माना जा रहा है कि इससे चीन की परिसंपत्तियों में 12.5 अरब डॉलर की आवक होगी। चीन के शेयर सूचकांक में 18 फीसदी तक के हिस्सेदार बन सकते हैं। इसका अर्थ यह होगा कि वैश्विक फंड जो अपना आवंटन एमएससीआई पर आधारित करते हैं वे चीन की प्रतिभूतियों के प्रति अपना रुख खोलेंगे। एक अनुमान के मुताबिक 15 खरब डॉलर की भारी भरकम राशि इन फंड के माध्यम से चीन के बाजार में आएगी। माना जा रहा है कि इससे वैश्विक वित्तीय बाजार और उसके स्वरूप में आमूलचूल बदलाव आएगा। इससे भारत जैसे उभरते बाजारों में फंड की आवक पर असर पड़ेगा। ऐसे में स्थिति से निपटने की तैयारी रखना ही बुद्घिमानी होगी।


चीन के प्रतिभूति बाजार में अंतरराष्ट्रीय पहुंच का उदारीकरण विभिन्न पोर्टफोलियो निवेश योजनाओं के कोटा के चलते जारी रहेगा। बहरहाल, इस संबंध में हॉन्गकॉन्ग-शांघाई और हॉन्गकॉन्ग शेनझेन कनेक्ट योजनाएं कहीं अधिक महत्त्वपूर्ण हैं क्योंकि वे शेयर बाजार में पारस्परिक पहुंच मुहैया कराती हैं। हॉन्गकॉन्ग-शांघाई कनेक्ट का रोज का कोटा 10 अरब युआन है जबकि हॉन्गकॉन्ग शेनझेन में यह 12 युआन रोज है। शेयरों की होल्डिंग की अवधि को भी 12 महीने से घटाकर तीन महीने कर दिया गया है। 

एक बड़ा, नकदी वाला और स्थिर अंतरराष्टï्रीय बॉन्ड बाजार रेनमिनबी की अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बनने की आकांक्षा की अनिवार्य शर्त है। इस लिहाज से देखा जाए तो यह ध्यान देना होगा कि चीन के बॉन्ड बाजार की बढ़ती महत्ता तो है। यह दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा बॉन्ड बाजार है लेकिन केवल 2.4 फीसदी पर ही बाहरी संस्थानों का नियंत्रण है। चीन में अंतर बैंक बॉन्ड बाजार को विदेशी संस्थानों और हेजिंग के लिए खोल दिया गया है। हालांकि इनका नियमन सावधानीपूर्वक किया जा रहा है और अब इन्हें जोखिम प्रबंधन की इजाजत दी जाएगी। चीन ने मई 2017 में बॉन्ड कनेक्ट प्रणाली भी विकसित की जो हॉन्गकॉन्ग से चीन के बॉन्ड बाजार तक सीधी पहुंच सुनिश्चित करेगा। इस काम के लिए चीन में बैंक खाते खोलने की जरूरत नहीं रह जाएगी। जानकारी के मुताबिक लंदन के साथ भी ऐसा ही बॉन्ड कनेक्ट किया जा सकता है। 

चीन अभी भी वित्तीय उदारीकरण की विभिन्न नीतियों के साथ प्रयोग कर रहा है। उसने एक प्रारंभिक तौर पर वित्तीय मुक्त व्यापार क्षेत्र (एफटीजेड) की स्थापना सन 2013 में शांघाई में की थी। 2015 में थ्यानचिन, फुचियान और ग्वांगतोंग में तीन और एफटीजेड बनाए गए। इन क्षेत्रों में पंजीकृत संस्थानों को मुद्रा के पूर्ण परिवर्तनीय होने का लाभ मिलता है। नकारात्मक सूची की व्यवस्था कारोबारों को न्यूनतम लालफीताशाही के साथ गैर प्रतिबंधित क्षेत्र विकसित करने की सुविधा देती है। अप्रैल 2017 में 7 नए एफटीजेड घोषित किए गए। इनमें से 5 देश के अंदरूनी इलाके में हैं। ये महत्त्वाकांक्षी एक क्षेत्र, एक मार्ग पहल से जुड़े हैं। यह परियोजना अंदरूनी प्रांतों को पड़ोसी मध्य एशियाई मुल्कों के साथ एक आर्थिक कॉरिडोर में जोड़ेगी। उदाहरण के लिए चेंगदू, सिचुआन में प्रस्तावित एफटीजेड बीआरआई के लॉजिस्टिक्स और कार्गो हब के रूप में काम करेगा जहां बड़े गोदाम और संबद्घ वित्तीय, बैंकिंग और बीमा आदि की सुविधा रहेगी। 

रेनमिनबी को अंतरराष्टï्रीय मुद्रा के रूप में बढ़ावा देना भी एक क्षेत्र, एक मार्ग की पहल का अहम घटक है। चीन सरकार की रिपोर्ट बताती है कि यह नीति और रेनमिनबी का अंतरराष्टï्रीयकरण चीन की दो प्रमुख राष्टï्रीय विकास नीतियों का हिस्सा है और इन्हें पारस्परिकता के आधार पर बल दिया जा रहा है। हालिया अतीत में चीन के इलेक्ट्रॉनिक भुगतान और मोबाइल भुगतान में बहुत तेजी आई है। इससे भी रेनमिनबी के अंतरराष्ट्रीयकरण को मंच मिलेगा। अभी वैश्विक भुगतान बाजार में चीन की हिस्सेदारी 37 फीसदी यानी करीब 210.60 खरब डॉलर है। चीन का यूनियन पे क्रेडिट कार्ड दुनिया का सबसे बड़ा बैंक कार्ड समूह है और 160 देशों के 4.1 करोड़ कारोबारी इसे स्वीकार करते हैं। हालांकि इसके अंतरराष्टï्रीय ग्राहक केवल 0.5 फीसदी हैं। चीन में मोबाइल भुगतान बाजार में अलीबाबा और वीचैट शीर्ष पर हैं। अलीबाबा का अलीपे अंतरराष्टï्रीय कद हासिल कर रहा है और भारतीय पेटीएम में उसकी 40 फीसदी हिस्सेदारी है।

चीन के नीति निर्माता एक परिपक्व वित्तीय केंद्र स्थापित करना चाहते हैं। ताकि रेनमिनबी के मूल्यांकन और कारोबार के लिए एक व्यापक बाजार बने। उन्होंने अल्पावधि के मुद्रा बाजार से मध्यम अवधि के बॉन्ड बाजार और लंबी अवधि के बहुस्तरीय शेयर बाजार की राह तय की है। फिलहाल विश्व व्यापार का 2 फीसदी और 1.4 फीसदी वैश्विक निवेशक पोर्टफोलियो रेनमिनबी आधारित हैं। अभी लंबा रास्ता तय करना है लेकिन उसका दायरा स्पष्टï हो। चीन अपने वैश्विक वित्तीय प्रोफाइल को अपने विशाल आर्थिक और सुरक्षा प्रोफाइल के साथ सुसंगत बनाना चाहता है। ये मिलकर चीन की भूराजनैतिक दबदबे की होड़ की भरपाई करेंगे। 

चीन के दबदबे वाली वैश्विक वित्तीय व्यवस्था अमेरिका के नेतृत्व वाली व्यवस्था से अलग होगी। इस पर राज्य का नियंत्रण अधिक होगा। यह अधिक विनियमित होगी और अस्थिरता को लेकर कम संवेदनशील भी। एक विश्लेषक के मुताबिक यह संभव है कि रेनमिनबी का अंतरराष्टï्रीयकरण वैश्विक वित्तीय परिदृश्य को गहराई से बदल देगा। इसके बाद राज्य प्रबंधित मौद्रिक संबंधों का दौर सामने आएगा जो कम उदार होंगे। यह विकास देश की आर्थिक संभावनाओं और उभरती विश्व व्यवस्था में उसके कद पर भी असर डालेगा। ऐसे में उचित रणनीतिक प्रतिक्रिया के जरिये जवाब दिया जा सकता है लेकिन फिलहाल ऐसा कुछ नजर नहीं आ रहा है। 
Keyword: चीन, मुद्रा, युआन, रेनमिनबी, अंतरराष्टरीयकरण,
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