बिजनेस स्टैंडर्ड - '2019 में यदि भाजपा हारी तो बड़ी गिरावट के आसार'
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'2019 में यदि भाजपा हारी तो बड़ी गिरावट के आसार'

समी मोडक /  April 20, 2018

इलारा कैपिटल के वाइस-चेयरमैन एवं मुख्य कार्याधिकारी राज भट्टï का कहना है कि राजनीतिक अनिश्चितता बाजार के लिए सबसे बड़ा जोखिम है। भट्टï ने समी मोडक के साथ बातचीत में कहा कि ऐसी स्थिति में बाजार में गिरावट 2004 में संप्रग-1 के सत्ता में आने के बाद दर्ज किए गए उतार-चढ़ाव की तुलना में ज्यादा आ सकती है, क्योंकि बाजार में अभी भाजपा की हार की आशंका का असर नहीं देखा गया है। पेश हैं मुख्य अंश:

पिछले साल की शानदार तेजी के बाद बाजार इस साल कमजोर दिख रहे हैं। ऐसे में वर्ष के शेष समय के लिए क्या नजरिया है?
बाजार हमेशा धारणा, खासकर वैश्विक निवेशकों की चाल के हिसाब से काम करते रहे हैं। साथ ही मैं यह कहना चाहूंगा कि राजनीतिक अनिश्चितता अब सबसे बड़ा कारक है। निवेशक इसे लेकर चिंतित हैं कि भाजपा-नीत राजग पूरी तरह से बहुमत में नहीं आ सकता है। बाजार में फिलहाल भाजपा की पराजय की आशंका का असर नहीं दिखा है।

क्या आप भाजपा के नुकसान (यदि पराजित होती है) की स्थिति में संप्रग-1 जैसी गिरावट का अनुमन जता रहे हैं?
हम बाजार में उससे भी बड़ी गिरावट देख सकते हैं। यदि भाजपा अल्पमत में भी सरकार बनाती है तो बाजार अच्छी स्थिति में होगा। लेकिन यदि भाजपा या राजग गठबंधन को पूरी तरह बहुमत नहीं मिलता है तो यह देश के लिए एक झटका होगा। हम यह जानते हैं कि मौजूदा समय में कांग्रेस बहुमत हासिल नहीं कर सकती है। इसलिए वह गठबंधन सरकार बना सकती है। यह तब के हालात पर निर्भर करेगा। यदि 2019 का चुनाव परिणाम तीसरे मोर्चे की सरकार के निर्माण के पक्ष में रहता है तो बाजार में उससे ज्यादा गिरावट आ सकती है जब 2004 में संप्रग-1 के सत्ता में आने के बाद दर्ज की गई थी। 

लेकिन गठबंधन सरकारों के अधीन बाजार और अर्थव्यवस्था इतनी ज्यादा खराब नहीं रही है। इस बारे में आपकी क्या प्रतिक्रिया है?
यह इस पर निर्भर करेगा कि किस तरह का गठबंधन बनेगा। हमने तीसरे मोर्चे की गठबंधन सरकार नहीं देखी है, जबकि यह मोर्चा लंबे समय से अस्तित्व में है। इस बार हालात अलग हो सकते हैं। मौजूदा समय की तुलना पिछले हालात से नहीं की जा सकती। पार्टियां सरकार निर्माण के लिए एकजुट होने की स्थिति में नहीं दिख रही हैं। यदि कांग्रेस को 200 सीटें भी मिलती हैं तो बाजार के लिए समस्या पैदा नहीं होगी। 

बाजार के लिए अन्य प्रमुख चिंताएं क्या हैं?
वैश्विक रूप से हालात बेहद अस्थिर हैं। ब्याज दरें अमेरिका में तेजी से बढ़ रही हैं। प्रतिफल सपाट बना हुआ है जो मंदी का संकेत दे रहा है। इस मंदी के लिए कारक कुछ भी हो सकता है। फिलहाल यह चीन-अमेरिका व्यापार युद्घ या अमेरिका और रूस के बीच युद्घ की संभावना है। इसे लेकर भू-राजनीतिक अनिश्चितता पैदा 
हुई है।

क्या तेल की ऊंची कीमतें भी चिंताजनक हैं?
तेल कीमतें चढ़ रही हैं क्योंकि कीमतों में नरमी के बावजूद पिछले कुछ वर्षों से नई क्षमता तैयार नहीं हुई है। लेकिन 70 डॉलर प्रति डॉलर पर तेल की वापसी होने पर हम फिर से इसमें नए निवेश की संभावना देखेंगे। मुझे नहीं लगता कि तेल कीमतें ज्यादा ऊपर जाएंगी, क्योंकि नई क्षमता दिख रही है और साथ ही वैकल्पिक ईंधन का इस्तेमाल भी बढ़ रहा है। इसलिए मेरा मानना है कि इसकी अधिकतम सीमा 80 डॉलर प्रति बैरल होगी। 

इन समस्याओं को देखते हुए निवेशकों को मौजूदा हालात में बाजार में किस तरह की रणनीति अपनानी चाहिए?
मैं दीर्घावधि पर दांव लगाने के लिए कहना चाहूंगा। जब हर कोई बिकवाली कर रहा है, तो यह खरीदारी के लिए अच्छा समय है। सरकारी बैंक अच्छे निवेश दांव हो सकते हैं। इनमें काफी गिरावट आई है। कई निवेशक मान रहे हैं कि पीएसयू बैंक लगभग समाप्त हो गए हैं। लेकिन मेरा मानना है कि वे मजबूती के साथ उभर सकते हैं। पूरे पीएसयू क्षेत्र में व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। 

आप किस तरह के सुधारों की उम्मीद कर रहे हैं?
इस संदर्भ में कई बदलाव लाए जाने की जरूरत होगी। व्यवसाय करने की प्रक्रिया आसान बनाना बेहद जरूरी है। अगला बड़ा सुधार निजीकरण के संदर्भ में किया जा सकता है और साथ ही आयकर ढांचे में भी बदलाव की जरूरत है। कुछ सुधार शुरू किए जा चुके हैं, उदाहरण के लिए एयर इंडिया का निजीकरण। जो भी पार्टी अगली सरकार बनाती है, उसे सुधार प्रक्रिया को बरकरार रखने की जरूरत होगी। 
Keyword: इलारा कैपिटल, वाइस-चेयरमैन, मुख्य कार्याधिकारी,
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