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एस्सार स्टील के ऋणदाताओं के लिए कड़ी चुनौती

ईशिता आयान दत्त और देव चटर्जी / कोलकाता/मुंबई April 20, 2018

एस्सार स्टील की दिवालिया प्रक्रिया में नैशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) द्वारा बोली प्रक्रिया के दूसरे दौर को ठुकराए जाने और रिजोल्यूशन पेशेवर (आरपी) और बकाएदारों की समिति (सीओसी) से पहले राउंड की बोली प्रक्रिया की समीक्षा करने को कहे जाने से इस मामले को लेकर एक बार फिर से इसे लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई है। धीर ऐंड धीर एसोसिएट्ïस के अशोक धीर का कहना है, 'इनसॉल्वेंसी ऐंड बैंगक्रप्टसी कोड (आईबीसी) एक नया कानून है और आज के निर्णय से आईबीसी को और अधिक मजबूत बनाने में मदद मिलेगी। आरपी और सीओसी के लिए अगला कदम दोनों बोलियों की पात्रता की जांच करना और इनके उपयुक्त पाए जाने पर वित्तीय बोलियों को खोलना है।' 

इस घटनाक्रम से जुड़े सूत्रों का कहना है कि सीओसी के पास दरअसल, तीन विकल्प हैं। पहला यह है कि सीओसी बोलियां खोल सकती है और पात्रता के बजाय वित्तीय उम्मीदों पर खरा नहीं उतरने के आधार पर उन्हें ठुकरा सकती है। दिवालिया प्रक्रिया से जुडे एक वकील ने कहा, 'दोनों राउंड की वित्तीय बोलियों को खोला नहीं गया है। लेकिन बोलियों का दूसरा राउंड ज्यादा आक्रामक रहने की संभावना है, इसलिए सीओसी पहले राउंड की बोलियों को योग्यता के आधार पर ठुकरा सकती है।' धीर का मानना है, 'ऋणदाता यदि बोलियों से संतुष्टï नहीं हुए तो वे नई बोलियां आमंत्रित करने पर विचार कर सकते हैं।'


पहले राउंड में बोलियां सिर्फ न्यूमेटल और आर्सेलरमित्तल द्वारा सौंपी गई थीं। हालांकि दूसरे राउंड में, परिचालन कंपनी में एक निवेशक के तौर पर जेएसडब्ल्यू भी न्यूमेटल के साथ शामिल हुई। इसके अलावा वेदांत भी इस दौड़ में शुमार हो गई। पहले राउंड में बोलियां सौंपने के बाद, वीटीबी (न्यूमेटल में मुख्य निवेशक) ने संकेत दिया था कि वह अपनी बोली बढ़ा सकती है। इसलिए, इसकी संभावना अधिक है कि दूसरे राउंड में बोलियां ज्यादा आक्रामक रहेंगी। सूत्रों का कहना है कि ऋणदाताओं द्वारा नई बोलियां आमंत्रित किए जाने की ज्यादा संभावना है। 

सूत्रों का कहना है कि सीओसी के लिए दूसरा विकल्प निर्णय के खिलाफ अपील करना, जो समय गंवाने वाली प्रक्रिया साबित हो सकती है। उनका कहना है कि तीसरा विकल्प होगा बोलियों को खोलना और न्यूमेटल तथा आर्सेलरमित्तल को संशोधन के लिए समय दिया जाना। लेकिन इसे अन्य पक्षों द्वारा चुनौती दी जा सकेगी। 

आर्सेलरमित्तल को तकनीकी आधार पर अयोग्य पाया गया, क्योंकि उसने उत्तम गैल्वा स्टील्स में शेयर बेचे, पर उन्हें स्टॉक एक्सचेंज के रिकॉर्डों से प्रवर्तक के तौर पर सूची से अलग नहीं किया था। हालांकि उसके बाद से आर्सेलरमित्तल को स्टॉक एक्सचेंजों के रिकॉर्ड से प्रवर्तक के तौर पर डीक्लासीफाइड (अलग) किया जा चुका है। उधर उत्तम गैल्वा स्टील्स ने भी अपने सभी बकाया चुकाने के लिए समय मांगा है। सूत्रों का कहना है कि इन मामलों में ऋणदाता भी कोई निर्णय लेने से परहेज कर रहे हैं। वकीलों का कहना है कि इस मामले में अंतिम निर्णय सर्वोच्च न्यायालय की ओर से ही आ सकता है। 
Keyword: एस्सार स्टील, दिवालिया, नैशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल, एनसीएलटी, बोली, रिजोल्यूशन पेशेवर, आरपी,
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