बिजनेस स्टैंडर्ड - आर्सेलर और न्यूमेटल को राहत
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आर्सेलर और न्यूमेटल को राहत

विनय उमरजी / अहमदाबाद 04 19, 2018

एनसीएलटी ने पहले चरण की बोली पर पुनर्विचार करने को कहा, दूसरा चरण अवैध
बिजनेस स्टैंडर्ड आर्सेलर और न्यूमेटल को राहतनैशनल कंपनी लॉ पंचाट (एनसीएलटी) के अहमदाबाद पीठ ने एस्सार स्टील के निपटान पेशेवरों और ऋणदाताओं की समिति से आर्सेलरमित्तल और न्यूमेटल की पहले चरण की बोलियों पर पुनर्विचार करने को कहा है। पीठ ने इस आदेश से 2 अप्रैल को दूसरे चरण में लगाई गई बोली अमान्य हो गई, जिससे वेदांत और जेएसडब्ल्यू स्टील इस दौड़ से बाहर हो गई हैं।

रूस की वीटीबी समर्थित न्यूमेटल मॉरीशस और आर्सेलरमित्तल इंडिया ही पहले चरण की बोलीदाता थीं और वेदांत ने दूसरे चरण में बोली लगाई थी। जेएसडब्ल्यू न्यूमेटल में रुइया ट्रस्ट की 25 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने के बाद दूसरे चरण में शामिल हुई थी। पीठ ने कहा कि एस्सार स्टील के ऋणदाताओं की समिति और निपटान पेशेवर के तौर पर नियुक्त सतीश कुमार गुप्ता ने ऋणशोधन अक्षमता एवं दिवालिया संहिता की धारा 29 (ए)(सी) और 30 (4) के तहत निपटान प्रक्रिया की अनदेखी की।

पंचाट ने कहा, 'निपटान पेशेवर और ऋणदाताओं की समिति द्वारा दूसरे चरण की बोली आमंत्रित करने का निर्णय बुद्घिमानी भरा हो सकता है लेकिन कानूनी रूप से यह उपयुक्त नहीं है। निपटान पेशेवर और ऋणदाताओं की समिति को न्यूमेटल और आर्सेलरमित्तल की बोली को खारिज करने के अपने निर्णय पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया जाता है।' 

एनसीएलटी ने 20 मार्च से 19 अप्रैल की अवधि को भी ऋणशोधन प्रक्रिया के लिए अनिवार्य 270 दिन से बाहर कर दिया है। इससे अब निपटान प्रक्रिया को पूरा करने के लिए एक महीने का अतिरिक्त समय मिल जाएगा। अक्टूबर 2017 में एस्सार स्टील के अधिग्रहण के लिए 6 प्रतिभागियों ने अभिरुचि पत्र जमा कराए थे लेकिन पहले चरण की बोली में केवल न्यूमेटल और आर्सेलरमित्तल ने ही हिस्सा लिया था।

हालांकि 20 मार्च को रूस की वीटीबी समर्थित न्यूमेटल अपनी बोली के पक्ष में एनसीएलटी पहुंच गई थी। बाद में ऋणदाताओं की समिति ने न्यूमेटल और आर्सेलरमित्तल दोनों की बोलियां धारा 29ए के तहत खारिज कर दी। इसके बाद आर्सेलरमित्तल भी इस निर्णय को चुनौती देने एनसीएलटी पहुंच गई। ऋणदाताओं की समिति ने यह कहते हुए आर्सेलरमित्तल की बोली को खारिज किया था कि वह डिफॉल्टर कंपनी उत्तम गैल्वा की प्रवर्तक बनी हुई थी और स्टॉक एक्सचेंज पर प्रवर्तक के तौर पर उसका नाम था। हालांकि आर्सेलरमित्तल ने उत्तम गैल्वा में अपनी हिस्सेदारी को पहले ही बेच दिया था।

दूसरी ओर न्यूमेटल की बोली को इसलिए रद्द किया गया था क्योंकि उसमें डिफॉल्टर कंपनी एस्सार स्टील के प्रवर्तक परिवार के सदस्य रेवंत रुइया की 25 फीसदी हिस्सेदारी थी। आर्सेलरमित्तल और न्यूमेटल दोनों ने बयान जारी कर एनसीएलटी के आज के आदेश का स्वागत किया।

आर्सेलरमित्तल के प्रवक्ता ने कहा, 'हमने हमेशा कहा है कि हमारी कंपनी एस्सार स्टील पर बोली लगाने के योग्य है और हमें खुशी है कि एनसीएलटी ने हमारे प्रस्ताव को ऋणदाताओं की समिति (सीओसी) में पेश करने की बात कही है।'

उन्होंने कहा कि निप्पोन स्टील ऐंड सुमितोमो मेटल्स की साझेदारी में आर्सेलरमित्तल की बोली एस्सार स्टील के लिए सबसे उपयुक्त है और यह भारतीय स्टील उद्योग को नई ऊंचाई पर ले जाएगा। यूरोप की प्रमुख स्टील कंपनी ने कहा, 'हमने एक मजबूत और प्रतिस्पद्र्घी पेशकश की है और साथ ही विस्तृत औद्योगिक योजना भी दी है। हम एस्सार के लिए सुगम समाधान की उम्मीद कर रहे हैं।'

न्यूमेटल के प्रवक्ता ने कहा, 'हम एनसीएलटी के अहमदाबाद पीठ के आदेश का स्वागत करते हैं। पीठ ने हमारी मूल बोली को विचार के लिए सीओसी के पास वापस भेज दिया है।' उन्होंने कहा कि कंपनी ने औद्योगिक और वित्तीय रूप से एक आकर्षक समाधान योजना सौंपी है। हमें उम्मीद है कि सीओसी हमारे प्रस्ताव पर निष्पक्ष और समग्र दृष्टिकोण के साथ विचार करेगी।

इससे पहले एनसीएलटी ने रुइया की अगुआई वाली एस्सार स्टील के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया को स्वीकार कर लिया था। कंपनी पर कुल 450 अरब रुपये से अधिक का कर्ज है। एस्सार स्टील पर कुल बकाये में भारतीय स्टेट बैंक की अगुआई वाले कंसोर्टियम की 93 फीसदी हिस्सेदारी है। गुजरात उच्च न्यायालय ने पिछले साल 17 जुलाई को ऋणदाताओं द्वारा शुरू की गई दिवालिया प्रक्रिया के खिलाफ एस्सार स्टील की याचिका को निपटाया था जिसके बाद एनसीएलटी ने एस्सार स्टील के निदेशक मंडल को भंग करने का आदेश दिया था।

पंचाट ने अल्वारेज ऐंड मार्शल इंडिया के सतीश कुमार गुप्ता को समाधान पेशेवर नियुक्त किया था।  दिवालिया कानून (आईबीसी), 2016 के मुताबिक समाधान पेशेवर कंपनी के ऋण के भुगतान के बारे में 180 दिन में कोई समाधान योजना सौंप सकता है। इस योजना को ऋणदाताओं की समिति से 75 फीसदी बहुमत के साथ मंजूरी मिलनी चाहिए। उसके बाद ही इसे एनसीएलटी में दाखिल किया जा सकता है। योजना को मंजूरी के लिए पंचाट को सौंपे जाने का अधिकतम समय 270 दिन है।

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