बिजनेस स्टैंडर्ड - कंपनी बचाने की जुगत में जेपी
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Thursday, November 15, 2018 05:50 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम अर्थव्यवस्था खबर

कंपनी बचाने की जुगत में जेपी

करन चौधरी और इंदिवजल धस्माना / नई दिल्ली 04 15, 2018

बिजनेस स्टैंडर्ड कंपनी बचाने की जुगत में जेपीदिवालिया रियल एस्टेट कंपनी जेपी इन्फ्राटेक लिमिटेड (जेआईएल) के अधिग्रहण के लिए सुधीर वालिया के सुरक्षा एसेट रीकंस्ट्रक्शन कंपनी से लेकर अदाणी समूह जैसे दिग्गजों ने बोली लगाई है। हालांकि कंपनी के प्रवर्तकों को इस बात की आशंका है कि कंपनी का मूल्यांकन घटकर आधा रह सकता है, इसीलिए उन्होंने कंपनी पर अपना दावा पेश करने के लिए उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।बोलीदाताओं ने 70 से 80 अरब रुपये के दायरे में बोली लगाई है, वहीं जेआईएल के करीबी सूत्रों ने कहा कि कंपनी का मूल्यांकन 160 अरब रुपये से कम नहीं है।

कंपनी से जुड़े एक सूत्र ने कहा, 'कंपनी के पास 3300 एकड़ का जमीन पड़ी है, जिसका अभी इस्तेमाल नहीं हुआ है और इसकी कीमत करीब 100 अरब रुपये से अधिक है। बाकी संपत्तियों को मिला लें तो इसका मूल्यांकन करीब 160 अरब रुपये  हो जाता है।'

मामले के जानकार सूत्रों के अनुसार डॉयचे बैंक कंपनी के परिचालन के लिए निपटान पेशेवरों को 14 अरब रुपये का अंतरिम वित्तपोषण देने को तैयार है। हालांकि बैंक की ओर से इसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टिï नहीं की जा सकी। जेआईएल ने उच्चतम न्यायालय को सौंपे अपने हलफनामे में कहा है कि उसकी पेशकश अन्य बोलीदाताओं से बेहतर है।

जेआईएल को उम्मीद है कि उच्चतम न्यायालय उसके प्रस्ताव को स्वीकार करेगा, जिससे कंपनी को डॉयचे बैंक से 14 अरब रुपये हासिल करने में मदद मिलेगी। कंपनी ने करीब 5.5 अरब रुपये भी जमा कराए हैं और अगले दो महीने में 2 अरब रुपये और जमा करा सकती है। सूत्रों ने बताया, 'अगर कंपनी को अंतरिम वित्तपोषण मिलता है और अदालत पहले से जमा रकम वापस देती है तो उसके पास लंबित परियोजनाओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त रकम होगी।'

संपर्क करने पर जेपी के प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी ने उच्चतम न्यायालय से प्रस्ताव पर विचार करने का आग्रह किया है और दावा किया है कि यह प्रस्ताव मकान खरीदारों, अल्पांश शेयरधारकों सहित सभी शेयरधारकों के हित में है। प्रवक्ता ने कहा, 'हमारा मानना है कि हमारी पेशकश निपटान पेशेवरों के पास भेजे गए अन्य प्रस्तावों सेे कहीं बेहतर है।'

कंपनी द्वारा समय पर परियोजनाएं पूरी नहीं की जाने से करीब 32,000 मकान खरीदार फंसे हुए हैं। कंपनी की परियोजनाएं करीब आठ साल से अटकी हुई हैं। जेपी इन्फ्रा का दावा है कि उसने 13,500 मकानों को करीब-करीब तैयार कर लिया है और उसके खरीदारों को कब्जा प्रमाणपत्र मिल गए हैं या मिलने वाले हैं। सूत्रों ने कहा कि कंपनी को भरोसा है कि वह बाकी बचे फ्लैटों को 2021 तक बना लेगी।

उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार पिछले साल जब रियल एस्टेट नियमन कानून (रेरा) को लागू किया गया था तब जेपी ने तीन साल में सभी लंबित फ्लैटों को पूरा करने का वादा किया था। सूत्रों ने यह भी कहा कि शुरुआत में आईडीबीआई जेपी से इस शर्त पर भूखंड लेने को तैयार था कि वह तीन साल बाद उसे वापस खरीद लेगी।

हालांकि भारतीय रिजर्व बैंक ने कर्ज की अदला-बदली की अनुमति नहीं दी और उसे गैर-निष्पादित आस्तियां (एनपीए) घोषित कर दिया। इसके बाद आईडीबीआई जेपी इन्फ्रा को 5.26 अरब रुपये के ऋण डिफॉल्ट मामले में एनसीएलटी ले गई, वहीं मकान खरीदारों ने उच्चतम न्यायालय में कंपनी के खिलाफ मामला दायरा किया। अदालत में इस हफ्ते मामले की सुनवाई शुरू हो सकती है।

Keyword: real estate, property, JP, JIL, रेरा, जेपी, जेआईएल,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या अंतरिम बजट में लुभावने प्रस्ताव कर सकती है सरकार?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.