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मार्च में फिसला मगर निर्यात लक्ष्य पार

शुभायन चक्रवर्ती / नई दिल्ली April 13, 2018

पिछले चार महीने में पहली बार मार्च में देश के निर्यात में गिरावट आई है। हालांकि वित्त वर्ष 2017-18 के लिए तय निर्यात लक्ष्य 300 अरब डॉलर को पार करने में सफल रहा। मार्च में निर्यात 0.66 फीसदी घटकर 29.11 अरब डॉलर रहा। हालांकि पूरे वित्त वर्ष में निर्यात 9.78 फीसदी बढ़कर 302.84 अरब डॉलर रहा, जो सरकार द्वारा तय लक्ष्य 300 अरब डॉलर से थोड़ा अधिक है। वित्त वर्ष 2016-17 में कुल निर्यात 275.85 अरब डॉलर रहा था। 2014-15 तक देश का निर्यात 300 अरब डॉलर से ऊपर रहा था लेकिन वैश्विक नरमी तथा अन्य वजहों से 2015-16 में यह घटकर 262.29 अरब डॉलर पर आ गया था।
 
मार्च में 30 प्रमुख उत्पाद समूहों में से 18 के निर्यात में तेजी आई। लेकिन भारत के प्रमुख निर्यात क्षेत्रोंपर अभी भी दबाव बना हुआ है। रिफाइनरी उत्पादों के निर्यात में 13.22 फीसदी की गिरावट आई जबकि फरवरी में इसमें 27.44 फीसदी की वृद्घि दर्ज की गई थी। इसके साथ ही रत्न एवं आभूषण क्षेत्र में भी मार्च के दौरान 16.57 फीसदी की कमी आई। दूसरी ओर इंजीनियरिंग वस्तुओं का निर्यात 2.62 फीसदी बढ़कर 8.11 अरब डॉलर रहा जबकि फरवरी में इसमें 1.88 फीसदी की गिरावट आई थी। इसी तरह पेट्रोरसायन का निर्यात मार्च में 8.40 फीसदी बढ़ा। हालांकि आयात में तेजी का रुख बना हुआ है। मार्च में देश का आयात 7.15 फीसदी बढ़कर 42.80 अरब डॉलर रहा, जो फरवरी में दर्ज 10.4 प्रतिशत वृद्धि के मुकाबले कम रहा। मार्च में देश में 11.10 अरब रुपये का तेल आयात हुआ। हालांकि मार्च में आयात में 13.92 प्रतिशत बढ़ोतरी दर्ज हुई। इससे वर्ष 2017-18 के लिए संचयी आयात बिल 459 अरब डॉलर से अधिक हो गया, जो 384 अरब डॉलर से काफी अधिक है। इसी तरह, गैर-सोना आयात भी मार्च में 12.2 प्रतिशत दर से बढ़ा। गैर-तेल, गैर-गैस आयात फरवरी में कम होकर 7.28 प्रतिशत हो गया। जनवरी में इसमें 24.4 प्रतिशत तेजी आई थी। अर्थशास्त्रियों के अनुसार आधार प्रभाव की वजह से इसमें और कमी आने की उम्मीद है। 
 
हालांकि मार्च में 13.69 अरब डॉलर का व्यापार घाटा 11.98 अरब डॉलर से अधिक था। वित्त वर्ष 2017-18 के लिए घाटा बढ़कर 156.83 अरब डॉलर हो गया, जो वित्त वर्ष 2016-17 में 108.50 अरब डॉलर था। तेल आयात के मद में अधिक रकम फूंके जाने से घाटा बढ़ा। पिछले कुछ महीनों में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज हुई है। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोट्स ऑर्गेनाइजेशन के अध्यक्ष गणेश कुमार गुप्ता ने कहा, 'निर्यात को प्रभावित करने वाले घरेलू मुद्दों पर ध्यान दिए जाने की जरूरत है। इसकी वजह यह है कि वैश्विक स्तर पर पैदा होने वाली चुनौतियों और अमेरिका की संरक्षणवादी नीतियों के कारण विश्व के सबसे बड़े निर्यातक देश चीन से होने वाले निर्यात में भी मार्च 2018 में 2.7 प्रतिशत तेजी आई।' कारोबारियों ने निर्यात में सुस्ती के लिए वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत कर रिफंड में देरी को जिम्मेदार ठहराया।
Keyword: export, import,,
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