बिजनेस स?टैंडर?ड - संघर्ष को तैयार डालमिया भारत सीमेंट
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संघर्ष को तैयार डालमिया भारत सीमेंट

अभिषेक रक्षित / कोलकाता 04 09, 2018

बिनानी सीमेंट के समाधान पर घमासान

बिनानी के सर्वोच्च न्यायालय पहुंचने के कारण डालमिया भारत सीमेंट ने बनाई योजना
डालमिया भारत सीमेंट के सीईओ महेंद्र सिंघी की राय है कि लेनदारों के साथ अदालत के बाहर निपटान भारत की कारोबारी सुगमता की वैश्विक रैंकिंग को जोखिम में डाल देगा
बिनानी इंडस्ट्रीज का मामला सर्वोच्च न्यायालय पहुंचने का अनुमान लगाते हुए डालमिया भारत सीमेंट ने पहले ही आपत्ति सूचना दाखिल कर दी है
सर्वोच्च न्यायालय इस मामले पर 13 अप्रैल को सुनवाई करेगा
अल्ट्राटेक सीमेंट के समर्थन से बिनानी इंडस्ट्रीज ने लेनदारों को अदालत के बाहर निपटान के तहत 76 अरब रुपये से ज्यादा की पेशकश की है, जो डालमिया भारत की तरफ से लेनदारों की समिति को की गई पेशकश से 1.1 अरब रुपये ज्यादा है

बिजनेस स?टैंडर?ड संघर्ष को तैयार डालमिया भारत सीमेंटएक ओर दिवालिया बिनानी इंडस्ट्रीज ने लेनदारों का बकाया भुगतान अदालत से बाहर निपटाने की अनुमति के लिए सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है, दूसरी ओर आईबीसी प्रक्रिया के तहत लेनदारों की पसंद बनकर उभरी डालमिया भारत सीमेंट इस कदम को रोकने के लिए हरसंभव कोशिश में जुट गई है। डालमिया भारत सीमेंट के सीईओ महेंद्र सिंघी की राय है कि लेनदारों के साथ अदालत के बाहर निपटान भारत की कारोबारी सुगमता की वैश्विक रैंकिंग को जोखिम में डाल देगा।  उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि बैंक उसके साथ बकाए का निपटान कैसे कर सकते हैं जिन पर धोखाधड़ी का आरोप लगा हो। पहले रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल विजय कुमार अय्यर ने एनसीएलटी के कोलकाता पीठ में आवेदन जमा कराया था, जिसमें बिनानी सीमेंट के प्रवर्तकों की संदिग्ध धोखाधड़ी वाली गतिविधियों का आरोप लगाया गया था।

सिंघी ने आरोप लगाया, यह वास्तव में गलत होगा अगर सरकारी बैंक महज 3-4 अरब रुपये के लिए बिनानी इंडस्ट्रीज का प्रस्ताव स्वीकार कर लेते हैं, जिनके खिलाफ रकम की हेराफेरी का आरोप लगा हो। यह नीरव मोदी या विजय माल्या की तरह अवैध गतिविधियों को बढ़ावा देगा। बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि ये आरोप अय्यर की तरफ से जमा कराए गए आवेदन पर आधारित हैं और ये तथ्य डालमिया भारत सीमेंट की जांच के नतीजे नहीं हैं। अग्रणी बैंकों के मुताबिक विजय माल्या कॉरपोरेट लोन डिफॉल्ट में इरादतन चूककर्ता हैं जबकि पंजाब नैशनल बैंक ने नीरव मोदी की तरफ से अनधिकृत लेनदेन का आरोप लगाया है।

बिनानी इंडस्ट्रीज ने इन आरोपों को रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल की सोच करार दिया है और कुछ लेनदारों ने कहा है कि सवालिया घेरे में आए लेनदेन धोखाधड़ी नहीं होती। बिनानी इंडस्ट्रीज का मामला सर्वोच्च न्यायालय पहुंचने का अनुमान लगाते हुए डालमिया भारत सीमेंट पहले ही सर्वोच्च न्यायालय में आपत्ति सूचना दाखिल कर दी है ताकि इस अदालत में होने वाली कार्यवाही बिना उसकी जानकारी के न हो पाए।

शनिवार को बिनानी इंडस्ट्रीज के साथ अदालत के बाहर निपटान की इच्छा लेनदारों ने जताई थी, अगर इसे सर्वोच्च न्यायालय की मंजूरी मिल जाए, इसलिए बिनानी इंडस्ट्रीज ने आईबीसी की धारा 62 ए के तहत विशेष अनुमति याचिका दाखिल की और अदालत के बाहर निपटान के लिए आवेदन जमा कराया। सर्वोच्च न्यायालय इस मामले पर 13 अप्रैल को सुनवाई करेगा।

लेनदारों की समिति के एक सदस्य ने कहा, सर्वोच्च न्यायालय जाने के बिनानी इंडस्ट्रीज के कदम के खिलाफ लेनदार नहीं हैं। दिवालिया संहिता लेनदारों को अधिकतम कीमत मिलने की बात करता है और ऐसे में हमें बिनानी इंडस्ट्रीज का कदम आईबीसी की भावना के खिलाफ नहीं दिखता। हालांकि सिंघी ने स्पष्ट किया कि ऐसी अधिकतम कीमत अलग-थलग रहकर निपटान करने पर लागू नहीं हो सकती। सूत्रों ने कहा कि डालमिया भारत सीमेंट के वकील शुक्रवार को अदालत में अपनी दलील के तहत ये सभी चीजें रख सकते हैं। बिनानी इंडस्ट्रीज के सूत्रों ने कहा कि लेनदार पहले ही कंपनी से अग्रिम जमा के तौर पर 7.5 अरब रुपये ले चुके हैं, जो उनके प्रस्ताव के प्रति लेनदारों की सहमति दर्शाता है। बिनानी इंडस्ट्रीज के सूत्रों ने कहा, इस मामले में अल्ट्राटेक सीमेंट भी प्रत्युत्तरदाता है क्योंकि वह सौदे का वित्त पोषण कर रही है।

बिनानी इंडस्ट्रीज के प्रवक्ता ने कहा, आईबीसी में प्रवर्तक को पूरी सांविधिक बकाए का भुगतान से रोककर दंडित करने और महज मूकदर्शक बने रहने का प्रावधान नहीं है कि उसकी कंपनी भारी छूट पर बिक गई, जिससे वित्तीय लेनदारों, कारोबारी परिचालन लेनदार व शेयरधारकों को नुकसान हो। अल्ट्राटेक सीमेंट के समर्थन से बिनानी इंडस्ट्रीज ने लेनदारों को अदालत के बाहर निपटान के तहत 76 अरब रुपये से ज्यादा की पेशकश की है, जो डालमिया भारत की तरफ से लेनदारों की समिति को की गई पेशकश से 1.1 अरब रुपये ज्यादा है।
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