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ट्रैक्टर बिक्री महिंद्रा और एस्कॉट्र्स को देगी दम

राम प्रसाद साहू /  April 08, 2018

महिंद्रा ऐंड महिंद्रा (एमऐंडएम) और एस्कॉट्र्स के शेयरों में 3 प्रतिशत की तेजी दर्ज हुई है। इसकी वजह यह है कि दोनों कंपनियों की ट्रैक्टर बिक्री वित्त वर्ष 2018 में शानदार रही। घरेलू बाजार में दोनों में प्रत्येक कंपनी की ट्रैक्टर बिक्री में 50 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई। फरवरी में एस्कॉट्र्स के ट्रैक्टरों की बिक्री दोगुनी हो गई और मार्च में सालाना आधार पर इसमें 65 प्रतिशत इजाफा हुआ। एमऐंडएम के ट्रैक्टरों की बिक्री एक साल पहले के मुकाबले 50 प्रतिशत अधिक रही और क्रमागत आधार पर इसमें 38 प्रतिशत तेजी आई। ग्रामीण क्षेत्रों में सकारात्मक माहौल, रबी का अधिक उत्पादन और पिछले कुछ महीनों में नए मॉडलों के आने से बिक्री में तेजी दिखी। एमऐंडएम, एस्कॉट्र्स और अन्य ट्रैक्टर कं पनियों में 20 प्रतिशत तेजी देखते हुए वित्त वर्ष 2018 में टैक्टरों की बिक्री 6,50,000 यूनिट के सर्वश्रेष्ठï स्तर पर पहुंच सकती है। यह वित्त वर्ष 2014 के 6,34,000 यूनिट से अधिक होगी। 

 
वित्त वर्ष 2017 में संभलने से पहले वित्त वर्ष 2015 और 2016 में ट्रैक्टरों की बिक्री की वृद्धि दर 18 प्रतिशत रही थी। सामान्य मॉनसून, ब्याज दरों में कमी, ऊंचा न्यूतम समर्थन मूल्य और राज्यों द्वारा कृषि ऋण माफी से वित्त वर्ष 2018 में मांग में इजाफा हुआ। एमऐंडएम अपने नए ब्रांड 'टै्रकस्टार' के जरिये ट्रैक्टर बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाना चाहती है। कंपनी ग्रोमैक्स (गुजरात सरकार के साथ 60:40 अनुपात में संयुक्त उद्यम) के जरिये यह ब्रांड लाएगी। प्रतिस्पद्र्धियों की तुलना में इसकी कीमत 5 से 10 प्रतिशत कम रखी जाएगी। 
 
एमऐंडएम की बाजार हिस्सेदारी फिलहाल 43 प्रतिशत है और ट्रैकस्टार के जरिये यह इसमें इजाफा करना चाहेगी। वित्त वर्ष 2019 में ट्रैक्टर बिक्री में मजबूत वृद्धि की उम्मीद की जा रही है। कंपनी को वित्त वर्ष 2019 में ट्रैक्टर उद्योग की बिक्री में 8 से 10 प्रतिशत बढ़ोतरी की उम्मीद है। एमऐंडएम के लिए ट्रैक्टरों की बिक्री महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि इसके कुल राजस्व में इस खंड की हिस्सेदारी 30 प्रतिशत है, लेकिन इससे भी अहम बात यह है कि इसके कुल मुनाफे में ट्रैक्टरों का योगदान 50 प्रतिशत होता है।
 
हल्के व्यावसायिक वाहनों से भी एमऐंडएम को खासी मदद मिली है। वित्त वर्ष में इन वाहनों की बिक्री 20 प्रतिशत अधिक रही है। कंपनी इस खंड में सबसे आगे हैं और इसकी बाजार हिस्सेदारी 40 प्रतिशत है। कंपनी के वाहन खंड में यह श्रेणी 30 प्रतिशत राजस्व का योगदान देती है। हां, यूटिलिटी व्हीकल खंड में कंपनी पीछे चल रही है। इस खंड में एमऐंडएम की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2012 के 56 प्रतिशत से कम होकर अब 25 प्रतिशत रह गई है। मार्च 2018 में बिक्री में एक साल पहले के मुकाबले 4.7 प्रतिशत तेजी दर्ज हुई, जबकि वित्त वर्ष 2018 में यह 5.3 प्रतिशत के साथ निराशाजनक रही।  
 
वित्त वर्ष 2019 में कंपनी यटिलिटी व्हीकल, मझोली आकार की बहुउद्देश्यीय वाहन और स्पोट्र्स यूटिलिटी वाहन खंडों में तीन नए वाहनों पर दांव खेलेगी। एक साल के फॉरवार्ड एस्टिमेट्स के मुकाबले शेयर का कारोबार 12 गुना के स्तर पर हो रहा है, जो प्रतिस्पद्र्धियों के मुकाबले डिस्काउंट पर है। जेफरीज के विश्लेषकों के अनुसार इस वजह से यह आकर्षक हो जाता है। स्कॉट्र्स की बात करें तो यह वित्त वर्ष 2017-22 के दौरान कृषि खंड से अपना राजस्व दोगुना करना चाहती है। कंपनी के समेकित राजस्व में इस खंड की हिस्सेदारी 80 प्रतिशत है। नए उत्पादों और नेटवर्क में विस्तार, खासकर उत्तरी और मध्य क्षेत्रों में जहां कंपनी की कम हिस्सेदारी है, के दम पर यह ट्रैक्टर बाजार में  हिस्सेदारी मौजूदा 11 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत करना चाहती है। नए मॉडल आने से भी मार्जिन में सुधार की उम्मीद है, क्योंकि ये 41 से 50 हॉर्सपावर के दायरे में अधिक मुनाफा देने वाले हैं।
 
क्वांट ब्रोकिंग का कहना है कि कृषि उपकरणों, रेलवे और निर्माण उपकरणों पर अधिक जोर देने से ट्रैक्टर कारोबार पर इसकी निर्भरता कम हो जाएगी। ट्रैक्टर बिक्री के अलावा विश्लेषकों का मानना है कि हीरो मोटो कॉर्प और मारुति सुजूकी को भी ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक मांग से फायदा मिलना चाहिए, क्योंकि इनकी बिक्री का एक बड़ा हिस्सा छोटे शहरों और छोटे खंडों से आता है।
Keyword: tractor, mahindra, महिंद्रा ऐंड महिंद्रा,
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