बिजनेस स्टैंडर्ड - बिनानी के प्रवर्तकों ने बढ़ाई पेशकश
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बिनानी के प्रवर्तकों ने बढ़ाई पेशकश

अभिषेक रक्षित / कोलकाता 04 05, 2018

ऋणशोधन प्रक्रिया

बिनानी सीमेंट ने अपने लेनदारों को 72.66 अरब रुपये का एकमुश्त भुगतान करेगी और सभी बकाये को निपटाने के लिए 2.5 अरब रुपये की अतिरिक्त पेशकश करेगी
लेनदार इस बात से भी डर रहे हैं कि अदालत के बाहर यदि कोई समझौता हुआ तो डालमिया भारत के साथ उसकी कानूनी जंग छिड़ सकती है
बिनानी इंडस्ट्रीज तब तक कोई रकम जमा कराने में समर्थ नहीं होगी जब तक उसे अदालत के बाहर समझौते के लिए एनसीएलटी से मंजूरी न मिल जाए

बिजनेस स्टैंडर्ड बिनानी के प्रवर्तकों ने बढ़ाई पेशकशदिवालिया सीमेंट कंपनी बिनानी सीमेंट के प्रर्वतकों ने अदालत के बाहर समझौते की अपनी पेशकश को लेनदारों द्वारा ठुकराए जाने के बाद पेशकश की रकम बढ़ाने का निर्णय लिया है। कंपनी पर अपना नियंत्रण बरकरार रखने की पुरजोर कोशिश करते हुए प्रवर्तकों ने 72.66 अरब रुपये की अपनी पेशकश में 2.5 अरब रुपये का इजाफा कर दिया है। सूत्रों ने बिजनेस स्टैंडर्ड से बताया कि 98.43 फीसदी हिस्सेदारी के लिए अल्ट्राटेक सीमेंट द्वारा 2.5 अरब रुपये का अतिरिक्त वित्त पोषण किया जाएगा। साथ ही लेनदारों को जुलाई 2017 से अब तक के ब्याज का भुगतान कर दिया जाएगा। सूत्रों ने कहा, 'अल्ट्राटेक सीमेंट के साथ यह सौदा 72.66 अरब रुपये जुटाने और जरूरत पड़ने पर बिनानी सीमेंट के लेनदारों के अतिरिक्त ब्याज के भुगतान के लिए किया गया है।' 

बिनानी सीमेंट ने आज कहा कि वह अपने लेनदारों को 72.66 अरब रुपये का एकमुश्त भुगतान करेगी और सभी बकाये को निपटाने के लिए 2.5 अरब रुपये की अतिरिक्त पेशकश करेगी। ऋणशोधन एवं दिवालिया संहिता (आईबीसी) प्रक्रिया के तहत लेनदारों की समिति डालमिया भारत के नेतृत्व वाले समूह को आश्वासन पत्र पहले ही जारी कर चुकी है। डालमिया भारत के नेतृत्व वाले समूह ने बिनानी सीमेंट के अधिग्रहण के लिए 65 से 66 अरब रुपये की पेकशक की थी।

इससे पहले लेनदारों ने जोर देकर कहा था कि वे बिनानी सीमेंट के किसी भी प्रस्ताव पर तभी चर्चा करेंगे जब वह अब तक के पूरे ब्याज का भुगतान करने की बात करे। लेनदारों ने बिनानी सीमेंट को 2.5 अरब रुपये जमा कराने और अदालत के बाहर समझौते के प्रति गंभीरता दिखाने के लिए बैंक गारंटी प्रस्तुत करने के लिए भी कहा था।

इस दिवालिया कंपनी के एक लेनदार ने कहा, 'हमारे पास कोई रकम जमा कराए बिना लेनदार यह कैसे मान सकते हैं कि बिनानी इंडस्ट्रीज ऋणशोधन प्रक्रिया से बाहर आने के बाद लेनदारों की पूरी रकम लौटा देगी। इसलिए लेनदारों ने बिनानी सीमेंट को पहले रकम जमा कराने और उसके बाद अदालत के बाहर समझौते के लिए सर्वोच्च न्यायालय से मंजूरी हासिल करने के लिए कहा है।'

बिनानी सीमेंट के करीबी कानूनी सूत्रों का कहना है कि बिनानी इंडस्ट्रीज तब तक कोई रकम जमा कराने में समर्थ नहीं होगी जब तक उसे अदालत के बाहर समझौते के लिए नैशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) से मंजूरी न मिल जाए। हालांकि, बिनानी सीमेंट ने अल्ट्राटेक सीमेंट के साथ सौदे के जरिये लेनदारों के पूरे बकाये को निपटाने के लिए रकम की व्यवस्था की है। लेकिन लेनदारों ने बिनानी सीमेंट से कुछ गारंटी की उम्मीद जताई है। यह बिनानी सीमेंट और उसके लेनदारों के बीच विवाद का एक प्रमुख मुद्दा बन गया है।

लेनदार इस बात से भी डर रहे हैं कि इस दिवालिया कंपनी के प्रवर्तकों के साथ अदालत के बाहर यदि कोई समझौता होता है तो वह ऋण शोधन एवं दिवालिया संहिता (आईबीसी) के नियमों का उल्लंघन हो सकता है। ऐसे में डालमिया भारत के साथ उसकी कानूनी जंग छिड़ सकती है।

एनसीएलटी के कोलकाता पीठ ने इस मामले में अधिकतम मूल्य को ध्यान में रखते हुए अदालत के बाहर समझौते की सलाह दी थी। हालांकि बाद में नैशनल कंपनी लॉ अपीलीय ट्रिब्यूनल ने एनसीएलटी के इस नजरिये को पलट दिया। डालमिया भारत के कार्यकारी निदेशक (कानून) संजीव गेमावत ने कहा, 'मूल्य को अधिकतम करने के लिए एकतरफा निर्णय नहीं लिया जा सकता। अदालत ने विभिन्न हितधारकों के हितों पर ध्यान दिए जाने की सलाह दी है।' 
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