बिजनेस स्टैंडर्ड - आधार सुरक्षा को वर्चुअल आईडी से मिलेगा सहारा
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आधार सुरक्षा को वर्चुअल आईडी से मिलेगा सहारा

मयंक जैन /  04 02, 2018

आभासी पहचान संख्या प्रणाली शुरू

बिजनेस स्टैंडर्ड आधार सुरक्षा को वर्चुअल आईडी से मिलेगा सहाराभारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण ने सोमवार को आधार के लिए आभासी पहचान संख्या (वर्चुअल आईडी) प्रणाली शुरू की, जो अपनी 16 अंकों की विशिष्ट संख्या की सहायता से आधार को बेहतर सुरक्षा प्रदान करेगी। अब सेवा प्रदाताओं को आधार संख्या देने के बजाय यह विशिष्ट पहचान संख्या दी जाएगी। यूआईडीएआई के आधिकारिक ट्विटर खाते से इसकी घोषणा की गई और बताया गया कि अब कोई भी व्यक्ति अपनी आभासी पहचान संख्या बना सकता है और सभी सेवा प्रदाताओं से उम्मीद है कि वे भी जल्दी ही आधार के स्थान पर इसे अपनाएंगे। प्राधिकरण का कहना है कि आधार ई-पोर्टल पर पता बदलवाने के लिए आभासी पहचान संख्या का प्रयोग किया जा सकता है। 

आधार को खातों से जोडऩे के क्रम में बैंक, दूरसंचार कंपनियां, बीमा कंपनियां आदि सेवा प्रदाताओं द्वारा आधार डेटा साझा करने के आरोपों और आंकड़ों की सुरक्षा के मद्देनजर इस वर्ष जनवरी में वर्चुअल आईडी की घोषणा की गई थी। उस समय प्राधिकरण ने कहा था कि आधार के स्थान पर वर्चुअल आईडी का प्रयोग करने से इन समस्याओं को दूर किया जा सकता है, क्योंकि यह आईडी बिना किसी क्रम या व्यवस्था के बनाई जाती है। साथ ही, प्रयोग के बाद इसे समाप्त किया जा सकता है और आवश्यकतानुसार दूसरी संख्या बनाई जा सकती है। 

प्राधिकरण ने पहले इसे शुरू करने की तारीख 1 मार्च घोषित की थी और पिछले चार सप्ताह से वह इस मामले पर चुप्पी साधे हुए था। हालांकि सोमवार को इस व्यवस्था के जारी होने के बाद अभी यह देखना बाकी है कि विभिन्न सेवा प्रदाता आधार की जगह आभासी पहचान संख्या स्वीकार करना कब शुरू करेंगे।

जनवरी में जारी सर्कुलर के अनुसार इसकी अंतिम तिथि 1 जून है और इसके बाद भी यह सेवा ना शुरू करने पर प्राधिकरण ने उनकी प्रमाणीकरण सुविधा खत्म करने की चेतावनी दी है। सर्कुलर में कहा गया, 'कई उत्पाद और सेवाओं के लिए आधार को अनिवार्य किया जा रहा है जिस कारण आधार से जुड़े आंकड़ों के संग्रहण और भंडारण में निजता संबंधी चुनौतियां मौजूद हैं। आधार एक स्थायी पहचान संख्या है और इसके आंकड़े जुटाने तथा डेटाबेस सहेजने की प्रक्रिया के लिए उचित सुरक्षा उपायों की आवश्यकता है।'

सर्कुलर में आधार संख्या को विभिन्न डेटाबेस तक पहुंच बनाने से रोकने की बात कही गई थी। इस कारण आशा की जा रही थी कि प्राधिकरण एक आधार संख्या के साथ बहुत सी आभासी पहचान संख्या बनाने की अनुमति देगा, जिससे कोई भी दो सेवा प्रदाता एक ही संख्या का प्रयोग ना करें, लेकिन अभी एक समय में एक आधार से केवल एक वर्चुअल आईडी बनाई जा सकती है। आभासी पहचान संख्या सुविधा ऐसे समय में जारी की गई है, जब सर्वोच्च न्यायालय आधार की संवैधानिक प्रमाणिकता पर विचार कर रहा है।

पिछले सप्ताह, यूआईडीएआई के मुख्य कार्याधिकारी अजय भूषण पांडे ने भारत के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाले पांच सदस्यीय पीठ को एक प्रजेंटेशन दिया था। इसमें बताया गया था कि आभासी पहचान संख्या आधार से जुड़ी बहुत सी समस्याओं का निदान कर देगी। हालांकि पीठ ने वर्चुअल आईडी के आसान उपयोग को लेकर कई सवाल किए और पूछा कि ग्रामीण क्षेत्र के अशिक्षित लोग हर बार इंटरनेट के माध्यम से किस तरह आभासी पहचान संख्या बना पाएंगे।

पीठ ने पांडे को आभासी पहचान संख्या की कार्यप्रणाली पर हलफनामा दायर करने को कहा। हालांकि विशेषज्ञ आभासी पहचान संख्या के वर्तमान स्वरूप से थोड़े निराश हैं क्योंकि यह एक से अधिक वर्चुअल आईडी बनाने की सुविधा नहीं देती। आईआईटी दिल्ली में प्रोफेसर और यूआईडीएआई की सुरक्षा समीक्षा समिति के सदस्य शुभाशिष बनर्जी कहते हैं कि एक दिन में केवल एक वर्चुअल आईडी बना सकने की सीमा तय करना किसी भी तरह से उचित नहीं है। वह कहते हैं, 'मैं इस तरह की रोक का कारण नहीं समझ पा रहा। यदि आपको एक दूरसंचार कंपनी और एक मोबाइल वॉलेट कंपनी को वर्चुअल आईडी देनी है तो इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए आपको दूसरे दिन तक इंतजार करना पड़ेगा। आभासी संख्या के सही तरीके से काम करने के लिए इसका उचित क्रियान्वयन जरूरी है और अभी योजना को लागू करने के तरीकों को लेकर स्पष्ट दिशानिर्देशों का अभाव है।'

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