बिजनेस स्टैंडर्ड - भारतीय कॉर्पोरेट जगत के लिए निर्धारक वर्ष
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भारतीय कॉर्पोरेट जगत के लिए निर्धारक वर्ष

पवन लाल /  March 30, 2018

शेयर बाजारों में तेजी को लेकर मची हलचल, पंजाब नैशनल बैंक (पीएनबी) में हुआ बड़ा बैंक घोटाला, वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) का क्रियान्वयन, देश की दो प्रतिष्ठित कंपनियों टाटा समूह एवं इन्फोसिस का नेतृत्व परिवर्तन, दूरसंचार क्षेत्र में अफरातफरी और कुछ जानी-पहचानी कंपनियों की आर्थिक सेहत में आई गिरावट वित्त वर्ष 2017-18 की कुछ प्रमुख कारोबारी घटनाएं रही हैं। मुफ्त वॉयस सेवा की पेशकश के साथ दूरसंचार क्षेत्र में कदम रखने वाली रिलायंस जियो इन्फोकॉम ने समाप्त वित्त वर्ष में अपनी बाजार हिस्सेदारी तेजी से बढ़ाई है। जियो ने यह साबित कर दिया कि किसी भी कंपनी का उत्पाद ही असली मालिक होता है। अपनी सेवा के दम पर जियो ने दूरसंचार क्षेत्र में वह हलचल पैदा की जो इससे पहले कभी भी नहीं देखी गई थी। करीब 31 अरब डॉलर की लागत से शुरू हुई रिलायंस जियो ने अक्टूबर-दिसंबर की तिमाही में 5.04 अरब रुपये का लाभ अर्जित कर एक तरह से सबको अचरज में डाल दिया। यह इस लिहाज से भी अहम है कि उसकी पिछली तिमाही में जियो को 2.71 अरब रुपये का घाटा हुआ था। जियो के उपभोक्ताओं की संख्या करीब 16 करोड़ हो चुकी है और इसमें तीव्र वृद्धि हो रही है। इस वजह से बाकी दूरसंचार कंपनियों पर तगड़ा असर पड़ा है। अधिकांश कंपनियों को अपने ग्राहक गंवाने पड़े हैं और उन्हें घाटा भी उठाना पड़ा है। जियो की चुनौती का सामना करने के लिए वोडाफोन और आइडिया का विलय होने वाला है।

 
दूरसंचार क्षेत्र में जारी आपाधापी के बीच एन चंद्रशेखरन ने 100 अरब डॉलर मूल्य के टाटा समूह के चेयरमैन के तौर पर एक साल भी पूरा कर लिया। इस दौरान चंद्रशेखरन ने समूह की कंपनियों के पुराने मामलों का निपटारा करने पर खास ध्यान दिया। इनमें एनटीटी डोकोमो के साथ चल रहा 1.2 अरब डॉलर के कानूनी विवाद का निपटारा और टाटा टेलीसर्विसेज के मोबाइल सेवा कारोबार को भारती एयरटेल में विलय का फैसला भी शामिल है। टाटा स्टील के यूरोपीय कारोबार का जर्मन कंपनी टिसेनक्रुप में विलय भी किया गया। घरेलू बाजार में टाटा मोटर्स की घटती हिस्सेदारी को भी कम करने में सफलता मिली है। यात्री वाहन बाजार में टाटा मोटर्स की हिस्सेदारी एक फीसदी बढ़ी है जबकि वाणिज्यिक वाहनों के मामले में 2.5 फीसदी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस दौरान टाटा मोटर्स का भारतीय कारोबार पहली बार लाभ की स्थिति में भी पहुंचा। टाटा समूह की 22 सूचीबद्ध कंपनियों का समेकित मूल्य 2017-18 में 1.45 लाख करोड़ रुपये हो गया। समूह की शीर्ष कंपनियों टीसीएस, टाइटन और टाटा केमिकल्स का शानदार प्रदर्शन इसकी वजह रहा। अपनी खास कार्यशैली के लिए मशहूर चंद्रशेखरन ने समूह के साथ नए नेतृत्व को भी जोड़ा। इस दौरान सौरभ अग्रवाल को समूह का मुख्य वित्त अधिकारी, आरती सुब्रमण्यन को मुख्य डिजिटल अधिकारी, पुनीत चटवाल को इंडिया होटल्स का प्रबंध निदेशक एवं सीईओ, राजीव सभरवाल को टाटा कैपिटल का जिम्मा सौंपना, वनमाली अग्रवाल को ढांचागत इकाई और डिफेंस ऐंड एयरोस्पेस क्षेत्र का अध्यक्ष तथा संजय दत्त को टाटा हाउसिंग का नया सीईओ बनाया गया।
 
लंबे समय तक भारतीय आईटी कंपनियों की अगुआ रही इन्फोसिस गत वित्त वर्ष में खुद को नए सिरे से खोज पाने में नाकाम रही। हालांकि इस कंपनी के पहले गैर-संस्थापक सीईओ विशाल सिक्का काफी हद तक स्थिरता लेकर आए थे लेकिन हर कोई इससे सहमत नहीं था। कंपनी के सह-संस्थापक नारायणमूर्ति ने जब उनकी कार्यशैली को लेकर कुछ सवाल उठाए तो सिक्का अलग हो गए। ऐसे समय में सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि को चेयरमैन बनाकर इन्फोसिस को संभालने की कोशिश की गई। लेकिन इस मामले में कंपनी के संस्थापकों के सामने उत्तराधिकार का मामला फिर खड़ा कर दिया। दिग्गज आईटी कंपनी के संस्थापक सदस्यों और बाहर से आए कार्यकारी अधिकारियों के बीच संतुलन साधने की चुनौती बरकरार है। 
 
आइकैन इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स के चेयरमैन अनिल सिंघवी कहते हैं, 'भारतीय कंपनी जगत काबिल पेशेवरों को कंपनी चलाने नहीं देता है और निदेशक मंडल के भी पर्याप्त सशक्त नहीं होने से सीईओ अक्सर काफी अहमियत हासिल कर लेते हैं। इन दोनों ही मोर्चों पर इन्फोसिस को खमियाजा भुगतना पड़ा है।'  कर्जदार कंपनियों से बकाया राशि की वसूली में आ रही दिक्कतों को दूर करने के लिए लाए गए ऋणशोधन एवं दिवालिया संहिता (आईबीसी) कानून पर अमल का शुरुआती अनुभव खास उत्साहजनक नहीं रहा है। कर्जदार कंपनियों की सेहत सुधारने के साथ ही बैंकों के गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) में कमी लाने के मकसद से लाए गए इस कानून की प्रक्रिया मनचाहे नतीजे नहीं दे पाई है। 
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