बिजनेस स्टैंडर्ड - आधार सुरक्षा पर अहम कदम जरूरी
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Saturday, November 27, 2021 08:00 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम खबर

आधार सुरक्षा पर अहम कदम जरूरी

मयंक जैन /  03 27, 2018

मजबूत रहे डेटा का आधार

अदालत ने सत्यापन एजेंसियों के पास मौजूद डेटा की सुरक्षा पर उठाए गंभीर सवाल
यूआईडीएआई प्रमुख ने गोपनीयता व सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को दूर करने के लिए ज्यादा नियमन की पेशकश की
नामांकन और सत्यापन के लिए किए जाने वाले डेटा संग्रह की सुरक्षा व्यवस्था पर पीठ ने किया सवाल

बिजनेस स्टैंडर्ड आधार सुरक्षा पर अहम कदम जरूरीउच्चतम न्यायालय के पांच न्यायाधीशों के संविधान पीठ ने आधार की वैधानिकता को चुनौती देने के मामले पर मंगलवार को सुनवाई करते वक्त कहा कि सत्यापन एजेंसियों के स्तर पर मौजूद डेटा को ज्यादा सुरक्षित रखने की जरूरत है। पीठ ने कहा कि भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) के सर्वर का परिसर में सुरक्षित रहना ही पर्याप्त नहीं है क्योंकि डेटा नामांकन एजेंटों के बाद सत्यापन एजेंसियों तक पहुंचता है जो व्यावसायिक हितों के लिए डेटा का गलत इस्तेमाल कर सकती हैं। 

यूआईडीएआई के सीईओ (मुख्य कार्याधिकारी) अजय भूषण पांडेय ने अदालत में एक प्रेजेंटेशन के दौरान कहा कि प्राधिकरण लोकेशन पर जाकर डेटा नहीं जुटाता है और जहां तक सत्यापन की बात है तो नागरिक भी इसकी वेबसाइट पर ताजा सत्यापन की जांच कर सकते हैं। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने इस पर प्रतिक्रिया दी, 'सीआईडीआर (क्लासलेस इंटर डोमेन राउटिंग) में उच्च स्तर की सुरक्षा होती है जबकि सत्यापन उपयोगकर्ता एजेंसी (एयूए) के साथ यह संभव नहीं है। ऐसे में आधार को लेकर मुश्किल हो सकती है।'

यूआईडीएआई की वेबसाइट के मुताबिक 307 सत्यापन उपयोगकर्ता एजेंसियां (एयूए) हैं और प्रत्येक एजेंसियों के पास सब-एयूए होते हैं जो इन उद्यमों के बुनियादी ढांचे का इस्तेमाल करते हैं ताकि सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की जा सके और ई-केवाईसी, कल्याणकारी योजनाओं से जुड़ी डिलिवरी जैसी सेवाएं मुहैया कराई जा सकें। पीठ ने कहा कि भले ही यूआईडीएआई के पास सत्यापन के लिए कोई व्यवस्था न हो और सूचनाओं का संग्रह करने के खिलाफ कानून होने के बावजूद अगर एयूए ऐसी सेवाएं देता हो तब भी निजी कंपनियों द्वारा इसका गलत इस्तेमाल संभव है।

यूआईडीएआई प्रमुख ने कहा कि अगर आधार की गोपनीयता और सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं बढ़ेंगी तो प्राधिकरण और सरकार ज्यादा कानून और नियम बना सकते हैं। पांडेय ने गुरुवार को अदालत में अपने प्रेजेंटेशन में तर्क दिया कि यूआईडीएआई जल्द ही वर्चुअल पहचान संख्या लॉन्च करेगा जो 16 अंकों की कोई भी संख्या हो सकती है जिससे वास्तविक आधार संख्या को गोपनीय बनाया जा सकता और इसे कंपनियों और थर्ड पार्टी के साथ साझा किया जा सकता है। वर्चुअल पहचान संख्या 1 मार्च को लॉन्च की जानी थी लेकिन प्राधिकरण या सरकार ने इसके लॉन्च की कोई सूचना नहीं दी है।

पीठ ने वर्चुअल पहचान संख्या के उपयोगी होने के बावजूद इस पर सवाल किए हैं क्योंकि नई संख्या देने की प्रक्रिया और फिर इसे खत्म करना देश की निरक्षर आबादी के लिए जटिल हो सकता है। पांडेय ने कहा कि इससे सुरक्षा का एक और स्तर तैयार होगा। हालांकि न्यायाधीशों ने उनसे एक नोट जमा करने को कहा कि वर्चुअल आईडी और यूआईडी टोकन किस तरह काम करेंगे कि दोहराव को रोका जा सकेगा। 

यूआईडीएआई प्रमुख ने अदालत में लाइव सत्यापन का नमूना पेश किया और बताया कि कैसे लोग अपने बायोमेट्रिक सत्यापन के जरिये बैंक से पैसे निकाल सकते हैं। उन्होंने यह तर्क दिया कि देश में सबकी पहुंच बैंकिंग सेवाओं तक नहीं है क्योंकि लोग डेबिट कार्ड और एटीएम के पिन का इस्तेमाल करने में सहज नहीं हैं लेकिन छोटे स्तर के लेन-देन के लिए वे आधार के जरिये अंगूठे का इस्तेमाल कर सकते हैं।

यूआईडीएआई के पास संग्रहित सूचनाओं को लेकर भी चर्चा हुई जिस पर मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने कहा कि यूआईडीएआई का कहना है कि सूचनाओं को कूट रूप में तब्दील कर दिया गया है कि प्राधिकरण भी इसे नहीं समझ सकती। हालांकि अजय भूषण पांडेय ने कहा कि प्राधिकरण के पास इन सूचनाओं की कुंजी है। इस पर फिर मुख्य न्यायाधीश ने पूछा कि प्राधिकरण इस सूचना तक अपनी पहुंच बना सकती है जिस पर पांडेय ने कहा कि प्राधिकरण ऐसा कर सकता है। 

अजय भूषण पांडेय ने आधार से जुड़ी गलत सूचनाएं फैलाने के लिए मीडिया को भी जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने बताया कि सत्यापन की सफलता विभिन्न स्तर पर देखी गई है और सरकारी विभागों में 88 फीसदी, बैंकों में 95 फीसदी और दूरसंचार में 97 फीसदी तक सफलता दर देखी गई। सत्यापन की असफलता से जुड़ी चर्चा आधार के लिए एक बड़ी समस्या हो सकती है जिसको लेकर लंबे समय यह तर्क भी दिया जा रहा है कि सत्यापन के दौरान बायोमेट्रिक अवरोध की वजह से लाभार्थियों को योजनाओं का लाभ नहीं दिया जा रहा है। मंगलवार को एक समूह ने एक वेबसाइट लॉन्च की जिसमें देश भर में सत्यापन से जुड़ी असफलता का ब्योरा दिया गया है। इसमें यह भी बताया है कि आधार सत्यापन पूरा न होने की वजह से लाभार्थियों को लाभ नहीं मिला जिससे कथित तौर पर उनकी मृत्यु हो गई।
Keyword: aadhar, data, court,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या कोरोनावायरस के नए स्वरूप के डर से और फिसलेगा बाजार?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.