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आयकर रिटर्न 31 मार्च तक नहीं तो नोटिस के लिए तैयार रहें

तिनेश भसीन /  March 25, 2018

सरकार ने आयकर रिटर्न देर से भरने के नियम दो अलग-अलग बजटों (2017-18 और 2016-17) में बदल दिए हैं। इस कारण देर से आयकर रिटर्न भरने की आखिरी तारीख के बारे में भी लोगों को भ्रम हो सकता है। जिन लोगों ने वित्त  वर्ष 2015-16 के लिए आयकर रिटर्न अभी तक नहीं भरे हैं, उनके पास 31 मार्च, 2018 तक उन्हें दाखिल करने का मौका है। अगर यह तारीख भी छूट जाती है तो करदाताओं को वित्त वर्ष 2015-16 का रिटर्न भरने का मौका नहीं मिल पाएगा। लेटलतीफ लोगों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे आखिरी तारीख तक रिटर्न हर हाल में भर दें। अगर वे चूक जाते हैं तो उन्हें खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। टैक्समैन डॉट कॉम के महाप्रबंधक नवीन वाधवा ने कहा, 'कर विभाग देर करने वाले व्यक्ति को नोटिस जारी कर सकता है

 
और उससे आयकर रिटर्न दाखिल करने के लिए कह सकता है। उस सूरत में करदाता को विलंब के एवज में जुर्माना तो भरना ही पड़ेगा, कुल बकाया कर पर ब्याज भी देना पड़ेगा।' अगर नोटिस भेजे जाने के बाद भी रिटर्न नहीं भरा जाता है तो आकलन अधिकारी को मौजूद तथ्यों का अध्ययन कर उस व्यक्ति की संभावित आय तय करने और उसी के अनुसार कर की मांग करने का भी पूरा अधिकार है। सरकार ने 2016-17 के बजट में रिटर्न भरने के नियमों में मामूली ढील दी थी। नियम बदलने के बाद भी करदाता को रिटर्न भरने के लिए पहले की तरह दो साल तो मिलते हैं, लेकिन 2017 के लिए करदाता देर से रिटर्न दाखिल करने के बाद भी उनमें संशोधना कर सकता है। पुराने नियमों में देर से भरे गए रिटर्न में किसी भी तरह के संशोधन की इजाजत नहीं थी। अगर आपने वित्त वर्ष 2016-17 का रिटर्न भी अभी तक नहीं भरा है तो आप 31 मार्च, 2019 तक उसे दाखिल कर सकते हैं।
 
देर से रिटर्न भरने के कई नुकसान हैं। आपको अगर कुछ छूट मिलनी थी तो नहीं मिल पाएगी और आप घाटे (आवास संपत्ति पर हुए घाटे के अलावा) को आगे ले जाने यानी कैरी फॉरवर्ड करने का मौका भी गंवा देंगे। इसके अलावा आपको आयकर अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत ब्याज भी देना पड़ सकता है। जितना आयकर बकाया है, उस पर भी 1 फीसदी मासिक की साधारण ब्याज दर से रकम ली जाएगी, जो आयकर रिटर्न की निर्धारित तारीख से ही वसूली जाएगी। इस तरह फायदा तो आप गंवाते ही हैं, अलग से रकम भी देनी पड़ती है।
 
यह बात सच है कि वेतनभोगी की कर देनदारी का खयाल उसका नियोक्ता रख लेता है और वेतन देने से पहले स्रोत पर ही कर कटौती (टीडीएस) कर लेता है और उसे आयकर विभाग के पास जमा भी कर देता है। लेकिन इसके कारण वेतनभोगी व्यक्ति को रिटर्न दाखिल करने से छूट नहीं मिल जाती। क्लियरटैक्स के संस्थापक और मुख्य कार्य अधिकारी अर्चित गुप्ता कहते हैं, 'अगर अधिक टीडीएस काट लिया गया है तो उसकी वापसी  यानी रिफंड का दावा आयकर रिटर्न दाखिल करके ही किया जा सकता है।  यदि वेतन से होने वाली आय के अलावा भी ऐसी कोई आय हो रही है, जिस पर कर चुकाया जाना है तो उसका खुलासा आयकर रिटर्न के जरिये कर दिया जाना चाहिए। अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो करदाता अपनी आय का जो हिस्सा छिपाता है, उस पर जुर्माना लगाया जा सकता है। कारोबारियों के मामले में भी यही होता है।' 
 
इतना ही नहीं, इस पूरी कवायद के बाद करदाता को अपना रिटर्न दाखिल करने के लिए दो के बजाय केवल एक ही साल मिलता है। 2017-18 के लिए रिटर्न दाखिल करने की आखिरी तारीख 31 मार्च, 2019 है। एक कर सलाहकार कंपनी के पार्टनर का कहना है, 'करदाताओं को अब अपने कर रिटर्न दाखिल करने के मामले में बहुत सतर्कता बरतने की जरूरत है क्योंकि आखिरी तारीख वाली मियाद में काफी कमी कर दी गई है और जुर्माने की रकम बढ़ा दी गई है।' 2.50 लाख रुपये से अधिक आय वाले व्यक्ति के लिए आयकर रिटर्न भरना अब अनिवार्य कर दिया गया है। 
 
कर विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि सरकार ने अगले आकलन वर्ष (2918-19) से रिटर्न दाखिल करने में देर होने पर जुर्मानों में भी अच्छा खासा इजाफा कर दिया है। अगर आप वित्त वर्ष 2017-18 के लिए रिटर्न 31 जुलाई, 2018 तक दाखिल नहीं करते हैं तो आपसे 5,000 रुपये जुर्माना वसूला जाएगा। अगर आप यह काम दिसंबर के बाद और मार्च तक करते हैं तो जुर्माना बढ़ाकर 10,000 रुपये हो जाएगा। कर विशेेषज्ञ यह भी बताते हैं कि आयकर विभाग उन व्यक्तियों की पड़ताल पूरी मुस्तैदी के साथ कर रहा है, जिन्होंने कर या रिटर्न जमा नहीं किए हैं। नोटबंदी के दौरान 2 लाख रुपये से अधिक रकम जमा करने वाले लोगों को जब से नोटिस भेजे गए हैं तब से विभाग की सक्रियता और भी बढ़ गई है। इस साल पहली बार ऐसा दिख रहा है कि करदाताओं को संदेश भेजे जा रहे हैं। इन संदेशों में उनसे 'अनुपालना पोर्टल' पर जाने और यह बताने के लिए कहा जा रहा है कि उन्होंने आयकर रिटर्न दाखिल क्यों नहीं किया।
 
गुप्ता कहते हैं, 'ऐसे करदाताओं की कमी नहीं होगी, जिन्होंने नोटबंदी के दौरान नकदी जमा की होगी, लेकिन उसी आकलन वर्ष यानी आकलन वर्ष 2017-18 में अपने आयकर रिटर्न दाखिल नहीं किए होंगे। इसीलिए ऐसे करदाताओं के लिए 31 मार्च, 2018 बहुत अहम तारीख है क्योंकि उनके पास अपनी आय के स्रोतों का खुलासा करने, उस आय पर कर चुकाने और पाक-साफ हो जाने का यही आखिरी मौका है।'
Keyword: income tax, CBDT, आयकर विभाग कराधान,
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