बिजनेस स्टैंडर्ड - नेता-अफसर की खास जिंदगी आम लोगों से करती है दूर
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Thursday, July 19, 2018 11:11 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

नेता-अफसर की खास जिंदगी आम लोगों से करती है दूर

जिंदगीनामा
कनिका दत्ता /  March 22, 2018

जब रॉयटर्स ने प्रधानमंत्री कार्यालय और छह अन्य सरकारी कार्यालयों के लिए 140 एयर प्यूरिफायर खरीदे जाने के बारे में बताया तो उससे भारत की बिगड़ती हालत के बारे में अंदाजा लगाया जा सकता था। यह रिपोर्ट भारत में रहने से जुड़ी कड़वी सच्चाइयों को बयां करती है। यह भारतीय नेताओं के साथ-साथ नौकरशाहों के भी जमीनी हकीकत से दूर होने की अनचाही झलक दिखाता है। प्रदूषित इलाकों में हवा की खराब गुणवत्ता सुधारने के लिए बनाए  गए एयर प्यूरिफायर प्रदूषणकारी कणों को रोककर साफ हवा घर के भीतर छोड़ते हैं। लेकिन दिल्ली की बड़ी आबादी अब भी ऐसे प्यूरिफायर से अछूती है। प्यूरिफायर एक तरह से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में हवा को साफ कर पाने में सरकार की नाकामी को भी बयां करते हैं क्योंकि इस इलाके में देश के प्रधानमंत्री के अलावा तीन राज्यों के मुख्यमंत्रियों के आवास भी मौजूद हैं। संसाधनों के वितरण में इस तरह की असमानता पूरे देश में सार्वजनिक नीति के निर्माण के केंद्र में रही है। लोगों के लिए नीतियां बनाने के लिए जिम्मेदार लोगों का जीवन जीने का तरीका गरीबों की बात तो छोडि़ए, मध्य आय वर्ग के भी अधिकांश लोगों की तरह नहीं होता है। 

संबंधित खबरें
आसान नहीं
 
वैसे सरकारी प्रतिष्ठानों में कामकाज के बेहतर हालात की जरूरत से इनकार नहीं किया जा सकता है। ऐसे में यह सवाल पूछा जाना चाहिए कि एक सांसद या अधिकारी की जीवनशैली एक सामान्य भारतीय की जीवनशैली से कितनी अलग होनी चाहिए। इसका मतलब यह नहीं है कि हरेक शख्स को त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री माणिक सरकार का अनुसरण करना चाहिए। लगता था कि माणिक ने सादगी भरी जीवनशैली को ही अपना ध्येय बना लिया था।  लेकिन इसमें कोई शक नहीं है कि भारत के सरकारी प्रतिष्ठानों को शायद ही उन मुश्किलों का सामना करना पड़ता है जिनसे एक आम नागरिक को दो-चार होना पड़ता है। भारत में शहरीकरण की अव्यवस्थित प्रक्रिया के लिए काफी हद तक यही बात जिम्मेदार है। शहरों में एयर प्यूरिफायर, वाटर फिल्टर, पावर बैकअप और एयर कंडीशनर तक आसान पहुंच समृद्ध एवं उच्च मध्य वर्ग की ही होती है। खुद को 'भारत' से अलग करने के लिए 'इंडिया' वातानुकूलित कारों (अधिकांशत: एसयूवी) और घरों के लिए निजी सुरक्षा सेवा जैसा घेरा भी अपने इर्दगिर्द खड़ा करता है। 
 
भारत के नेताओं और नौकरशाहों को ये सभी सुविधाएं करदाताओं के पैसे से ही मिलती हैं। भले ही सरकारी गाडिय़ों में लालबत्ती और सायरन का इस्तेमाल प्रतिबंधित किया जा चुका है लेकिन पुलिस का दस्ता यह सुनिश्चित करता है कि बसों और कारों में बैठे आम लोग पसीना बहाते रहें ताकि सांसद और मंत्री अपनी मंजिल तक आसानी से पहुंच सकें। इसकी संभावना काफी कम है कि इनमें से कोई भी व्यक्ति आम आदमी के इस्तेमाल वाली सार्वजनिक परिवहन प्रणाली जैसे शहरी बस सेवा या लगातार बढ़ती भीड़ से जूझ रहे मेट्रो नेटवर्क या ऑटो रिक्शा में सफर करता हो। इन खास लोगों को शायद ही प्रदूषित पेयजल की समस्या का सामना करना पड़ता है और न ही लंबी बिजली कटौती के चलते उन्हें देर तक पसीना बहाना पड़ता है।
 
इसके बावजूद नेताओं और अफसरों को बाजार दर से बेहद कम दर पर आवासीय सुविधा मिलती है। ऐसे में महाराष्ट्र आवास प्राधिकरण ने पूर्व सासंदों और विधायकों को भी किफायती आवास की सुविधा देने की बात कही तो उसे लेकर जताई गई आपत्ति को आसानी से समझा जा सकता है। इसी तरह वित्त मंत्री ने एक सांसद के मासिक मूल वेतन सीधे दोगुना करते हुए एक लाख रुपये करने का बजट में ऐलान किया तो भी लोगों ने नाखुशी जताई। सांसदों के वेतन की समयबद्ध समीक्षा का नियम लागू होने के महज दो महीने पहले ही यह वेतन बढ़ोतरी कर दी गई।
 
आम करदाता के पैसे के दम पर नेता एवं अधिकारी जिस तरह की जीवनशैली जीते हैं वह देश की आबादी के बहुत कम हिस्से को ही नसीब हो पाती है। इसका मतलब है कि नीति-निर्माताओं को यह अहसास ही नहीं होता है कि एक औसत भारतीय नागरिक को मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने की जिम्मेदारी उन्हीं की है। यूरोप के कई लोकतांत्रिक देशों खासकर 'खुशहाल' स्कैंडिनेवियाई देशों में सांसद सार्वजनिक परिवहन का ही इस्तेमाल करते हैं और आम नागरिकों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाएं उन्हें भी दी जाती हैं। आम मतदाताओं की तरह जीवन जीने से उसे पेश आ रही समस्याओं को कहीं बेहतर तरीके से समझा जा सकता है। पश्चिमी देशों में राजनीति में प्रवेश का आम तौर पर मतलब जीवनशैली में गिरावट ही होता है। (डॉनल्ड ट्रंप भी शिकायत करते हैं कि उनके आलीशान ट्रंप टॉवर की तुलना में व्हाइट हाउस का रहन-सहन कूड़ाघर जैसा है।) हमारे कैबिनेट मंत्री अगर लगातार जाम में फंसें तो उन्हें यातायात व्यवस्था में सुधार की जरूरत का शिद्दत से अहसास होगा। सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली के मूलत: विनाशकारी होने की वजह यह है कि सांसदों और नौकरशाहों को आसानी से खास देखभाल (निजी अस्पतालों में भी) मिल जाती है। 
 
अगर ये लोग इलाज के लिए किसी मोहल्ला क्लिनिक में जाएं तो उन्हें नीतिगत बदलावों की जरूरत महसूस होगी। उससे प्रधानमंत्री के महत्त्वाकांक्षी सार्वभौम स्वास्थ्य देखभाल कार्यक्रम की कामयाबी के अवसर भी बढ़ेंगे। अमेरिका जैसे कई देशों में निर्वाचित प्रतिनिधियों को किफायती आवास के बजाय शोध के लिए बजट मिलता है। भारत में सांसदों को मिलने वाले भत्ते का इस्तेमाल अगर शोध के लिए होता तो नीति-निर्माण की गुणवत्ता में सुधार आता (और संसद में अधिक तथ्यपरक चर्चा भी हो पाती)। भारत में राजनीति को लेकर आम धारणा यही है कि यह बेहतर जीवनशैली हासिल करने का जरिया है न कि जनसेवा का माध्यम। अजीब विडंबना है कि औपनिवेशिक दौर के इस स्वभाव को स्वतंत्र भारत में भी असाधारण निष्ठा से निभाया जाता है। वैसे मोदी और उनके अधिकारियों को एयर प्यूरिफायर मिलने से हमें कोई एतराज नहीं है। लेकिन आम लोगों को भी साफ हवा में सांस लेने का मौका मिलना चाहिए।
Keyword: pollution, air, PMO,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या अवांछित कॉल नियमों का सख्ती से पालन करेंगी कंपनियां?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS General News   Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.