बिजनेस स्टैंडर्ड - सस्ती काली मिर्च के आयात पर प्रतिबंध
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सस्ती काली मिर्च के आयात पर प्रतिबंध

टी ई नरसिम्हन / चेन्नई March 22, 2018

सरकार ने काली मिर्च के लिए न्यूनतम आयात मूल्य (एमआईपी) घोषित किए जाने के लगभग 3-4 महीने बाद अब 500 रुपये प्रति किलोग्राम मूल्य के सीआईएफ (लागत, बीमा, मालभाड़ा) से नीचे इसके आयात को प्रतिबंधित कर दिया है।  इस उद्योग के विश्लेषकों का कहना है कि विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) की अधिसूचना कम मूल्य की काली मिर्च के आयात को पूरी तरह प्रतिबंधित कर सकती है। डीजीएफटी आलोक वर्धन चतुर्वेदी ने इस संबंध में जारी आदेश में काली मिर्च की आयात नीति में संशोधन की जानकारी दी है। अब तक आयात को इस नीति से मुक्त रखा गया था, लेकिन अब संशोधन के तहत इसे प्रतिबंधित किया गया है। हालांकि 500 रुपये किलोग्राम से महंगी काली मिर्च का आयात मुक्त बना रहेगा। यदि एमआईपी 500 रुपये प्रति किलोग्राम से कम है तो आयात प्रतिबंधित है। इससे पहले इस तरह का आयात जुर्माना चुकाकर किया जा सकता था।

 
इसके अलावा एडवांस्ड अथॉराइजेशन स्कीम के तहत आयात स्वतंत्र है और इसे उस स्थिति में एमआईपी शर्त से छूट हासिल है जब आयात ओलियोरेसिन के रस, पुन: निर्यात से जुड़ा हो, सिर्फ निर्माता निर्यातक द्वारा किया गया हो, कुछ खास शर्तों के अधीन होता हो।  कंसोर्टियम ऑफ पेपर ग्रोअर्स ऑर्गनाइजेशन के संयोजक कंकोडी पद्मनाभ का कहना है कि मुख्य तौर पर वियतनाम से कमजोर गुणवत्ता वाली काली मिर्च किसानों के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, क्योंकि इससे कीमत एक साल पहले के 720 रुपये प्रति किलोग्राम से घटकर 350 रुपये से भी नीचे रह गई है। उनका कहना है कि मौजूदा समय में जहां काली मिर्च की घरेलू कीमतें 390 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास हैं, वहीं आयातित घरेलू काली मिर्च के लिए यह 170 रुपये प्रति किलोग्राम है। उनका कहना है कि काली मिर्च के लिए कृषि लागत 490-500 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास बैठती है। उन्होंने कहा, 'आयातित काली मिर्च से गुणवत्ता समस्याएं भी जुड़ी हुई हैं और यह स्वास्थ्य के लिए अच्छी नहीं है।' केपीए के पूर्व कार्यकारी समिति सदस्य रोहन कोलाको का कहना है कि पूर्व में यदि एमआईपी का पालन नहीं किया जाता तो जुर्माना चुकाकर इस समस्या को निपटा लिया जाता था, लेकिन अब सख्त आयात शर्तें लगाई गई हैं जो उत्पादकों के लिए अच्छी हैं।
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